संस्कृति

भगवद् कृपा से ही बुद्धि जान सकेगी भगवान को - सुश्री धामेश्वरी देवीजी

  भगवद् कृपा से ही बुद्धि जान सकेगी भगवान को - सुश्री धामेश्वरी देवीजी

भिलाई छ.ग., राधा कृष्ण मंदिर, ब्रज मंडल सेक्टर 6, कालीबाड़ी के पास जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवी जी की दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला के तीसरे दिन वेद और शास्त्रों के प्रमाणों सहित देवी जी ने बताया कि सर्वान्तरयामी सर्वशक्तिमान भगवान् को बुद्धि के द्वारा बड़े बड़े ज्ञानी तो क्या, ब्रम्हा विष्णु शंकर भी नहीं जान सकते क्योंकि भगवान् बुद्धि से परे हंै, मायातीत हंै। हम सभी जीव गुणों के आधीन हैं, भगवान् माया से परे है, दिव्य है, शाश्वत है, हमारी इन्द्रिय मन बुद्वि मायिक है, प्राकृत है इसलिए क्षुद्र शक्ति युक्त है। इसके अतिरिक्त भगवान् अनंत विरोधी धर्मों के अधिष्ठान भी हैं इसलिए बडे़ बडे़ ब्रम्हा विष्णु शंकर आदि बुद्धि के आधार पर नहीं जान सकते तो साधारण मनुष्य भी भगवान् की शक्ति को नहीं जान सकता। भगवान् छोटे से भी छोटा है, भगवान् बडे़ से भी बड़ा है, वो धर्म से परे है, अधर्म से भी परे है, सृष्टि से परे है किन्तु सृष्टिकर्ता भी है, अकर्ता है किन्तु न्यायकर्ता भी है, कृपाकर्ता भी है, भगवान् से भय भी भयभीत होता है किन्तु भगवान् यशोदा मैया की छड़ी से डरते हंैंै। भगवान् को बड़े बडे़ ऋषि मुनि महात्मा अपने पराक्रम से नहीं जान सकते और वो आत्माराम पूर्णकाम है किन्तु ब्रजगोपियों के साथ रास भी करते हैं इसलिए ऐसे भगवान् को जानना बुद्धि से असंभव है। बुद्धि से भगवान् को जाना नहीं जा सकता परंतु यदि किसी पर भगवान् की कृपा हो जाये और भगवान् की बुद्धि (दिव्य शक्ति) उसे मिल जाये, तो साधारण मनुष्य भी भगवान् को जान सकता है। 
विश्व के अधिकांश महानुभाव यह कह दिया करते हंै कि ईश्वर की इच्छा के बिना कुछ नहीं हो सकता। कुछ लोग कोटेशन आदि के द्वारा प्रत्येक कर्म के लिए भगवान् को जिम्मेदार ठहराते हंैंै। उसे जैसा करना होता है, करा लेता है। किन्तु यह बात गलत है। ईश्वर ने हमें मनुष्य देह दिया, कर्म करने की शक्ति दी। चाहे हम अच्छे कर्म करें, चाहे बुरे कर्म। भगवान् उन कर्मों को नोट करता है फिर उन कर्मों के अनुसार हमें फल देता है। 
भगवान् ने हमें सत्कर्म करने की शक्ति दी है किंतु उसकी दी हुई शक्तियों का हम दुरुपयोग करते हंै। यानि संसार में आसक्ति करते हंै और फिर कह देते हैं, हमारे भाग्य में नहीं है। अथवा भगवान् को दोषी ठहराते हंैंै। मनुष्य देह प्राप्त करके ईश्वर की भक्ति करने की बजाय संसार की जिम्मेदारियों की आड़ लेते हैं। वास्तव में भगवान् की कृपा का सही अर्थ समझना होगा, शास्त्रों से और संतो से। भगवद् कृपा के बिना भगवान् को नहीं जाना जा सकता। भगवान् की जिस पर कृपा हो जाती है वह उसे पूर्णतया जान लेता है। देवीजी ने यह भी बताया कि सगुण साकार भगवान् ही कृपा करता है इनकी कृपा के बिना किसी की भी माया-निवृत्ति नहीं हो सकती। प्रवचन का समापन श्री राधाकृष्ण भगवान् की आरती के साथ हुआ। 11 दिवसीय दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला का आयोजन दिनांक 21 दिसम्बर 2025 तक प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक होगा।

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