छत्तीसगढ़ / रायपुर

1जून तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी किताबें 24, करोड़ की बचत कागज खरीदी में

1जून तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी किताबें 24, करोड़ की बचत कागज खरीदी में 

दैनंदिनी

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 11 नवंबर। प्रदेश के साढ़े 17 सौ से अधिक निजी स्कूलों ने पाठ्य-पुस्तक निगम की किताबें नहीं ली है। इस पर निगम ने स्कूल शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी है। इससे परे पाठ्य-पुस्तक की कागज खरीद में पिछले साल के मुकाबले करीब 24 करोड़ की बचत हुई है। यह जानकारी पाठ्य-पुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडेय दी।
 
श्री पांडेय ने मीडिया से चर्चा में निगम की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि निगम स्वशासी संस्था है, और सारे फैसले निगम का संचालक मंडल लेता है। निगम का काम गुणवत्तायुक्त कागज खरीदना, मुद्रण और वितरण करना है।

पांडेय ने बताया कि स्कूलों के पाठ्य-पुस्तक की किताबों के लिए जैम पोर्टल के माध्यम से कागज खरीद हुई थी। कागज की क्वालिटी में किसी तरह का समझौता नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि एनसीआरटी के मापदंड का पालन किया गया। करीब 12 हजार मीट्रिक टन कागज की खरीद हुई। यह खरीद 78 रूपए किलो की दर से हुई। जबकि गत वर्ष 98 रूपए की दर से खरीदी हुई थी। इस तरह कुल मिलाकर 24 करोड़ रुपए की बचत कागज खरीद में हुई है।
 
निगम अध्यक्ष ने बताया कि कागज की गुणवत्ता की जांच के लिए सिस्टम बना हुआ है। हर 500 मीट्रिक टन कागज का सैम्पल जांच के लिए लैब भेजा जाता है। सैम्पल फेल होने पर अर्थदंड का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मान्यता 1784 निजी स्कूलों ने पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें नहीं ली है। जबकि कक्षा 1 से 10 तक स्कूलों को पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें लेना अनिवार्य है। किताबें नहीं लेने से करीब 15-20 करोड़ रुपये की बचत निगम को हुई है। बावजूद इसके निगम ने स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है, और जानकारी चाही है कि उक्त स्कूलों ने किताबें क्यों नहीं ली। विभाग इस पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि निगम में पाठ्य पुस्तक की किताबों की छपाई आदि के लिए राशि का आबंटन समग्र और डीपीआई द्वारा किया जाता है। दस फीसदी राशि स्थापना व्यय पर खर्च होता है।

श्री पांडेय ने बताया कि नए शिक्षा सत्र से किताबें समय से पहले पहुंच जाएंगी। यानि 1 जून तक सभी स्कूलों को किताब पहुंच जाए, यह व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में डिपो की संख्या बढ़ाई गई है। आठ नए सब डिपो बनाए गए हैं। जगदलपुर के अलावा सुकमा, कांकेर, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़ और कुनकुरी में डिपो होंगे।
गुजरात भी अपनाएगी छत्तीसगढ़ पापुनि का बारकोड सिस्टम

पाठ्य पुस्तक निगम ने पिछले वर्षों में अतिरिक्त छपाई, और गुणवत्ता में कमी आदि की शिकायतों पर नियंत्रण के लिए बारकोड सिस्टम शुरू किया है। इसके बेहतर नतीजे आए हैं। हरेक किताब के पीछे दो बारकोड हैं। एक को स्कैन करने पर प्रिंटर और दूसरे बारकोड में संकुल आदि की जानकारी होती है।

श्री पांडेय ने बताया कि गुजरात पाठ्य पुस्तक निगम ने भी छत्तीसगढ़ की व्यवस्था को सराहा है और वहां भी इसी तरह का सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इसके लिए यहां से जानकारी बुलाई है। उन्होंने कहा कि 2 करोड़ 84 लाख किताबें छापी गई हैं। समय पर 2 लाख 41 हजार छापकर भेज दी गई। बाद में 23 लाख अतिरिक्त छापी गई थी। उन्होंने कहा कि परिवहन की व्यवस्था बेहतर की जा रही है। जीपीएस सिस्टम लागू किया जा रहा है ताकि किताबें समय पर पहुंचे और इसकी मानिटरिंग भी की जा सके। मुख्यालय में भी सभी डिपो में सीसीटीवी लगाए गए हैं, और मुख्यालय को जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि कागज की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर दो कंपनियों को क्रमशः 30 लाख और 80 लाख अर्थदंड का नोटिस भेजा गया है। पांच साल ब्लैक लिस्ट करने का प्रावधान है। किसी तरह की शिकायत आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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