छत्तीसगढ़ / बेमेतरा

जिला जेल बेमेतरा में 28 बंदियों को दिया गया दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण

 बेमेतरा । कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा द्वारा जिला जेल बेमेतरा में बंदियों के कौशल विकास, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6 एवं 7 अगस्त 2026 को दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला जेल बेमेतरा के 28 बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख  तोषण ठाकुर के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. राजनी डी. अगाशे एवं  डोमन सिंह टेकाम द्वारा किया गया।

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री, सब्सट्रेट तैयार करने की विधि, स्पॉन की जानकारी, उत्पादन की विभिन्न अवस्थाएं, स्वच्छता एवं आवश्यक सावधानियां, उचित तापमान एवं नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल एवं तुड़ाई सहित मशरूम के विपणन एवं मूल्य संवर्धन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से मशरूम उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझाया गया। इससे बंदियों को मशरूम उत्पादन की तकनीक को केवल सैद्धांतिक रूप से समझने के साथ-साथ इसे व्यवहार में अपनाने की जानकारी भी प्राप्त हुई।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम स्थान, कम लागत और सीमित संसाधनों में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को ऐसा उपयोगी एवं रोजगारपरक कौशल प्रदान करना है, जिसे वे जेल से बाहर आने के बाद भी अपनाकर अपनी आजीविका का साधन बना सकें और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।

 
 
 
 
 
 

 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के  कमलेश बघेल,  मिलाप वर्मा एवं अन्य कर्मचारियों का सराहनीय सहयोग रहा। वहीं, जिला जेल बेमेतरा के अधीक्षक  राहुल पाण्डेय तथा जेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग एवं समन्वय प्रदान किया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सभी 28 प्रतिभागियों ने सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता निभाई। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के कौशल विकास, स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल के रूप में सामने आया।

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