छतीसगढ़ के समाजसेवी चंपालाल जैन परिवार के साथ पहुंचे महाकुंभ, संगम में लगाई आस्था की डुबकी, कहा- सात समंदर पार हो रही कुंभ की चर्चा
प्रयागराज। महाकुंभ में देश और दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। इसी बीच छतीसगढ़ के वरिष्ठ समाजसेवी चंपालाल जैन, अपनी धर्मपत्नी विमला देवी और रिश्तेदारों, मित्रों के साथ महाकुंभ पहुंचे। पहले उन्होंने पूरे मित्रों के साथ मेला क्षेत्र का भ्रमण किया। उसके बाद विधि विधान के साथ रमेश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, गायत्री अग्रवाल, तनुजा बंसल, एस के बंसल और संजू अग्रवाल के साथ त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान उन्होंने एक स्वर में हर हर गंगे और भगवान भोलेनाथ के जय घोष के नारे लगाए।
महाकुंभ सनातन का महापर्व
त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद वरिष्ठ समाजसेवी चंपालाल जैन ने कहा कि महाकुंभ सनातन का महापर्व है, यहां सभी को आना चाहिए। संगम नगरी पहुंचते ही हमें बहुत आनंद आया। गंगा में डुबकी लगाने के बाद हमारी सारी चिताएं एक क्षण में दूर हो गई। यहां करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिन ढलने के साथ भक्तों की संख्या में भी भारी इजाफा हो रहा हो रहा है। महाकुंभ में आस्था का जनसैलाब कम होने वाला नहीं है। महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। जिसकी चर्चा सात समंदर पार हो रही है। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ समेत देश की खुशहाली की कामना की।
ऐसा अनुभव केवल महाकुंभ
विमला देवी जैन ने कहा कि जो महाकुंभ के बारे में सुना था, उसे आज महसूस भी कर लिया। प्रयागराज पहुंचते ही अंदर से खुशी हो रही है। जिसे शब्दों में जाहिर नहीं किया जा सकता। सभी लोगों को यहां आना चाहिए, संगम में डुबकी लगाने के बाद सारी दुख तकलीफ और टेंशन दूर हो जाएगी। गंगा के पावन तट पर आकर हम खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। प्रयागराज आकर हमें बहुत अच्छा लग रहा है। संगम घाट के हवाओं की बात ही कुछ और है। ऐसा अनुभव केवल महाकुंभ में ही मिल सकता है। 144 साल बाद जो कुंभ हुआ है, वो सनातन धर्म का एक चमत्कार है। यहां आने से तन और मन को आनंद की अनुभूति होती है।
भारत के सनातन संस्कृति की अनूठी झलक
रायपुर से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि बहुत मन था कि संगम नगरी जाएं और गंगा में पावन डुबकी लगाएं। आज हमारी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हुई। गंगा मइया के गोद में बैठकर अच्छा लगा रहा है, जो लोग अभी तक नहीं आए हैं। उनके यहां जरूरी आना चाहिए, नहीं तो मन में हमेशा मलाल रहेगा कि पावन अवसर पर गंगा में डुबकी नहीं लगा पाए। भारत के सनातन संस्कृति की अनूठी झलक यहां देखने को मिलती है। भारत के लोगों के लिए गर्व का विषय है। यहां सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है। आने जाने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। बता दें कि महाकुंभ में मंगलवार दोपहर 12 बजे तक 69.62 लाख से अधिक लोगों ने स्नान कर लिया है। अभी तक 54.31 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है।