निःशुल्क स्कूली किताबें बेचने की कोशिश वीडियो वायरल : शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप मैडम को तत्काल प्रभाव से निलबंन की गई
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली फिर कठघरे में
निःशुल्क स्कूली किताबें बेचने की कोशिश वीडियो वायरल : शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप मैडम को तत्काल प्रभाव से निलबंन की गई
छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में है। राजधानी रायपुर से सटे धरसींवा ब्लॉक के साकरा स्थित
■ साकरा में मुफ्त किताबें
कबाड़ियों को बेचते पकड़ी गई समन्वयक, वीडियो वायरल
। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, जांच की मांग हुई और इस सम्बध्द में मैडम पूर्णिमा वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया
उद्योग नगर के स्कूल में निःशुल्क वितरण के लिए आई किताबों को गुपचुप तरीके से कबाड़ियों को बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने स्कूल समन्वयक पूर्णिमा वर्मा को रंगे हाथों पकड़ लिया, जिसके बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, शनिवार को साकरा स्कूल की संकुल समन्वयक पूर्णिमा वर्मा द्वारा कबाड़ियों को स्कूल बुलाया गया था और वे निःशुल्क बांटी जाने वाली, पिछले सत्र की बची हुई किताबों को बेचने की फिराक में थीं। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया और मौके पर ही पकड़कर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। यह
■ मुफ्त किताबों की दुर्गति: ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की अनभिज्ञता ने बढ़ाई चिंता
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सांकरा.
रायपुर (छ.ग.)
वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है, जिसने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है। पिछले सत्र में भी रायपुर से आई मुफ्त किताबों को सिलयारी स्थित एक उद्योग में बेच दिया गया था। उस समय भी इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
ब्लाक शिक्षा अधिकारी किताब आबंटन की हैं प्रभारी
जांच होगी
•साकरा स्कूल में संकुल समन्वयक द्वारा सरकारी किताबों के बेचने का मामला सोशल मीडिया सहित मीडिया के माध्यम से पता चला है निश्चित रूप से यह गैर कानूनी है मैं जल्द ही इसका जांच करवाता हूं। विजय खंडेलवाल जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर छग शासन
यहां यह बताना आवश्यक होगा कि प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी वंदना शुक्ला ही सरकारी स्कूलों में किताब वितरण की प्रभारी हैं। उनके पास पुरानी किताबों के बचे हुए स्टॉक का डेटा होना चाहिए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वह खुद इस घटना से अनभिज्ञता जता रही हैं। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त मिलने वाली किताबों की ऐसी दुर्गति और जिम्मेदार अधिकारी की अनभिज्ञता, पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। संकुल समन्वयक पूर्णिमा वर्मा को कबाड़ियों के साथ रंगे हाथों पकड़ा जाना अब एक बड़ा जांच का विषय बन गया है। अब सवाल यह उठता है कि जब स्वयं स्कूल समन्वयक ही इस तरह के कृत्यों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों के अन्य स्कूलों का क्या हाल होगा? यह घटना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर को उजागर करती है।
मामले को दबाने का प्रयास बता दे कि खबर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गई है। हालांकि, सूत्रों की मानें तो विभाग इस मामले को लेकर लीपापोती करने में जुट गया है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया जा सकता है। यह घटना छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को दर्शाता है। सरकार और शिक्षा विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की भी आवश्यकता है।
ग्रामीणों की सक्रियता से भेद 'खुला
ग्रामीणों की सूचना पर जब मैं स्कूल आया तब स्कूल की महिला शिक्षक व संकुल समन्वयक शनिवार को अकेले ही स्कूल आये व कबाड़ीयों को साथ लाये थे और किताबों को बेचने की कोशिश कर रहे थे पर ग्रामीणों के सक्रियता से पकड़ी गई है अब यह विभागीय जांच का विषय है।
नोहर वर्मा
अध्यक्ष शाला विकास समिति ग्राम पंचायताकरा ( धरसींवा)
जानकारी मिली
पिछले सत्र की बची हुई किताबों को बेचने का अधिकार किसी भी संकुल समन्वयक को नही है मुझे भी यह जानकारी मिली है जल्द ही एक जांच कमेटी की गठन कर जांच करेंगे व सत्यता पाई गई तो विभाग से नियमानुसार कार्यवाही होगी।
वंदना शुक्ला प्रभारी ब्लाक शिक्षा
अधिकारी