छत्तीसगढ़ / बेमेतरा
नर्सरी प्रबंधन एवं पौध उत्पादन तकनीक पर स्वसहायता समूह की महिलाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
बेमेतरा 13 अगस्त 2026
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संकुल स्तरीय संगठन के तहत चयनित दो समन्वित कृषि समूह ग्राम धोबनीखुर्द एवं बघुली, विकासखण्ड नवागढ़ की महिला स्वसहायता समूह की सदस्यों के आजीविका संवर्धन एवं नर्सरी इकाई के कुशल संचालन के उद्देश्य से ‘नर्सरी प्रबंधन एवं पौध उत्पादन की आधुनिक तकनीक’ विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में स्वसहायता समूह की 20 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुईं।
प्रशिक्षण के दौरान विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिकी) डा. लव कुमार ने प्रतिभागी महिलाओं को सब्जी वर्गीय फसलों की उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने नर्सरी की स्थापना एवं प्रबंधन, उन्नत बीज का चयन, बीज उपचार, पौध तैयार करने की विधि, पौधों की देखभाल, सिंचाई एवं पोषक तत्व प्रबंधन सहित पौधों में होने वाले रोग एवं कीटों की पहचान तथा उनके प्रभावी नियंत्रण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को पौध उत्पादन एवं नर्सरी प्रबंधन की तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया, ताकि वे सीखी गई तकनीकों को अपने समूह की नर्सरी इकाई में अपनाकर गुणवत्तापूर्ण पौध का उत्पादन कर सकें तथा इससे आय का अतिरिक्त साधन विकसित कर सकें। प्रशिक्षण में महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण कुमार ठाकुर ने प्रतिभागी महिलाओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने जिले में नर्सरी व्यवसाय की संभावनाओं की जानकारी देते हुए प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिक आय अर्जित करने के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के साथ समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने की सलाह दी।
प्रदर्शन इकाइयों का कराया गया भ्रमण
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागी महिलाओं को कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। इस दौरान महिलाओं ने हाईटेक नर्सरी, फसल बीज उत्पादन इकाई, ऑयल पाम प्रदर्शन इकाई, मशरूम प्रदर्शन इकाई एवं सघन मछली पालन इकाई का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान महिलाओं को विभिन्न कृषि गतिविधियों से जुड़ी आधुनिक तकनीकों एवं आय सृजन की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्वसहायता समूहों को नर्सरी व्यवसाय से जोड़कर उनके आजीविका के साधनों को मजबूत करना तथा कृषि आधारित स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना रहा।
‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत 13 अगस्त से शुरू होगा ‘एक सोख्ता, संतान के नाम’ अभियान
बेमेतरा । जिले में भूजल स्तर के संरक्षण, वर्षा जल के संचयन एवं जल स्रोतों के संवर्धन की दिशा में जिला प्रशासन बेमेतरा द्वारा एक महत्वपूर्ण जनअभियान की शुरुआत की जा रही है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत 13 अगस्त 2026 से ‘एक सोख्ता, संतान के नाम’ अभियान प्रारंभ किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य जिले के प्रत्येक परिवार को जल संरक्षण से जोड़ते हुए वर्षा के पानी को जमीन में पहुंचाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हर घर बनेगा जल संरक्षण का केंद्र :
‘एक सोख्ता, संतान के नाम’ अभियान के तहत जिले के प्रत्येक घर में कम से कम एक सोख्ता गड्ढे का निर्माण जनसहयोग एवं जनभागीदारी के माध्यम से स्वयं किए जाने के लिए नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा। घरों की छत एवं आसपास की सतह से प्राप्त वर्षा जल को सोख्ता गड्ढे के माध्यम से जमीन में पहुंचाकर भूजल पुनर्भरण (ग्राउंड वाटर रिचार्ज) को बढ़ावा दिया जाएगा।
जिला प्रशासन द्वारा अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए नागरिकों को सोख्ता गड्ढे के निर्माण की तकनीकी जानकारी, आवश्यक मार्गदर्शन एवं उपयोगी सुझाव उपलब्ध कराए जाएंगे। ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से अभियान को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।
‘संतान के नाम’ से जुड़ा है भविष्य का संकल्प :
अभियान को ‘संतान के नाम’ से जोड़ने का उद्देश्य जल संरक्षण को केवल वर्तमान की आवश्यकता न मानकर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है। प्रत्येक परिवार द्वारा अपने घर में एक सोख्ता गड्ढे का निर्माण करना आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त जल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
