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भारत-भूटान संबंधों को नई रफ्तार, विकास सहयोग से रणनीतिक साझेदारी तक पहुंची दोस्ती

 नई दिल्ली । भारत और भूटान के बीच दशकों पुरानी मित्रता अब पारंपरिक विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य-केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच आर्थिक योजना, ऊर्जा, क्षेत्रीय संपर्क और डिजिटल-ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है।

भारत-भूटान संबंधों में आए इस बदलाव का आधार 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना है। अब भारत का विकास सहयोग केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित न रहकर भूटान की दीर्घकालिक विकास योजनाओं से जुड़ रहा है।

भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए 10 हजार करोड़ की सहायता
हाल ही में हुई 5वीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के लिए भारत द्वारा घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई।

 
 
 
 
 
 

इसमें से 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा-रोधी विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के तौर पर दी जा रही है।

 
 
 
 
 
 

इस सहयोग मॉडल की खासियत यह है कि परियोजनाएं भूटान की अपनी राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। इससे स्थानीय स्वामित्व और योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है।

‘अडिग साझेदार और बड़ा भाई’ है भारत
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत की 80वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे संदेश में भारत को ‘अडिग साझेदार और बड़ा भाई’ बताया।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत थिम्फू के साथ अपने विशेष संबंधों को अत्यंत महत्व देता है। उन्होंने भूटान की संप्रभुता, समृद्धि और ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

जलविद्युत में बड़ा संयुक्त उपक्रम
ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख आधार बना हुआ है। भारत की JSW Energy और भूटान की Druk Green Power Corporation (DGPC) ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है।

इसमें DGPC की 51 प्रतिशत और JSW Energy की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। यह परियोजना भूटान की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल है।

इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Exim Bank) के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा भी सक्रिय हो चुकी है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा।

सीमा अब बनेगी व्यापारिक गलियारा
भारत और भूटान साझा सीमा को केवल भौगोलिक सीमा के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग को असम के उदालगुड़ी जिले से जोड़ने वाला नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

 
 
 
 
 
 

नया मार्ग व्यापारिक बाधाओं को कम करने के साथ भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से बेहतर तरीके से जोड़ सकता है।

UPI और डाक सेवाओं का भी जुड़ाव
दोनों देशों का सहयोग अब डिजिटल क्षेत्र तक भी पहुंच गया है। गुवाहाटी में शुरू की गई पहली अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है।

इस पहल में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के Postransfer सिस्टम को भारत की UPI प्रणाली से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच डाक और वित्तीय सेवाओं को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

रेल और लॉजिस्टिक्स पर भी जोर
भूटान के पास फिलहाल अपना घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भूटान के माल परिवहन को तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाना है।

सीमा पर विकसित किए जा रहे लॉजिस्टिक केंद्र भी भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कुल मिलाकर, भारत-भूटान संबंध अब केवल विकास सहायता तक सीमित नहीं रह गए हैं। ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, परिवहन और दीर्घकालिक आर्थिक योजना में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की साझेदारी को नई रणनीतिक दिशा दे रहा है।

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