छत्तीसगढ़ / रायपुर
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है।
प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल
वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है।
खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी
छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है।
ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व
वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।
खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल
राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि "खनिज विकास मद" में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं।
समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान
प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है।
"छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है।
ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता: वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त
रायपुर 4 अप्रैल 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है।
प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल
वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है।
खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी
छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है।
ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व
वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।
खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल
राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि "खनिज विकास मद" में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं।
समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान
प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है।
"छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है।
ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।"
श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा ग्राम पंचायत भवन गुमा में राजयोग अनुभूति शिविर शुरू
रायपुर । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा ग्राम पंचायत भवन गुमा में समस्या रहित जीवन जीने की कला-राजयोग अनुभूति शिविर का शुभारम्भ उप सरपंच नितेश साहू, पंच चन्दूलाल साहू, राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी भावना दीदी, गायत्री दीदी और प्रतिभा दीदी ने किया। शिविर का समय रोजाना शाम को ५.३० से ७.०० बजे रखा गया है। शिविर में प्रवेश नि:शुल्क है।
शिविर मे आत्मानुभूति, परमात्मानुभूति, कर्मों की गहन गति, भारत के उत्थान और पतन की कहानी, राजयोग अनुभूति और समय की पहचान आदि विषयों पर राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी का एक घण्टे का व्याख्यान होता है। शिविर में कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है।
इस शिविर में गीता में वर्णित भारत के प्राचीन राजयोग का गहन अभ्यास कराया जाता है जो कि शरीर के अनेक घातक रोगों जैसे हृदयरोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन आदि के निवारण में बहुत ही लाभदायक सिद्घ हुआ है। सभी योगों में श्रेष्ठ होने के कारण इसे राजयोग कहा जाता है तथा सहज होने के कारण समाज के हर वर्ग में यह योग तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है।
मानवता की सेवा और दानशीलता के लिए हमेशा से आगे रहा है अग्रवाल समाज -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
कौशल्या माता विहार योजना : रजिस्ट्री नहीं कराने वालों के फ्लैट्स होगें निरस्त
आरडीए पर देखरेख और सुरक्षा खर्च का बढ़ता बोझ
रायपुर। कौशल्या माता विहार योजना (कमल विहार) में जिन आवंटितों ने फ्लैट्स की संपूर्ण राशि जमा करा दी किन्तु रजिस्ट्री करवा कर कब्जा नहीं ले रहे हैं। ऐसे आवंटितियों के फ्लैट्स निरस्त कर दिए जाएगें । ऐसे आवंटितियों को को रजिस्ट्री करवाने के लिए पहले सूचना दी जाएगी। यदि वे रजिस्ट्री नहीं करते हैं तो उनके फ्लैट्स निरस्त करने की कार्रवाई रायपुर विकास प्राधिकरण व्दारा की जाएगी। फ्लैट्स बन जाने के बाद प्राधिकरण को ऐसे आवंटितियों के फ्लैट्स की देखरेख व सुरक्षा में अतिरिक्त व्यय करना पड़ रहा है जिससे प्राधिकरण को हर महीने अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहना पड़ रहा है।
सीईओ ने फ्लैटों में जा कर निवासियों से पूछा – कोई समस्या तो नहीं..