वर्षा ऋतु में बड़ी मात्रा में पानी बहकर नालियों एवं अन्य जल निकासी मार्गों से बाहर चला जाता है। ऐसे में सोख्ता गड्ढों के माध्यम से वर्षा जल को जमीन में उतारकर उसका भूजल पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे जल स्रोतों पर दबाव कम करने के साथ-साथ भविष्य में जल संकट की संभावनाओं को भी कम किया जा सकेगा।
जनभागीदारी से बनेगा जल संरक्षण का जन आंदोलन :
जिला प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए हर नागरिक और हर परिवार की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ‘एक सोख्ता, संतान के नाम’ अभियान को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है। जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे 13 अगस्त 2026 को अपने घर में एक सोख्ता गड्ढा बनाकर इस अभियान का हिस्सा बनें और जल संरक्षण के इस संकल्प को अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाएं। एक परिवारकृएक सोख्ता की पहल से जिले में बड़ी संख्या में सोख्ता गड्ढों का निर्माण होने पर वर्षा जल के संरक्षण एवं भूजल स्तर के पुनर्भरण में व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
आज का प्रयास, आने वाली पीढ़ी के लिए जल सुरक्षा :
‘एक सोख्ता, संतान के नाम’ केवल एक निर्माण गतिविधि नहीं, बल्कि जल के प्रति जिम्मेदारी और भविष्य के प्रति संकल्प का अभियान है। प्रत्येक परिवार द्वारा अपने घर में बनाए गए एक सोख्ता गड्ढे को आने वाली पीढ़ी के लिए जल संरक्षण की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सौगात के रूप में देखा जा रहा है।
जिला कलेक्टर ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता करें, अपने घर में सोख्ता गड्ढे का निर्माण करें और अपने परिवार, पड़ोस एवं गांव के अन्य लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करें। सामूहिक जनभागीदारी से ही बेमेतरा जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई दिशा दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से मिली शिकायत पर त्वरित कार्रवाई, मोहगांव एनीकट के जाम गेट हुए सुचारू
बेमेतरा । राज्य सरकार द्वारा आम नागरिकों की शिकायतों एवं समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सुशासन और जनसेवा का प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा त्वरित एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कर नागरिकों को राहत पहुंचाई जा रही है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन टोकन क्रमांक ब्ब्260700074555, आवेदक कादर खान द्वारा मोहगांव एनीकट के गेट लंबे समय से जाम होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में बताया गया था कि एनीकट के गेट संचालित नहीं होने के कारण जल निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के खेतों एवं भूमि में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई।
विभागीय अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर मोहगांव एनीकट का स्थल निरीक्षण किया गया तथा गेटों की तकनीकी स्थिति का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तकनीकी समस्या के कारण गेटों के यांत्रिक भाग जाम हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग द्वारा विद्युत यांत्रिकी विभाग से समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से आवश्यक मरम्मत कार्य कराया गया।
तकनीकी टीम द्वारा एनीकट के सभी गेटों के आवश्यक यांत्रिक भागों की ऑयलिंग एवं ग्रीसिंग की गई तथा आवश्यक तकनीकी सुधार के बाद गेटों को सफलतापूर्वक संचालित किया गया। कार्यवाही के पश्चात एनीकट के सभी गेट सुचारू एवं सुरक्षित रूप से खुल गए और जल का प्रवाह सामान्य रूप से प्रारंभ हो गया।
गेटों के सुचारू संचालन एवं जल निकासी बहाल होने से आसपास के खेतों और भूमि में संभावित जलभराव तथा बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका दूर हो गई। इससे किसानों एवं क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिली तथा एनीकट की जल प्रबंधन क्षमता एवं कार्यप्रणाली भी पुनः सुचारू हो गई।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर विभाग द्वारा त्वरित स्थल निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और आवश्यक मरम्मत कार्य कराते हुए समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया गया। यह कार्रवाई राज्य सरकार की जन समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता, त्वरित प्रशासन और जवाबदेह सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।.
