‘मैं चंदा... जंगल की शिल्पकार हूं’ का विमोचन, जंगल और हाथियों की कहानी को मिली आवाज
जगदलपुर । बस्तर के दरभा में आयोजित हरेली बर्ड फेस्टिवल में पत्रकार एवं लेखक दिनेश यदु की पुस्तक ‘मैं चंदा... जंगल की शिल्पकार हूं’ का विमोचन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किया। हाथियों के जीवन, जंगल और प्रकृति के साथ उनके रिश्ते को केंद्र में रखकर लिखी गई यह पुस्तक जंगल के वन्यजीवन की संवेदनशील कहानी सामने लाती है। कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन के साथ पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व पर भी चर्चा हुई।
हाथी सिर्फ वन्यजीव नहीं, जंगल के शिल्पकार
पुस्तक में हाथी को केवल एक वन्यजीव के रूप में नहीं, बल्कि जंगल के प्राकृतिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जीव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘चंदा’ के माध्यम से हाथियों के जीवन, उनके व्यवहार, जंगल से जुड़ाव और इंसानों के साथ बदलते रिश्ते को संवेदनशीलता से सामने लाने का प्रयास किया गया है।
प्रकृति से जुड़ी दिनेश यदु की तीसरी पुस्तक
‘मैं चंदा... जंगल की शिल्पकार हूं’ दिनेश यदु की तीसरी पुस्तक है। इससे पहले ‘मैं अगहन हूं’ का विमोचन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था। वहीं ‘जंगल की नि:शब्द रानी’ का विमोचन विश्व बाघ दिवस के अवसर पर मंत्री केदार कश्यप ने किया था। उनकी लेखनी में जंगल, वन्यजीव और प्रकृति लगातार प्रमुख विषय रहे हैं।
‘गज संकेतक’ ऐप भी हुआ लॉन्च
हरेली बर्ड फेस्टिवल में मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के उद्देश्य से ‘गज संकेतक’ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया। बस्तर की प्राकृतिक विरासत पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन और बस्तर पहाड़ी मैना के संरक्षण पर विशेष प्रस्तुति भी हुई। वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने वाले हाथी मित्र, मैना मित्र और गिद्ध मित्र दल के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को 10 लाख की सहायता
कार्यक्रम में राज मोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत दरभा के पांच हितग्राहियों को कुल 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। इस अवसर पर विधायक विनायक गोयल, महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, अपर मुख्य सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पर्यावरणविद और ग्रामीण मौजूद रहे। ‘मैं चंदा... जंगल की शिल्पकार हूं’ का विमोचन बस्तर की वन्य विरासत को साहित्य के माध्यम से नई आवाज देने वाला अवसर बना।