छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

जब छोड़ चलूं इस दुनिया को, होंठो पे नाम तुम्हारा हो, चाहे स्वर्ग मीले या नरक मिले, ह्नदय में वास तुम्हारा हो...

राधेश्याम सोनवानी, रितेश यादव-
 
श्री हरि सत्संग मण्डल द्वारा गांधी मैदान में श्री भूतेश्वरनाथ शिव महापुराण की जा रही आयोजित।
गरियाबंद। जब छोड़ चलूँ इस दुनिया को, होंठो पे नाम तुम्हारा हो, चाहे स्वर्ग मीले या नरक मिले, ह्नदय में वास तुम्हारा हो...गरियाबंद के गांधी मैदान में श्री हरि सत्संग मण्डल द्वारा आयोजित श्री भुतेश्वरनाथ शिव महापुराण के दूसरे दिन कथावाचक श्री नारायण जी महाराज के इस प्रेरक भजन ने सबको मंत्र मुग्ध कर दिया । भगवान भूतेश्वरनाथ की महिमा और चंचुला की कथा श्रवण भक्ति और वैराग्य से शिव की प्राप्ति कैसे की जा सकती है,  इस पर बखान करते हुए उन्होंने कहा कि जो ज्ञान और भक्ति प्राप्त करना चाहता है उनको भगवान शिव की उपासना नियमित रूप से करनी चाहिए, भगवान शिव अविनाशी हैं,  जिनका कभी विनाश नही हुआ, इस समय पूरी सृष्टि शिवमय हो चुका है, सम्पूर्ण जगत शिवमय हो चुका है, शिव वो है जो जगत का कल्याण करता है, अगर आपने सूक्ष्म से सूक्ष्म भी उपासना की है शिव का थोड़े समय भी जप किए हो शिव जी का तो और अपने सामर्थ्य अनुसार थोड़े से भी दान किए हो मेरे शिव के लिए और जीवन मे एक क्षण भी शिव के सम्मुख बैठे हैं तो उसका फल आपको जरूर प्राप्त होगा, वो कभी व्यर्थ नही जाएगा। 

गरियाबंद के शिवभक्तों को कथाकार श्री नारायण जी महाराज ने कहा कि यह भगवान शिव का शिवपुराण जीव के जीवन मे कल्याण करने वाला है। अनेक जन्मों के पुण्योदय के फलस्वरूप शिव महापुराण श्रवण का लाभ मिलता है। आयोजन समिति श्री हरि सत्संग मण्डल गरियाबंद के साथ–साथ जिनका प्रयास इस शिवमहापुराण को अपने नगर में स्थापित करने में लगा है और सबके कल्याण करने का एक सुन्दर पवित्र भाव बना है उन सभी सहयोगियों की प्रशंसा करते हुए ताली के साथ अभिवादन कराया और भगवान शिव से प्रार्थना कर सबके परिवार में निरंतर शिव कृपा बने रहने का आर्शीवचन दिया। आगे उन्होंने कहा कि कोई अगर शिव कथा करा रहा है, आपको जोड़ना चाहता है तो बिना विचार जुड़ जाइए उनका साथ दीजिए। शिवपुराण की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी के परिवार में एक भी शिवभक्त है जो सच्चे ह्नदय से मेरे शिव की सेवा भक्ति में लगा है तो समझिएगा की परिवार में अगर सब सुखी है तो उनकी वजह से सूखी हैं।

शिव उपासना और शिव कथा श्रवण से समस्त पाप नष्ट हो जाते है। जो भगवान शिव का नाम लेता है उनको गति खुद शिव जी प्रदान करते हैं। पवित्र कलश यात्रा पर नगर के समस्त माताओ को साधुवाद देते हुए उन्होंने कहा कि आप सबने भगवान शिव जी के पवित्र ग्रंथ के साथ चले, परोक्ष रूप से या अपरोक्ष रूप से यह कथा मानव मात्र को ही नही बल्कि सभी जीव–जंतु, प्राणियों का भी कल्याण करेगा। चींटी से लेकर हाथी तक सभी जीवों का कल्याण करने वाले शिव महापुराण आप हम सबके जीवन मे कल्याण सूचक बनके आए, मंगलमय कामना लेकर आए।

श्री हरि सत्संग मण्डल गरियाबंद के तत्वाधान में सप्तदिवसीय श्री भूतेश्वरनाथ शिव महापुराण कथा 09 से 17 दिसंबर तक अयोजित कथा का भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा प्रारंभ श्री राधे निकुंज आश्रम से पधारे पूज्य श्री नारायण जी महाराज के सानिध्य में श्री शिव महापुराण कथा द्वितीय दिवस कथा में शिव महापुराण के मंगलाचरण प्रथम दिवस की कथा सुनाई गई। उन्होंने भक्तो को बताया कि भगवान शिव सभी देवों के आराध्य देव हैं। भगवान शिव की पूजा करने से मनुष्य को अकाल मृत्यु का भय नहीं होता है। शिव कथा हमारे जीवन मे मंगल करने वाली है। शिव ज्ञान के दाता हैं और सिर्फ ओम नम: शिवाय मंत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पृथ्वी पर विवाद तभी तक विराजमान है, जब तक शिव महापुराण उदय न हो। सभी देवगणों की चर्चा तभी तक है जब तक शिव महापुराण उदय न हो। अनेकों नदियों, अनेकों तीर्थों, अनेकों वाद ये तभी तक हैं जब तक शिव महापुराण उदय न हो। क्यूंकि जब शिव महापुराण का उदय होता है तब हमारे मन से ये सभी चीजें स्वतः ही विलप्त हो जाती हैं। जो मनुष्य शिव महापुराण का एक श्लोक भी पढ़ता है वह तभी सभी पाप मुक्त हो जाता है। 

दूसरे दिन की कथा के महात्म्य का वर्णन करते हुए पूज्य श्री महाराज जी ने बताया कि किस प्रकार नारद जी ने भगवान से संसार के लोगों के लिए मुक्ति का उपाय पूछा कि कौन सा यत्न करने से संसार के लोगो को मुक्ति मिल सकती है तब भगवान ने बताया कि संसार में केवल भगवान की कथा ही है जो मानव को मुक्ति प्रदान कर सकती है। जहां से मन सहित वाणी उन्हें पाकर लौट आती है तथा जिनसे ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र आदि युक्त सहित सब कुछ निर्माण होता है और उन्हीं में मिल जाता हैं वह ईश्वर वह स्वामी सम्पूर्ण जगत के वे ही सबसे उत्कृष्ट, उत्तम भक्ति से ही उनका साक्षात्कार होता है, दूसरे किसी उपाय से उनके दर्शन संभव नहीं है वह शिव हैं। जहां महाशिवपुराण की कथा होती है वह पर सब तीर्थ प्रकट हो जाते हैं जो मनुष्य भक्ति पूर्व महाशिवपुराण एक श्लोक भी पढ़ लेता है वह उस समय पाप से मुक्त हो जाता है। उत्कृष्ट और उत्तम भक्ति से ही भगवान के दर्शन होते है तभी भगवान प्रकट होते हैं।

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