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान केवल शिकायत दर्ज होने तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित विभाग द्वारा मौके पर कार्रवाई कर समयबद्ध, प्रभावी और संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन इसी जनोन्मुखी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रही है।
12 सितम्बर को होगी नेशनल लोक अदालत, अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण पर जोर
बेमेतरा । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन 12 सितम्बर 2026 को किया जाएगा।
लोक अदालत की तैयारियों एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के अधिक से अधिक निराकरण के संबंध में आज बैंक, विद्युत विभाग, बीएसएनएल एवं नगर पालिका परिषद के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक सरोज नंद दास, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा की अध्यक्षता में तथा स्वर्णलता ओम यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा की उपस्थिति में आयोजित हुई।
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों से प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत एवं पंजीकृत कराने तथा पक्षकारों को नोटिस की तामिली सुनिश्चित करने के संबंध में चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अधिक से अधिक प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैंक अधिकारियों को विशेष रूप से परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत लंबित प्रकरणों में पक्षकारों के मध्य आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का निराकरण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बैंक रिकवरी से संबंधित प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में पक्षकारों को समय पर नोटिस की तामिली कराने तथा उनके साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में राजीनामा एवं समझौते के लिए प्रयास करने पर जोर दिया गया।
बैठक में लीड बैंक मैनेजर, विभिन्न बैंकों के अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, विद्युत विभाग के अधिकारी तथा भारतीय दूरसंचार विभाग (बीएसएनएल) के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों से नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण की अपेक्षा की गई।
लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाएं : सीईओ
बेमेतरा । जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेमलता पद्माकर ने आज जिला कार्यालय के दिशा सभाकक्ष में विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों एवं शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों की समीक्षा के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभागवार कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए सभी अधिकारियों को शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश :
समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सीईओ पद्माकर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, समय-सीमा एवं जनशिकायतों से संबंधित लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के साथ निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आमजन की समस्याओं के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का संवेदनशीलता एवं गंभीरता से निराकरण करने तथा शिकायतकर्ता को संतुष्टिपूर्ण समाधान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही समय-सीमा वाले प्रकरणों का निराकरण निर्धारित डेडलाइन से पहले करने पर विशेष जोर दिया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित किए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तैयारियों की भी बैठक में समीक्षा की गई। पद्माकर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को जिले में व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिले के अधिक से अधिक घरों, शासकीय भवनों, विद्यालयों एवं पंचायत भवनों में तिरंगा फहराने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।
उन्होंने अभियान के संबंध में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा आमजन, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, स्व-सहायता समूहों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों की समीक्षा :
बैठक में आगामी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय सहित सभी जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रमों की सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा समारोह को गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं उत्साहपूर्ण ढंग से आयोजित करने के निर्देश दिए।
जिला पंचायत सीईओ प्रेमलता पद्माकर ने कहा कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए प्रत्येक पात्र हितग्राही को योजनाओं का लाभ दिलाना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विभागीय कार्यों में तत्परता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने तथा आमजन की समस्याओं के निराकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश भारद्वाज, अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित थे।
विश्व आदिवासी दिवस पर जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित हुए विधिक जागरूकता शिविर
बेमेतरा । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर द्वारा संचालित स्टेट प्लान ऑफ एक्शन कैलेंडर 2026-27 के अनुसार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न स्थानों पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सरोज नन्द दास के मार्गदर्शन में तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा श्रीमती स्वर्णलता ओम यादव की उपस्थिति में किया गया।
