छत्तीसगढ़ / रायपुर

छत्तीसगढ़ समेत 3 राज्यों में EOW का छापा: शराब और कोयला घोटाला से जुड़ा है मामला...

 रायपुर । छत्तीसगढ़ में चल रहे शराब घोटाले और अवैध कोल लेवी वसूली प्रकरणों की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू की टीम ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ झारखंड और बिहार में भी एक साथ दबिश दी। इस दौरान टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और नगदी जब्त किए। अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई सामग्रियों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और आरोपियों से पूछताछ जारी है।

शराब घोटाले में तीन राज्यों में दबिश
रायपुर ईओडब्ल्यू में दर्ज अपराध क्रमांक 04/2024 (धारा 420, 467, 468, 471, 120बी भा.द.वि. एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 7, 12) के तहत कार्रवाई की गई।

मुख्य आरोपी कारोबारी अवधेश यादव और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर दबिश

 


कुल 7 स्थानों पर छापा: छत्तीसगढ़ (3), झारखंड (2), बिहार (2)

 


टीम को मौके से महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, संपत्ति से जुड़े कागजात और नगदी मिले
अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्रियों से घोटाले की नई कड़ियाँ सामने आ सकती हैं

अवैध कोल लेवी वसूली प्रकरण में कार्रवाई
इसके अलावा ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 03/2024 (धारा 420, 120बी, 384, 467, 468, 471 भा.द.वि. एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में भी छापेमारी की।

आरोपी जयचंद कोशले के रायपुर और जांजगीर-चांपा स्थित आवास पर तलाशी

 


जयचंद कोशले, पूर्व आईएएस अधिकारी सौम्या चौरसिया का मुख्य सहयोगी माना जाता है। उस पर लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध कोल लेवी वसूली राशि का प्रबंधन करने का आरोप। तलाशी में दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद हुए हैं। 

जांच की अगली दिशा
ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में जप्त सामग्री की फॉरेंसिक जांच और वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है। आरोपियों और संदिग्धों से लगातार पूछताछ जारी है। बरामद दस्तावेजों के आधार पर नई संपत्तियों और लेन-देन की कड़ियाँ खंगाली जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि आगे और छापेमार कार्रवाई हो सकती है

पृष्ठभूमि:
शराब घोटाला: करोड़ों रुपये के अवैध लाभ और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप
कोल लेवी घोटाला: छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन व खनन से अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क, जिसमें कई अधिकारियों और कारोबारियों की संलिप्तता की आशंका

 



इस तरह की छापेमार कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि ईओडब्ल्यू इन दोनों घोटालों की जांच को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।

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