संसद में शोर से सियासी टकराव तक: कांग्रेस ने सरकार को घेरा, हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान जारी राजनीतिक टकराव के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने गृह मंत्री से सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने की मांग करते हुए कहा कि विपक्ष चर्चा और सवालों के जवाब के लिए तैयार है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष के सांसदों के संसद परिसर में प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने संसद परिसर में ऐसा दृश्य पहली बार देखा है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने गृह मंत्री से सदन में आकर चर्चा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है और सवालों के जवाब देने को भी तैयार है, लेकिन गृह मंत्री सदन में आने के बजाय इससे बच रहे हैं। वेणुगोपाल ने सदन की कार्यवाही में गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सरकार के अलग-अलग एजेंडे हैं, लेकिन जनता ने उन्हें खारिज कर दिया है।
‘सरकार संसद से भाग रही है’ के आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी संसद में जारी गतिरोध को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सरकार को यह महसूस हुआ कि देशभर में यह संदेश जा रहा है कि वह संसद से भाग रही है और छात्रों, युवाओं तथा आम लोगों के बीच इसे लेकर प्रतिक्रिया हो रही है, तब स्पीकर को पत्र लिखकर बातचीत की इच्छा जताई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने यह पहल पहले क्यों नहीं की।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने मानसून सत्र को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा संबंधी विधेयक पर चर्चा हुई, लेकिन कई अन्य विधेयक पर्याप्त चर्चा के बिना पारित कर दिए गए। कुछ विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। उनका आरोप है कि प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान भी सांसदों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है और संख्या बल होने के बावजूद विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि विपक्ष किन मुद्दों को सदन में उठाए।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ हवन पर भी सियासत गरम
संसद के गतिरोध के बीच उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे दलितों के प्रति भाजपा और आरएसएस की कथित मानसिकता से जोड़ते हुए सरकार और भाजपा पर निशाना साधा।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने घटना को गलत और निंदनीय बताते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले पर स्पष्ट बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर खड़गे जैसे दलित नेता के किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की जाती है, तो यह राजनीति के बेहद निचले स्तर को दर्शाता है।
कांग्रेस सांसद अमन सिंह ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा की सोच अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्गों की भागीदारी को स्वीकार नहीं करने वाली है।
वहीं इमरान प्रतापगढ़ी ने मल्लिकार्जुन खड़गे के लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन का उल्लेख करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रधानमंत्री से सवाल किया कि कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ क्यों किया गया।
इस तरह संसद में जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस ने जहां सरकार पर विपक्ष को बोलने का अवसर नहीं देने का आरोप लगाया, वहीं हल्द्वानी की कथित घटना ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक और राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है।