प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास, बेमेतरा में आयोजित शिविर में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपस्थित छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों, अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकार, शिक्षा एवं समानता का अधिकार, बाल अधिकार, बाल विवाह प्रतिषेध, बाल संरक्षण संबंधी कानून तथा निःशुल्क विधिक सहायता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
शिविर में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए किसी भी प्रकार के शोषण, भेदभाव, बाल विवाह, बाल श्रम अथवा अन्य कानूनी समस्या की स्थिति में उचित विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान नालसा की विभिन्न योजनाओं, नालसा टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, पॉक्सो एक्ट 2012, हिट एंड रन स्कीम 2022, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्रों एवं लीगल एड डिफेंस कौंसिल द्वारा जिले के विभिन्न छात्रावासों एवं शैक्षणिक संस्थानों में भी विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बेमेतरा, शासकीय प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास कोबिया बेमेतरा, शासकीय प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास बेमेतरा, शासकीय प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास साजा, पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास बेमेतरा तथा शासकीय प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास बेरला में छात्र-छात्राओं को कानून एवं उनके अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
इन शिविरों में छात्र-छात्राओं के साथ छात्रावासों के अधीक्षक/अधीक्षिका, शिक्षकगण, लीगल एड डिफेंस कौंसिल के अधिवक्तागण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के अधिकार मित्र उपस्थित रहे।
इसके साथ ही जिला जेल बेमेतरा में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में निरुद्ध बंदियों को आदिवासी समुदाय के अधिकारों, उनके संवैधानिक संरक्षण एवं विधिक अधिकारों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, न्याय तक पहुंच तथा उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
जिला जेल बेमेतरा में 28 बंदियों को दिया गया दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण
बेमेतरा । कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा द्वारा जिला जेल बेमेतरा में बंदियों के कौशल विकास, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6 एवं 7 अगस्त 2026 को दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला जेल बेमेतरा के 28 बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण ठाकुर के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. राजनी डी. अगाशे एवं डोमन सिंह टेकाम द्वारा किया गया।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री, सब्सट्रेट तैयार करने की विधि, स्पॉन की जानकारी, उत्पादन की विभिन्न अवस्थाएं, स्वच्छता एवं आवश्यक सावधानियां, उचित तापमान एवं नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल एवं तुड़ाई सहित मशरूम के विपणन एवं मूल्य संवर्धन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से मशरूम उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझाया गया। इससे बंदियों को मशरूम उत्पादन की तकनीक को केवल सैद्धांतिक रूप से समझने के साथ-साथ इसे व्यवहार में अपनाने की जानकारी भी प्राप्त हुई।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम स्थान, कम लागत और सीमित संसाधनों में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को ऐसा उपयोगी एवं रोजगारपरक कौशल प्रदान करना है, जिसे वे जेल से बाहर आने के बाद भी अपनाकर अपनी आजीविका का साधन बना सकें और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के कमलेश बघेल, मिलाप वर्मा एवं अन्य कर्मचारियों का सराहनीय सहयोग रहा। वहीं, जिला जेल बेमेतरा के अधीक्षक राहुल पाण्डेय तथा जेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग एवं समन्वय प्रदान किया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सभी 28 प्रतिभागियों ने सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता निभाई। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के कौशल विकास, स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल के रूप में सामने आया।
विकसित भारत जी रामजी योजना : सरपंचों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
बेमेतरा । जनपद पंचायत साजा में मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोमनाथ साहू के मार्गदर्शन में विकसित भारत जी रामजी (VBGRAMG) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ग्राम पंचायतों के सरपंचों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में जनपद पंचायत साजा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा योजना के विभिन्न प्रावधानों, उद्देश्यों एवं क्रियान्वयन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यक्रम अधिकारी अरविन्द कश्यप द्वारा विकसित भारत जी रामजी योजना के उद्देश्य, कार्ययोजना निर्माण, प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम स्तर पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने, जनभागीदारी सुनिश्चित करने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के अभिसरण के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान सरपंचों द्वारा योजना से संबंधित पूछे गए प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
मनरेगा के अपूर्ण कार्यों को नियमानुसार पूर्ण करने के निर्देश
