छत्तीसगढ़ / मुंगेली

श्रीराम कथा में शामिल हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साह

 युवाओं को चाहिए विनम्र बने सरल बने मां-बाप की सेवा करें गुरुजनों की सेवा करें आदर दे - चिन्मयानंद बापू



लोरमी - मानस मंच लोरमी में चल रही श्री राम कथा आज पंचम दिवस में चिन्मयानंद  बापू ने कहा भगवान की कथा हम भगवान को सुना रहे हैं भगवान राम जगत को विश्राम देते हैं जगत के प्रपंचों में कोई बात विश्राम खो दे जो जगत के सारे लोग विश्राम देते हैं वह जगत के कल्याण के लिए मां कौशल्या के समाज प्रकट हुए बापू ने कहा कि जहां की माटी की बेटी ने भगवान को प्रकट किया ईश्वर सर्वत्र हैं भगवान जन्म नहीं लेते प्रकट होते युवाओं को चाहिए विनम्र बने सरल बने मां-बाप की सेवा करें गुरुजनों की सेवा करें आदर दे श्री बापू ने कहा कि अपने बच्चों का नामकरण खुद नहीं करना चाहिए अपने गुरु जनों से या ब्राह्मण से नामकरण करना चाहिए महाराज  दशरथ गुरु वशिष्ठ को बुलाकर के भगवान का नाम कारण कराया राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न बापू ने कहा कि हमें रामायण से राम कथा से शिक्षा लेना चाहिए की भगवान राम गुरुकुल में पढ़ने के लिए गए चारों भाई कथा के माध्यम से बापू ने कहा कि युवाओं को आचरण शील होना चाहिए नवयुवकों को चाहिए भगवान राम को आदर्श माने बापू ने कहा कि आज हमारा समाज कहां चला जा रहा है माता-पिता को चाहिए बच्चों को धन ना दे लेकिन संस्कार अवश्य दें जो मां-बाप बच्चों को संस्कार नहीं देते वह समाज के सबसे बड़े दुश्मन है भगवान धर्म की नस के लिए भक्तों के प्रेम के कारण अवतरित होते हैं की कड़ी में कथा के माध्यम से मानस की कथा को आगे बढ़ते हुए विश्वामित्र  ज्ञानी धर्म की रक्षा के लिए महाराज दशरथ के पास आए और राम लक्ष्मण को लेकर गए अपने यज्ञ की रक्षा करने के लिए इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  तोखन साहू उपस्थित रहे उन्होंने रामायण जी प्रणाम किया कुछ बापूजी से आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे कथा का रसपान किये।

रामकथा जीवन में धर्म, मर्यादा और सेवा का संदेश देने वाला प्रेरक प्रसंगः तोखन साहू

 केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने मानस मंच में चिन्मयानंद बापू जी द्वारा प्रवर्तित श्रीराम कथा में सम्मिलित होकर श्रद्धा प्रकट की। उन्होंने भगवान श्रीराम की पूजा अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख समृध्दि की कामना की। तत्पश्चात कथावाचक बापू से आशीर्वाद लिया। उन्होंने उदबोधन में कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन में धर्म, मर्यादा और सेवा का संदेश देने वाला प्रेरक प्रसंग है। भगवान राम एक श्रेश्ठ राजा थे, उन्होने सत्य करूणा दया, धर्म, और मर्यादा के मार्ग पर चलते हुए राज किया। इन्ही गुणो के कारण उन्हे मर्यादा पुरूषोत्त्म कहा जाता है, उनका जन्म लोक कल्याण और मानव के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करने के लिए हुआ था। हम सबको भगवान राम के आदर्श को अपने जीवन में उतारना चाहिए। श्री साहू ने ईश्वर से कामना किया कि यह दिव्य कथा समाज में शांति, सद्भाव और मंगल का प्रकाश फैलाए।

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