किसे गले लगाऐं और किस पर करें विश्वास!
कबीरधाम |
2026-02-23 16:33:24
संदर्भ कवर्धा
रामकुमार टंडन
कबीरधाम जिले में 1 लाख से अधिक पंजीकृत मनरेगा के अंतर्गत सक्रिय लेबर है वही श्रम विभाग में 1 लाख 60हजार से अधिक पंजीकृत लेबर बताए जा रहे हैं जिले में दो विधानसभा पंडरिया और कवर्धा दोनों की आबादी 10 लाख हो सकती है। मतदाताओं की बात की जाए तो लगभग 6.50लाख माना जा सकता है। काम के दृष्टिकोण से मजदूरों को मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान किया गया है ।प्रदेश में कवर्धा सबसे ऊपर है । जिले के पंडरिया,कवर्धा, बोड़ला, सहसपुर लोहारा विकास खण्ड में लगभग पंजीकृत गैर पंजीकृत गुड फैक्ट्री की संख्या 350 से अधिक हो सकती है। सभी गुड़ फैक्ट्रियों में लेबर अन्यराज्य से काम करने आते हैं। दो शक्कर कारखाना है यहां दो पालियों में 5 सौ से 7 सौ लोग काम करते होंगे । फिर भी दिया तले अंधेरा है। 1दर्जन से अधिक लेबर लाने लेजाने वालियां लेबर बस चल रही हैं। अन्य राज्य से जिले में आने वाली स्लीपर गाड़ियां 2 दर्जन से अधिक आ रही होंगी । जिले से सैकड़ों की संख्या में मजदूर आ जा रहे हैं।पलायन नही रुक पा रहा है। कारण जानने का प्रयास होना चाहिए। होने वाली निर्माण कार्य पर अनियमितताएं अधिक है। करोड़ों रुपयों का धान चूहा खाने ने छत्तीसगढ़ को खूब पहचान दी है।शिकायतों पर कार्रवाई चिन्हांकित कर किया जा रहा है। बल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित पंडरिया के एक कर्मचारी ने काम से निकाल देने के बाद मुख्यमंत्री,डिप्टी सी.एम.केंद्रीय मंत्री, विधायक और नेताओं सहित अधिकारियों से प्रेस के माध्यम न्याय की गुहार लगा है। कुछ तो काम में नही रखने से नाराज हो आंदोलित रहे हैं। आए दिन किसी न किसी बात को लेकर दोनों कारखाना कर्मी आंदोलन करते हैं। धर्म संसद और झंडा विवाद ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थी।भय मुक्त सरकार देने की बात कही गई थी ,भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज राजनीतिक पार्टियों के अलावा विभिन्न संगठन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि जनता जनार्दन सभी मुखर हो अपनी आवाज लगा रहे हैं। नियमनुसार हर शासकीय कार्य में लागत संबंधी सभी जानकारियां सूचना फलक पर सर्वसाधारण के लिए होनी चाहिए जो नहीं हो रहा है। जिनके बदौलत जिले के गरीब किसानों ने अपनी आर्थिक शक्ति बढ़ाई है उसके ऊपर खतरा का मंडरा रहा है। जिला मुख्यालय में वर्षों से साप्ताहिक बैठकें आयोजित होती हैं, जहां से निर्देश होता है ।क्रियान्वयन पर कोई हल्ला नही होता है । नौकरशाही इतने हावी है कि ऑफिसों में अफसर शुक्रवार के बाद कुर्सियां छोड़ जाते हैं जानकारी साइड जाने संबंधी आती हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार के समय जिले का निर्माण हुआ है। 2000 में अलग छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ। तब से अब तक राज्य में कवर्धा जिला बहुत छोटा होने के बाद भी राजनीतिक रूप से काफी सम्पन्न रहा है। इन 25 वर्षों में 15 साल कवर्धा के सपूत को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है। प्रथम मुख्यमंत्रित्व काल में जिले का नाम कवर्धा से बदल कर कबीरधाम रखा गया है जिले को कबीरपंथियो का गढ़ माना जाता है। संत कबीरदास जी महाराज के अनुवाइयों की संख्या भी है। सभी जाती धर्म के लोग कबीर पंथी हैं। बहुत बढ़िया शांति प्रिय कवर्धा कुछ वर्षों से अशांतियों ने माहौल को बिगड़ कर रख दिया है। जिसकी पहचान देश भर में हो गई है। प्रदेश को जिले ने राजनीति का प्रथम पैदान पर नहीं रख है तो दूसरे स्थान पर स्थान बनाने में अपनी भूमिका अदा कर रही है। बस कानून का राज हो लोगों के मन मे कोई खौफ न हो, सत्ता किसी भी राजनीतिक पार्टी की हो विरोधियों को आईना मान कर चलना चाहिए उन्हें नीचा दिखाने के बजाय जाति धर्म से ऊपर उठ जनहित में काम करने व सतर्क रहने की आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नाम बदल कर आदिवासी क्षेत्र में जनमन कर दिया गया है। कार्यालय विवाद के घेरे में आ गया है। 76 सड़के बनाई जा रही है। फारेस्ट क्लिरेशन 1980 का सही जानकारी नही है। धन कुबेर जिला पंचायत कार्यालय की कहानी निराली है। लोकनिर्माण विभाग बहुत ऊंची नाम है। सभी सड़कों की हालात खराब हो चली है।कर्मचारियों अधिकारियों के सबसे बड़े विभाग शिक्षा तो केवल कागजों के आंकड़ों में खेल रही है। कुछ विभागों से पब्लिक का संबंध ही नहीं है। बांधे व नहर नालियां करोड़ों रुपयों का काम करने वाली सिंचाई विभाग किसानों के खेतों को सिंचित नही कर पा रहा है। RTO तो हमेशा सड़कों में रहती है।हरा सोना वाला विभाग ऐसा है "जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि"
वाली कहावतें चरितार्थ हो रहा है। तभी तो सरकार की नजर वहां तक नहीं पहुंचती है।वैसे भी प्रदेश और जिले के अधिकांश क्षेत्र वन अक्षादित है। जल के बिना कल अधूरा वाली विभाग में तो पानी टंकियां गांवों की शोभा बढ़ा रही हैं।जिले में चहुं ओर हरियाली है।