प्रशिक्षण के दौरान मनरेगा अंतर्गत अपूर्ण कार्यों की भी समीक्षा की गई। सरपंचों को निर्देशित किया गया कि ग्राम पंचायतों में लंबित एवं अपूर्ण कार्यों को नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराया जाए। साथ ही विकास कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
कार्यक्रम में एसडीओ आरईएस गणेश राम मंडारे एवं तकनीकी सहायक अमित सिरेकर ने भी सरपंचों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति देने तथा शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं मैदानी अमले के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
ग्राम विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत जी रामजी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों की क्षमता का विकास करना, उन्हें योजना की प्रक्रिया एवं प्रावधानों से अवगत कराना तथा ग्राम स्तर पर योजनाओं के सफल संचालन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना था। अधिकारियों ने कहा कि ग्राम पंचायतों के विकास में सरपंचों की भूमिका महत्वपूर्ण है। स्थानीय आवश्यकताओं एवं ग्रामीणों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रशिक्षण के माध्यम से सरपंचों को शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, जनभागीदारी बढ़ाने तथा ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रेरित किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर बेमेतरा का गौरव बढ़ाने वाले उत्कृष्ट खिलाड़ियों का सम्मान
बेमेतरा । राष्ट्रीय स्तर की सॉफ्टबाल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बेमेतरा जिले का नाम रोशन करने वाले दो प्रतिभावान खिलाड़ियों प्रिंस सिंह एवं आशीष पाटिल का आज कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं एवं पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने सम्मान किया। दोनों खिलाड़ियों ने सॉफ्टबाल खेल में छत्तीसगढ़ राज्य की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए सीनियर नेशनल टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के आधार पर राज्य शासन द्वारा उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया है।
सम्मान के दौरान कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं एवं पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने दोनों खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जिले के युवा खिलाड़ियों द्वारा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। खिलाड़ियों की सफलता अन्य युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित करती है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए गए खिलाड़ियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप शासकीय सेवा में अवसर प्रदान किए जाने का प्रावधान है। इससे खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ युवाओं में खेलों के प्रति रुचि एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा मिलता है।
प्रिंस सिंह ने 29 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीते 26 पदक
ग्राम जेवरा निवासी प्रिंस सिंह ने सॉफ्टबाल खेल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने अब तक 29 बार नेशनल एवं फेडरेशन कप प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और 26 पदक अपने नाम किए हैं। निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के चलते प्रिंस सिंह ने जिले एवं छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।
आशीष पाटिल ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीते 5 पदक
इसी तरह ग्राम जेवरा के ही आशीष पाटिल ने भी सॉफ्टबाल खेल में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 7 बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 5 पदक अर्जित किए हैं। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सम्मान अवसर पर दोनों उत्कृष्ट खिलाड़ियों के साथ शाला प्रबंधन समिति के सदस्य प्रबल सिंह, प्राचार्य विनोद चौहान, व्यायाम शिक्षक मृत्युंजय शर्मा एवं नोवेन्द्र साहू उपस्थित रहे। अधिकारियों एवं उपस्थितजनों ने दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
जिले के इन खिलाड़ियों की उपलब्धि से बेमेतरा में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों को भी नई प्रेरणा मिली है। राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर शासकीय सेवा के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में चयनित होना जिले के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणादायी उदाहरण है।
10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन
बेमेतरा ।कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में जिले में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। अभियान के तहत जिले के 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को कृमिनाशक दवा एल्बेन्डाजॉल खिलाई जाएगी। इसके लिए जिले में कुल 3,89,937 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अंतर्गत जिले के शासकीय एवं निजी विद्यालयों, नवोदय विद्यालय, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, आई.टी.आई., महाविद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को कृमिनाशक दवा का सेवन कराया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ मितानिन कार्यकर्ताओं की टीम गठित की गई है।
उम्र के अनुसार दी जाएगी एल्बेन्डाजॉल की निर्धारित मात्रा
अभियान के दौरान 1 से 2 वर्ष की आयु के बच्चों को एल्बेन्डाजॉल की आधी गोली चूरा करके, 2 से 3 वर्ष के बच्चों को एक पूरी गोली चूरा करके तथा 3 से 19 वर्ष के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को एक पूरी गोली चबाकर खिलाई जाएगी। जिले को कृमि मुक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। अभियान के तहत जिले के सभी शासकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों को शामिल किया गया है। संबंधित विभागों के समन्वय से बच्चों तक कृमिनाशक दवा पहुंचाने और अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