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुन्दन कुमार ने चार घंटे तक कौशल्या माता विहार योजना का सघन दौरा कर किया। उन्होंने तकनीकी, राजस्व शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों से फ्लैट्स की समस्याओं के बारे जानकारी ली। वे निवासरत लोगों के फ्लैट्स में गए और उनसे पूछा कि “उन्हें यहां कोई समस्या तो नहीं है ? ” इस पर लोगों ने नालियों, सीपेज, साफ सफाई और स्ट्रीट लाईट नहीं जलने की समस्या बताई । जिस पर श्री कुमार ने तकनीकी अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्य सड़कों पर नियमित रुप से लाईट जले यह सुनिश्चित किया जाए। शिकायतकर्ता ने जो शिकायत की है उस स्ट्रीट लाईट को आज शाम से शुरु कर दें। उन्होंने निवासियों की मांग पर फ्लैट्स के पानी की पाईप लाईन में वाल्व लगाने का भी निर्देश दिया। जिन घरों में निर्माण की समस्याएं है उन्हें ठेकेदार के डिफेक्ट लाईबिल्टी पीरियड़ के अन्तर्गत होने के कारण सुधार कार्य कराने का भी निर्देश दिया।
आरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने योजना के विभिन्न सेक्टरों में निर्मित फ्लैट्स का निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया तथा योजना में निर्मित ईड्ब्लूएस, एलआईजी फ्लैट्स के आवंटन की स्थिति, रिक्त फ्लैट्स, निवासरत फ्लैट्स की संख्या से भी अवगत हुए। अधिकारियों ने उन्हें बताया गया कि रिक्त फ्लैट्स का विक्रय विज्ञापन के माध्यम से किया जा रहा है। स्थल निरीक्षण के दौरान सेक्टर – 2 में निर्माणाधीन रोहाऊस के 32 मकानों का भी अवलोकन किया गया। कार्य में देरी कारण उपस्थित ठेकेदार को फटकार लगाई और 18 अप्रैल तक मकानों का निर्माण कार्य पूर्ण करने हेतु लिखित सहमति ली गई।
इस मौके पर प्राधिकरण के अधीक्षण अभीयंता अनिल गुप्ता व एम.एस. पांडे, कार्यपालन अभियंता सुशील शर्मा, सहायक अभियंता विवेक सिन्हा, उप अभियंता कीर्ति केमरो, राकेश मनहरे, राजस्व अधिकारी श्रीमती ज्योति सिंह उपस्थित थी।
बेटी के सुनहरे भविष्य के लिए महतारी वंदन योजना बनी सहारा
रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की मातृशक्तियों के लिए एक नई उम्मीद की किरण दिखाई है। इस योजना के तहत प्रदेश की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है, जिससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, बल्कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए भी मदद मिल रही है।
श्याम नगर रायपुर की निवासी पूजा यादव ने बताया कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मैं सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही हूं। जो मेरी बेटी का भविष्य उज्जवल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। श्रीमती पूजा ने कहा, ‘‘अब मुझे विश्वास है कि मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित है और आर्थिक तंगी के कारण उसे कोई परेशानी नहीं होगी।’’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती पूजा ने कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस योजना से प्रदेश की मातृशक्तियां भविष्य में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करेंगी और अपने परिवार की भलाई के लिए मजबूती से कार्य करेंगी।
यह योजना प्रदेश की मातृशक्तियों को सिर्फ वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि एक नई पहचान भी दिला रही है। महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है और यह कार्यक्रम प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
गोपी-संतोषी का सपना हुआ पूरा
पीएम आवास से मिली पक्के छत की छांव
रायपुर । प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के छत का मकान बना और गोपी-संतोषी का सपना पूरा हो गया। ग्राम पंचायत निलजा की निवासी श्री गोपी डहरिया का परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा था। कहने को एक मकान था, कच्चा और जर्जर सा। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता और दिनोंदिन समस्याएं बढ़ती जा रही थी। मजदूरी ही परिवार का एकमात्र साधन था।
प्रचार-प्रसार के माध्यम से गोपी डहरिया को प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली और यह पता चला कि उनके परिवार का नाम आवास के लिए सूचीबद्ध है।
