जितने मारे जाएंगे,उतना आतंक कम होगा
बस्तर , में पहले नक्सलियों की संख्या कम जितनी नहीं होती थी उससे ज्यादा हर साल नई भर्ती कर संख्या बढ़ जाती थी। बस्तर में नक्सलियों की संख्या बढ़ने का मतलब है कि नक्सली गतिविधियों का बढ़ना, नक्सली आतंक का गांवों में बढ़ना। सीधी सा गणित है कि ज्याा नक्सली मतलब ज्यादा आंतक। कम नक्सली मतलब कम आतंक। पहले की सरकारें नक्सलियों की संख्या कम किए बिना नक्सली आंतक को खत्म करना चाहती थी और खत्म नहीं कर पाती थी क्योंकि जितने नक्सली मारे नहीं जाते थे, उससे ज्यादा नक्सली भर्ती हो जाते थे, इससे नक्ललियों की संख्या कम नहीं होती थी और नकस्लियों का आतंक भी कम नहीं होता था।
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार राज्य की दूसरी सरकारों से इस मामले में अलग है कि वह यह सोचती ही नही है कि नक्सलियों की संख्या कम किए बिना नक्सलियों का आतंत समाप्त किया जा सकता है। बस्तर को नक्सल मुक्त किया जा सकता है। उसका सीधा सोचना है कि बस्तर को नक्सल मुक्त कराने के लिए जरूरी है कि बस्तर में नक्सलियों की संख्या कम की जाए। रोज कम की जाए। भले ही इसके लिए रोज नक्सलियों का मारना पड़े, नक्सलियों को रोज गिरफ्तार किया जाए या ऐसी स्थिति बस्तर में बना दी जाए कि नक्सली रोज बस्तर में बड़ी संख्या में सरेंडर करें। बस्तर में नक्सलियों की संख्या तेजी से इसलिए कम हो रही है कि रोज साय सरकार का नक्सली सफाया अभियान जारी है।
हर सप्ताह यह पता लागाया जाता है कि नक्सलियों का मूवमेंट कहां से कहा हो रहा है और फिर मौके पर उनकी घेराबंदी कर उनको जितनी बड़ी सख्या में ढेर किया जा सके, ढेर किया जा रहा है। वह भी उस क्षेत्र में जो कभी नक्सलियों का सुरक्षित किला माना जाता था, जहां पुलिस के जाने का मतलब होता ता, सुरक्षित वापस न लौटना । इस बार नारायणपुर के अबुझमाड़ के जंगल में जवानों की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ के दौरान जवानों ने आठ नक्सलियों का मार गिराया।यह आपरेशन गुरुवार को शुरू हुआ था और शनिवार देर रात ४८ घंटे बाद पूरा हुआा। सुरक्षा बलों का दावा है कि कई नक्सली गोली लगने से घायल हुए है, उन्हें बचाने के लिए ही नक्सील मैदान छोड़कर भाग गए।
चार जिलों के ९०० जवानों ने यह आपरेशन चलााया। सीएम साय ने आठ नक्सलियों के मारे जाने पर जवानों को बधाई दी है और एक जवान के शहीद होने पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि सरकार नक्सलियों के खात्मे के लिए तत्पर है। लक्ष्य पूरा होने तक चुप नहीं बैठेगंे। सही मायने अब राज्य को एक मजबूत सीएम मिली है जो नकसलियों के सफाए के गंभीर है और उसके लिए पूरी गंभीरता से प्रयास भी किया जा रहा है। सरकार के आक्रामक होने का परिणाम है कि नक्सली बैकफुट पर है। वह हमला करने की बजाय सुरक्षा बलों का सामना करने से बच रहे है, इसलिए बस्तर में पिछले कुछ महीनो में नक्सलियों के हाथों मारे जाने वाले या शहीद होने वाले जवानों की संख्या कम हो गई है।