कृमि संक्रमण से हो सकती है खून की कमी और कुपोषण
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. शरद कोहाड़े ने बताया कि बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण कुपोषण, खून की कमी, मानसिक विकास में कमी तथा लगातार थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कृमिनाशक दवा के सेवन से पेट में मौजूद कृमियों को समाप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण से बचाव के लिए आसपास साफ-सफाई रखना, नाखून छोटे रखना, खुले में रखे भोजन का सेवन नहीं करना, खुले में शौच नहीं करना तथा शौच के बाद साबुन से हाथ धोना आवश्यक है। इसके अलावा फल एवं सब्जियों को स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर एवं पकाकर खाने की सलाह दी गई है।
छूटे हुए बच्चों को 17 अगस्त को मॉप-अप दिवस पर दी जाएगी दवा
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिले के सभी पालकों एवं जनसामान्य से अपील की है कि 10 अगस्त 2026 को अपने समीपस्थ आंगनबाड़ी केन्द्र, शासकीय अथवा निजी विद्यालय में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेन्डाजॉल की कृमिनाशक दवा का सेवन अवश्य कराएं। किसी कारणवश 10 अगस्त को दवा सेवन से छूटे बच्चों को 17 अगस्त 2026 को मॉप-अप दिवस के अवसर पर दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने जिलेवासियों से अभियान में सक्रिय सहभागिता कर जिले को कृमिमुक्त बनाने में सहयोग प्रदान करने की अपील की है।
पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
बेमेतरा ।रेवेन्द्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, ढोलिया-बेमेतरा में अधिष्ठाता डॉ. अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा “पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में “सुरक्षित पर्यावरण एवं सुरक्षित भविष्य” विषय पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, आत्मानुशासन एवं सकारात्मक जीवनशैली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी, बेमेतरा से उपस्थित शशि दीदी एवं पियूष भाई ने छात्र-छात्राओं से परिचर्चा करते हुए पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने प्रदूषण को कम करने, अधिक से अधिक पौधरोपण करने, प्राकृतिक एवं उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को मन की एकाग्रता, स्वयं की पहचान, क्रोध पर नियंत्रण, प्रसन्नचित्त रहने, समय प्रबंधन तथा आत्मिक शक्ति को मजबूत बनाए रखने के उपाय भी बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल बाहरी प्रकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक एवं आंतरिक वातावरण को सकारात्मक रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं को लगभग 5 मिनट का ध्यान अभ्यास कराया गया। साथ ही विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग को कम करने तथा अध्ययन, स्वास्थ्य एवं रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय का सदुपयोग करने की सलाह दी गई।
इस अवसर पर डॉ. इजी यू. के. ध्रुव प्रभारी अधिष्ठाता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण डॉ. टी. डी. साहू, डॉ. असित कुमार, कुंती बंजारे, डॉ. भारती बघेल, डॉ. हेमलता निराला, राजेश्वरी कुर्रे, डॉ. साक्षी बजाज, प्रतिभा सिंह, डॉ. सरिता शर्मा, डॉ. महानंद, डॉ. रामेश्वर एवं संजीव गुर्जर सहित महाविद्यालय के समस्त कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ उन्हें आपदा एवं विपरीत परिस्थितियों के प्रति जागरूक करना तथा स्वस्थ, सकारात्मक एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
शासकीय पॉलिटेक्निक थानखम्हरिया में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश का चौथा चरण प्रारंभ
बेमेतरा । तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए शासकीय पॉलिटेक्निक थानखम्हरिया, जिला बेमेतरा में संचालित डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का सुनहरा अवसर उपलब्ध है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एवं केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु चतुर्थ चरण (4th Round) की प्रवेश प्रक्रिया वर्तमान में प्रारंभ हो चुकी है।
संस्था के प्राचार्य ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत 10वीं उत्तीर्ण (पी.पी.टी. के माध्यम से), आईटीआई उत्तीर्ण तथा 12वीं (गणित विषय सहित) उत्तीर्ण अभ्यर्थी निर्धारित नियमों के अनुसार प्रवेश के लिए पात्र हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 31 जुलाई 2026 प्रातः 10:00 बजे से 8 अगस्त 2026 रात्रि 11:59 बजे तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। प्रवेश के लिए तैयार की गई मेरिट सूची 12 अगस्त 2026 को सायं 5:00 बजे जारी की जाएगी, जिसके पश्चात चयनित अभ्यर्थी निर्धारित तिथि पर संस्था में प्रवेश की औपचारिकताएं पूर्ण कर सकेंगे।
प्राचार्य ने बताया कि शासकीय पॉलिटेक्निक थानखम्हरिया में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुभवी प्राध्यापक, व्यवहारिक प्रशिक्षण तथा रोजगारोन्मुख शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के साथ विभिन्न औद्योगिक एवं रोजगार के अवसरों के लिए भी तैयार किया जाता है। उन्होंने जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के पात्र विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन पंजीयन कर प्रवेश प्रक्रिया में भाग लें तथा तकनीकी शिक्षा के माध्यम से अपने उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएं। प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी शासकीय पॉलिटेक्निक थानखम्हरिया से संपर्क कर सकते हैं।