ग्राम पंचायत के सचिव ने उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने कहा। सभी दस्तावेजी कार्यवाही पूरी होने के बाद उनके घर का जीओ टैगिंग किया गया और पहले किस्त के रूप में 25 हजार रूपए श्री गोपी डहरिया के बैंक खाते में भेजा गया। इस राशि से श्री डहरिया ने छज्जा स्तर तक घर का काम पूरा करा लिया।
प्रधानमंत्री आवास मिलने से अधूरा सपना पूरा हुआ और उन्होंने बताया कि मन में कच्चे और टूटे-फूटे मकान को देखकर यह विचार आता था कि कब और कैसे पक्के घर में रहने का सपना पूरा होगा। श्री गोपी डहरिया बताते है कि आवास निर्माण के लिए अपने कच्चे घर को पूरी तरह तोड़ कर बनाया।
गोपी डहरिया की पत्नी संतोषी डहरिया ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन का लाभ मिला है। साथ ही बताया कि वह राष्ट्रीय आजीविका मिशन के समूह में जुड़कर अपना जीवन बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे है।
अब रायपुर जिले के धरसींवा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत निलजा में छप्पर वाले कच्चे मकान से पक्के छत में पूरे परिवार को देखकर संतोषी डहरिया खुश हो रही है और वह अपने पूरे परिवार सहित पक्के मकान में निवासरत है।
औद्योगिक नीति 2024-30 बेहतर, अधिक से अधिक करे निवेश
कलेक्टर ने उद्योगपतियों से किया आह्वान
रायपुर । सिविल लाईन, रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाऊस के कन्वेन्शन हॉल में औद्योगिक विकास नीति 2024-30, रैम्प तथा इज ऑफ डूईंग बिजनेस पर गुरूवार को संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 पर शासन की मंशा तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये किये गये नवीन प्रावधानों पर विचार व्यक्त कर उद्योगपतियों को अधिक से अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि हमारी औद्योगिक नीति काफी अच्छी है, इसमें कई ऐसे प्रावधान है जो उद्योगों को बढ़ावा देने में सहयोगी है। ऐसी नीतियों से प्रदेश में सकारात्मक माहौल निर्मित होगा और उद्योग व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित उद्योगपतियों से उन्होंने कहा कि आप हमारी नीति का प्रदेश से बाहर भी प्रचार-प्रसार करे और व्यापार का ऐसा वातावरण बनाए कि छत्तीसगढ़ में ज्यादा से ज्यादा निवेश हो। कलेक्टर ने कहा की प्रशासन और इंडस्ट्रीज सेक्टर मिलकर ऐसा कार्य करेंगे कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति तेजी से हो, युवाओं को रोजगार मिले और हमारे प्रदेश का नाम पूरे देश में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए। औद्योगिक विकास के लिए आप सभी को प्रशासन स्तर पर हर संभव सहयोग किया जाएगा।
कार्यशाला का आयोजन रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह की अध्यक्षता, सीएसआईडीसी के कार्यपालक संचालक श्री आलोक त्रिवेदी व उद्योग संचालनालय से संयुक्त संचालक श्री शिव राठौर की उपस्थिति में किया गया। इस कार्यशाला में रायपुर संभाग में स्थापित उद्योगों के प्रतिनिधि और सीए प्रतिभागी के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यशाला में केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमई उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये जारी रैम्प स्कीम की विस्तृत जानकारी ईवाय की टीम द्वारा दी गई। साथ ही राज्य की नवीन औद्योगिक विकास नीति 2024-30 पर विस्तृत परिचर्चा कर प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
इस कार्यशाला का आयोजन उद्योग विभाग द्वारा किया गया, जिसमें जिला व्यापार उद्योग केंद्र, रायपुर के मुख्य महाप्रबंधक के साथ गरियाबंद, धमतरी और महासमुंद के महाप्रबंधक उपस्थित रहे।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान
इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुए अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है।
इस नीति में स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुए 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एमएसएमई के अनुरुप किया गया है।
इस नीति के अंतर्गत युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दी जा रही है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।
सीईओ ने ग्राम पंचायत तुलसी नेवरा में पंचायत भवन का किया निरीक्षण
यूट्यूब स्टूडियो में युवा इंफ्लूएंसर्स से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना
वित्तीय अनियमितताओं को रोकने और खरीदारों के हितों की रक्षा करने रेरा ने 17 बैंकों को किया सूचीबद्ध
छत्तीसगढ़ रेरा की बड़ी पहल
रायपुर । छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने और प्रोजेक्ट में भूमि -मकान आदि सम्पत्तियां खरीदने वाले लोगों के हितों को संरक्षित करने के उद्देश्य से रेरा ने रियल एस्टेट में वित्तीय अनुशासन और पादर्शिता लाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में एक बैंक एम्पैनलमेंट इवेंट में रेरा ने 17 बैंकों को सूचीबद्ध किया और रियल एस्टेट प्रमोटरों के साथ अपने नए वित्तीय सुरक्षा मॉडल को साझा किया।
कार्यक्रम में रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने बताया कि इस नए वित्तीय माडल का मुख्य उद्देश्य आबंटियों के निवेश को सुरक्षित रखना और धनराशि के दुरुपयोग को रोकना है। बैंकों के सिस्टम को रेरा नामित खातों के अनुरूप बनाया गया है ताकि लेनदेन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बना रहे। साथ ही निधियों की निकासी, आवंटन और निगरानी सॉफ़्टवेयर-आधारित प्रणाली के माध्यम से होगी, जिससे मानव हस्तक्षेप न्यूनतम होगा और गलतियों की संभावना कम होगी।
हर प्रोजेक्ट के लिए मिलेगा रियल-टाइम अपडेट
रेरा के इस पहल से बैंकों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट के खरीदारों को लाभ होगा। इसके तहत सूचीबद्ध बैंकों को अब भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे संचालन सुगम होगा। हर प्रोजेक्ट के लिए रियल-टाइम अपडेट मिलेगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी। बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जिससे निधियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित होगी। रियल एस्टेट प्रमोटरों और डेवलपर्स को अब बार-बार दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ेंगे क्योंकि अब सभी दस्तावेज़ डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगे जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी।
इसी तरह रियल एस्टेट खरीदारों को भी लाभ होगा। खरीदारों की जमा की गई धनराशि सुरक्षित रहेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका पैसा सही ढंग से उपयोग हो। साथ ही परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने के लिए प्रमोटरों पर दबाव बनेगा, जिससे खरीदारों को घर मिलने में देरी नहीं होगी। वित्तीय अनुशासन मजबूत होने से रियल एस्टेट क्षेत्र में भरोसा बढ़ेगा।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रदायगी हेतु विशेषज्ञ चिकित्सक व चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दानवीर दाऊ कल्याण सिंह की जयंती पर किया नमन
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत की प्राचीन विधा योग को विश्वपटल पर किया स्थापित - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के दुर्ग संभाग अध्यक्ष बने भानु प्रताप यादव
रायपुर। छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन के तत्वावधान में पांच बिल्डिंग स्थित सामुदायिक भवन दुर्ग में संगठन का विस्तार करते हुए अनेक महत्वपूर्ण पदों पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति करते हुए भानु प्रताप यादव जिलाध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा दुर्ग को दुर्ग संभाग अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ बनाया गया.
उक्त बैठक मे सर्व समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मेघनाथ यादव, महासचिव लखनलाल साहू, कोषाध्यक्ष जीवन सिन्हा, प्रदेश संयोजक ब्रह्म देव पटेल, प्रदेश उपाध्यक्षगण अनुरूप साहू,संत कुमार केशकर, घनश्याम कुमार देवांगन, गैंदलाल वर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ डीपी देशमुख, भिलाई अध्यक्ष चंदूलाल मरकाम, सलाहकार रमेश साहू सहित अन्य गण मान्य लोग उपस्थित रहे l
गृहमंत्री शाह का छत्तीसगढ़ दौरा
रायपुर । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ आएंगे। इस दौरान वे बस्तर पंडुम के समापन समारोह में शामिल होंगे। साथ ही दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी के दर्शन करने भी जाएंगे। इसके बाद शाह रायपुर में पुलिस और सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक भी लेंगे। गृहमंत्री अमित शाह का मिनट 2 मिनट कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।