नांदघाट-मुंगेली रोड होगा फोरलेन, राज्य शासन ने मंजूर किए 21.81 करोड़
बेमेतरा ।राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक टू-लेन सड़क के फोरलेन में उन्नयन के लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 36.40 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।
कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। निर्मा
चिरायु योजना बनी बच्चों के लिए जीवनदायिनी
बेमेतरा । - राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु योजना) बेमेतरा जिले में जन्मजात विकृतियों से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। योजना के माध्यम से जन्मजात हृदय रोग एवं कटे-फटे होंठ-तालु जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे तीन बच्चों का निःशुल्क सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ जीवन की नई शुरुआत दी गई।
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृतलाल रोहलेडर के मार्गदर्शन में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. शरद कोहाड़े, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री लता बंजारे एवं सहायक जिला नोडल अधिकारी डॉ. ऋषभ शर्मा के समन्वित प्रयासों से चिरायु योजना एवं आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से यह उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई। योजना के तहत दो जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों एवं एक कटे-फटे होंठ-तालु से ग्रसित बच्ची का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क सफल ऑपरेशन कराया गया।
प्रेरणा साहू के दिल का सफल ऑपरेशन, मिला स्वस्थ जीवन
ग्राम झिरिया, विकासखंड बेमेतरा निवासी कु. प्रेरणा साहू, पिता परमानंद साहू, जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थीं। 23 मई 2026 को आंगनबाड़ी केंद्र झिरिया में आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिरायु दल ने बच्ची के हृदय में असामान्य ध्वनि (मर्मर साउंड) की पहचान की। विशेषज्ञ जांच (ईको) में हृदय में छेद की पुष्टि होने पर परिजनों को योजना की जानकारी देकर उपचार के लिए प्रेरित किया गया। 20 जुलाई 2026 को बच्ची को उच्च चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराया गया तथा 28 जुलाई 2026 को सफल हृदय ऑपरेशन किया गया। वर्तमान में प्रेरणा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है।
रिशिका पाल का निःशुल्क हृदय उपचार बना नई उम्मीद
बेमेतरा नगर के वार्ड क्रमांक-09 निवासी कु. रिशिका पाल, पिता बंशी पाल, भी गंभीर जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित थीं। आंगनबाड़ी भ्रमण के दौरान चिरायु दल ने बच्ची की पहचान की। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिजन उपचार कराने में असमर्थ थे। चिरायु योजना के तहत निःशुल्क इलाज का भरोसा दिलाकर बच्ची को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा गया। 20 मई 2026 को भर्ती करने के बाद 22 मई 2026 को सफल हृदय ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद रिशिका अब स्वस्थ एवं सामान्य जीवन व्यतीत कर रही है।
तरणी चंद्राकर की मुस्कान लौटी
ग्राम कोदवा, विकासखंड बेमेतरा निवासी कु. तरणी चंद्राकर, पिता सोनलाल चंद्राकर, जन्मजात कटे-फटे होंठ-तालु की विकृति से पीड़ित थीं। चिरायु दल ने बच्ची का चिन्हांकन कर उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया, जहाँ 11 जुलाई 2026 को प्रथम चरण में कटे-फटे होंठ का निःशुल्क सफल ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और आगे के उपचार की प्रक्रिया भी जारी है।
चिरायु योजना के अंतर्गत बच्चों की समय पर पहचान, विशेषज्ञ जांच, रेफरल एवं निःशुल्क उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। योजना के माध्यम से जिले में लगातार ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। चिरायु दल के सदस्य डॉ. अभिषेक यादव, डॉ. दिलीप चंद्रवंशी, डॉ. प्रीति ठाकुर, डॉ. ज्योति वर्मा, हिना सिन्हा, खिलेन्द्र साहू, बलवंत बंजारे, सत्यवीर डंडोतिया, मनीष साहू, दीपा विश्वकर्मा एवं आरती वर्मा की महत्वपूर्ण एवं सक्रिय भूमिका रही। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे बच्चों का सतत चिन्हांकन कर उन्हें चिरायु योजना एवं आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार का लाभ दिलाया जाता रहेगा।
एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करने के निर्देश
बेमेतरा । - उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य संरक्षण एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं विक्रय पर एक वर्ष के लिए लगाए गए प्रतिबंध के संबंध में बुधवार को जिला खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा होटल व्यवसायियों एवं खाद्य कारोबारियों की जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन खाद्य एवं औषधि नियंत्रक, छत्तीसगढ़ तथा कलेक्टर बेमेतरा के निर्देशानुसार किया गया।
बैठक में जिले के होटल संचालकों, स्वीट शॉप संचालकों, डेयरी व्यवसायियों तथा अन्य खाद्य कारोबारियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। इस दौरान शासन द्वारा जारी आदेशों की जानकारी देते हुए खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।बैठक को संबोधित करते हुए अभिहित अधिकारी आशीष यादव एवं वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू कुर्रे ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य में एनालॉग पनीर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि एनालॉग पनीर दूध की वसा के स्थान पर वनस्पति वसा अथवा तेल से तैयार किया जाता है तथा कई स्थानों पर इसे सामान्य पनीर के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जाता रहा है। ऐसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए शासन ने जनहित में इस पर प्रतिबंध लगाया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के एनालॉग पनीर का निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा उपयोग नहीं किया जाए। निरीक्षण के दौरान यदि किसी होटल, दुकान अथवा प्रतिष्ठान में एनालॉग पनीर पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध एफएसएस अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कारोबारियों से असली पनीर की गुणवत्ता बनाए रखने तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन करने का आग्रह किया गया।
बैठक के दौरान खाद्य अपमिश्रण की पहचान, खाद्य पदार्थों की सही लेबलिंग, स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन सहित सुरक्षित खाद्य व्यवसाय संचालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। विभाग ने बताया कि जिले में समय-समय पर निरीक्षण, सैंपलिंग एवं जांच की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, ताकि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। बैठक में उपस्थित होटल संचालकों, स्वीट विक्रेताओं, डेयरी संचालकों एवं अन्य खाद्य कारोबारियों ने शासन के निर्णय का स्वागत करते हुए सभी नियमों का पूर्ण पालन करने तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
शासकीय डेयरी पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों को मिल्क प्रोडक्टस बनाने की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया
बेमेतरा । - चोरभट्टी स्थित शासकीय डेयरी पॉलीटेक्निक, बेमेतरा में विद्यार्थियों को डेयरी उत्पाद निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चन्द्रहास साहू तथा असिस्टेंट टीचर्स कु. अनुभूति द्विवेदी, कु. प्रीति खुंटे एवं कु. निकिता शर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला में कुल्हड़ रबड़ी, व्हे ड्रिंक और पनीर निर्माण की विधि का प्रायोगिक अभ्यास किया।
महाविद्यालय में विद्यार्थियों को नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए गए उत्पादों को समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर उपभोक्ताओं तक भी पहुंचाया जाता है। इससे विद्यार्थियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, साथ ही डेयरी उत्पादों के विपणन और उद्यमिता का व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है। वहीं उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर शुद्ध, मिलावट रहित एवं गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध होते हैं।
महाविद्यालय द्वारा भविष्य में फ्लेवर्ड मिल्क, खोआ, रसगुल्ला, मीठा दही सहित अन्य डेयरी उत्पादों का निर्माण कर उन्हें बेमेतरा शहर के उपभोक्ताओं तक उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई गई है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन एवं दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविद्यालय के सहयोग से ग्राम चोरभट्ठी में संचालित शासकीय डेयरी पॉलीटेक्निक में कक्षा 12वीं गणित अथवा जीव विज्ञान विषय से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, जो 12वीं के बाद तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त करना चाहते हैं।
महाविद्यालय का दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) पाठ्यक्रम तेजी से विकसित हो रहे डेयरी उद्योग के लिए प्रशिक्षित एवं कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर केंद्रित है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए शासकीय, अर्ध शासकीय एवं निजी डेयरी संस्थानों में रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के भी व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं।
वर्तमान में संस्थान में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। गणित एवं जीव विज्ञान विषय से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए डेयरी सेक्टर में करियर बनाने का यह सुनहरा अवसर है। प्रवेश एवं अन्य जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी शासकीय डेयरी पॉलीटेक्निक, चोरभट्ठी से संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9200172864, 8964844803, 9340291259, 7000231858, 7000240762 एवं 9098360150 पर संपर्क किया जा सकता है।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र हेतु शिविर का आयोजन
बेमेतरा । - कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देशानुसार,सीएमएचओ डॉ अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन पर एवं सिविल सर्जन डॉ लोकेश साहू व जिला शिक्षा अधिकारी के सहयोग से दिनांक 05/08/2026 को जिला बेमेतरा के विकासखंड बेमेतरा के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विशेष सहायता प्राप्त बच्चों को चिन्हांकित कर जिला चिकित्सालय, बेमेतरा लाया गया।
जिले के शारीरिक एवं मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों का विशेषज्ञ चिकित्सकों - Orthopedic Surgeon (हड्डी रोग विशेषज्ञ), नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician), नेत्र रोग विशेषज्ञ (Eye Surgeon), M.D. Medicine एवं सर्जन द्वारा गहन परीक्षण किया गया। जिला अधिकारी द्वारा स्वयं उपस्थित होकर स्वास्थ्य परीक्षण की गुणवत्ता का निरीक्षण किया गया।
इस शिविर के माध्यम से कुल 37 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र हेतु प्रमाणित किया गया। साथ ही इसी प्रकार सभी विकासखण्डों के अंतर्गत आने वाले बच्चों का भी आगामी दिवसों में परीक्षण कर प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा, जिससे जिले के सभी पात्र बच्चों को योजना का लाभ मिल सके।
इस अवसर पर डॉ. बी. एल. राज, नोडल अधिकारी, सिविल सर्जन, अस्पताल सलाहकार, RBSK टीम एवं सीएमएचओ,सिविल सर्जन कार्यालय के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।