गृहमंत्री शाह शुक्रवार शाम 7:30 बजे राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। दूसरे दिन 5 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे एयरपोर्ट से 10: 50 बजे जगदलपुर के लिए उड़ान भरेंगे। सुबह 11:30 जगदलपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां से दंतेवाड़ा के लिए रवाना होंगे। दंतेवाड़ा पुलिस लाइन कार्ली यहां से सीधे माता दंतेश्वरी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। आधा घंटे दर्शन पूजन के बाद दंतेवाड़ा सर्किट हाउस जायेंगे।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेंगे शाह
दोपहर डेढ़ से तीन बजे तक बस्तर पंडूम समापन समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद दंतेवाड़ा से जगदलपुर होते हुए शाम पांच बजे राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। जहां पर अमित शाह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेंगे। पुलिस के अलावा सहकारिता विभाग की बैठक लेंगे। बैठक के गृहमंत्री अमित शाह 7.45 बजे रायपुर से दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे।
चिरायु योजना : तीन मासूमों को मिला नया जीवन
रायपुर । तालु कटे होने की समस्या से जूंझ रहे तीन बच्चों की मुस्कान देखते ही बन रही थी जब उनका ऑपरेशन सफल हुआ। स्वास्थ्य योजना चिरायु से मानो तीन मासूमों को एक नया जीवन मिल गया। आरंग हेल्थ टीम-सी द्वारा आयोजित शिविर में डेढ़ वर्षीय दक्षिका यादव, आठ वर्षीय प्रतिभा निर्मलकर और 6 वर्षीय दुर्गा भट्ट की तालु कटे होने की समस्या पाई गई थी। तीनों बच्चों का चिरायु योजना के अंतर्गत निशुल्क ऑपरेशन किया गया, जिससे उनके चेहरे पर नई मुस्कान आई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आंगनबाड़ी बैहार, प्राथमिक शाला गिधवा और प्राथमिक शाला भिलाई में आयोजित शिविर में इन बच्चों की जांच की गई थी। शुरुआत में उनके परिजन महंगे इलाज और ऑपरेशन को लेकर काफी चिंतित थे। तब चिरायु टीम की काउंसलिंग ने उनकी शंकाओं को दूर करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत उनके बच्चों का निःशुल्क इलाज किया जाएगा। सितंबर 2024 में रायपुर के श्री मेडिशाइन अस्पताल में इन तीनों बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया।
इस अभियान में सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी, डीपीएम श्री मनीष मेजरवार, चिरायु नोडल डॉ. श्वेता सोनवानी, आरंग बीएमओ डॉ. विजय लक्ष्मी अनंत और बीपीएम दीपक मिरे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाइ और उनके प्रयासों ने इस ऑपरेशन को संभव और सफल बनाया। चिरायु योजना ने न सिर्फ इन बच्चों के जीवन में सुधार लाया, बल्कि उनके परिवारों को भी एक उम्मीद देते हुए बड़ी राहत पहुंचाई है।
बिहान कार्यक्रम से आया जीवन में बड़ा बदलाव
कभी मजदूरी कर घर का खर्च चलाने वाली सुषमा ने अपनी आय से कराया 3 बीएचके घर का निर्माण
रायपुर। रोजी मजदूरी से जीविकोपार्जन करने वाली सुषमा नौरंगे, अब साल के 1.8 लाख रुपए कमाने लगी है। इस बात को सुनकर आपको यह मात्र एक कहानी लगेगी लेकिन सुषमा ने ऐसा कर दिखाया है।
आरंभ विकासखंड के ग्राम पचेड़ा में रहने वाली सुषमा नौरंगे 2017 से पहले एक सामान्य सी गृहिणी थी और रोजी-मजदूरी करके घर के खर्च में अपना योगदान देती थीं। श्रीमती नौरंगे के जीवन में एक बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने 2017 में बिहान कार्यक्रम के अंतर्गत आराधना समूह में सदस्य के रूप में काम शुरू किया। बिहान कार्यक्रम के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त करने के क्रम में श्रीमती नौरंगे ने सीआईएफ राशि 1.2 लाख और 3 लाख बैंक से लोन लेकर अपनी आजीविका शुरू की।
वर्तमान में सुषमा नौरंगे सिलाई कढ़ाई, आटा चक्की एवं धान कुटाई, मशरूम खेती, मछली पालन, बाड़ी में सब्जी की खेती के साथ मुर्गीपालन का काम कर रही हैं। श्रीमती नौरंगे शादी के पहले बी.ए. और शादी के बाद एम.ए. समाजशास्त्र और पीजीडीसीए की पढ़ाई कर चुकी हैं। खुद पढ़ाई करने के बाद अब अपने दोनों बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने आय के पैसों से 3 बीएचके घर का निर्माण भी करवाया है और लोन का लगभग आधा से ज्यादा किस्त उन्होंने चुका दिया है। उनके पति लघु किसान है, उनके आय माध्यम से घर का खर्च चलता था लेकिन अब श्रीमती सुषमा अपने घर के खर्चाें में हाथ बटा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के प्रति आभार जताते हुए कहा है शासन की इस योजना से महिलाओं के जीवन बदलाव आ रहा है। महिलाएं सशक्त हुई है।