संस्कृति
महादेव की कथा सुन रहा महादेव एप का सरगना सौरभ चंद्राकर, जांच एजेंसियों के दावों पर उठ रहे सवाल
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप से जुड़े 6000 करोड़ रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को दुबई में गिरफ्तार करने की खबर दो महीने पहले सामने आई थी. यह कार्रवाई इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हुई, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर जारी किया गया था. हालांकि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब जो वीडियो सामने आया है वो जांच एजेंसियों के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है. वायरल वीडियो में सौरभ चंद्राकर बहुत ही आराम से संस्कारी बालक की तरह दुबई के ली- मेरीडियन में भगवान शिव की कथा सुनते नजर आ रहा है. इसके साथ ही वह कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का बकायदा मेहमाननवाजी करते भी नजर आया है.
महादेव सट्टा एप के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जो वीडियो वायरल हो रहे हैं वो दो अलग-अलग है. एक वीडियो में देश के मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा दिख रहे हैं. वीडियो में प्रदीप महाराज ब्लैक रोल्स रॉयस से तरते नजर आ रहे हैं और एक आलीशान बिल्डिंग के अंदर प्रवेश करते हैं. इस दौरान सौरभ चंद्राकर प्रदीप महाराज का स्वागत करता दिखाई दे रहा है. वहीं दूसरे वीडियो में प्रदीप महाराज के कथा को संस्कारी बालक की तरह सौरभ चंद्राकर सुनता हुआ दिखाई दे रहा है, उसके बगल में एक महिला भी बैठी हुई दिखाई दे रही है.
ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर जांच एजेंसियों ने सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया है तो वह ऐसे खुले में कैसे घूमते नजर आ रहा है? वायरल वीडियो ने जांच एजेंसियों के दावों को संदेहास्पद बना दिया है. हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि लल्लूराम डॉट कॉम नहीं करता है.
भगवान चारभुजा नाथ को 1 लाख 10 हजार रुपए के नोटों से बनी पोशाकें पहनाई गईं…
Charbhuja Nath Mandir: सम्पूर्ण मेवाड़ की आस्था का प्रमुख केन्द्र भीलवाड़ा जिले के कोटडी कस्बे में भगवान चारभुजा नाथ का दरबार है. मंदिर में भगवान चारभुजानाथ के दरबार में एक भक्त ने 1 लाख 10 हजार रुपए के नोट चढ़ाए हैं. श्रद्धालु दीनानाथ वर्मा ने बताया कि नोटों की पोशाक में 500 रुपये के 100 नोट, 200 रुपये के 200 नोट, 100 रुपये के 100 नोट और 50 रुपये के 200 नोट हैं.

जया किशाेरी करने लगी हैं मॉडलिंग! तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल, आ रहे ऐसे कमेंट, जाने पूरा मामला
कथावाचक जया किशोरी (Jaya Kishori) लाखों के बैग वाले मामलें के बाद एक वायरल तस्वीर को लेकर चर्चा में आ गई है. गौ सेवा और कथा के जरिए सुर्खियों में रहने वाली जया किशोरी की मॉडलिंग (Modeling) वाली तस्वीरें सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो गया है. वायरल तस्वीर में जया आउटफिट कपड़ो में किसी मॉडल (Model) की तरह पोज देते नजर आ रही है.
बीतें दिनों जया किशोरी अपने हाथों में Christian DIOR का बैग लेकर एयरपोर्ट पर स्पॉट हुई थी. इसके बाद उनकी बैग को लेकर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था. लोगों ने उन पर आरोप लगाया था कि जिस ब्रांड का बैग लेकर वो चल रही है असल में इस बैग को बनाने के लिए गाय की खाल का इस्तेमाल किया जाता है.
अब फिर एक बार जया किशोरी की बताकर एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वो मॉडलिंग वाले कपड़े पहने किसी मॉडल की तरह ही पोज दे रही हैं. दरअसल, सोशल मीडिया पर कई सारी पोस्ट में ये दावा किया जा रहा है कि कथित तौर पर कथावाचक जया किशोरी लाल रंग की ड्रेस में मॉडलिंग करते हुए दिखाई दे रही हैं. पहले गाय की चमड़ी का इस्तेमाल कर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी का पर्स इस्तेमाल करना और उसके बाद मॉडलिंग वाले कॉस्ट्यूम में नजर आने से उनके चाहने वाले आहत हुए है. सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर को लेकर साजिश बताते हुए समर्थन कर बदनाम करने की बात कह रहे है तो वहीं कुछ लोग जया किशोरी का विरोध कर रहे हैं.
एआई जनरेटेड तस्वीर होने का दावा
बता दें कि इस तस्वीर को जया किशोरी के किसी भी ऑफिशियल अकाउंट से शेयर नहीं किया गया है और न ही मामले को लेकर कोई सफाई दी गई है, जिससे यह दावा किया जा रहा है कि तस्वीर एआई जनरेटेड है. इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स के फैक्ट चेक से भी ये पता लगा है कि तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है और इसे एआई से विवाद पैदा करने के लिए जनरेट कर ऐसा बनाया गया है.
सोशल मीडिया यूजर्स कर रहे कमेंट
जया किशाेरी की मॉडलिंग वाली पोस्ट को @BeingSumit007 नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक कई लोगों ने देखा है. तो कई लोगों ने इस पर अपनी रिएक्शन भी दिए है. एक यूजर ने लिखा….जया किशोरी जी को बदनाम करने में नफरती चिंटू पूरा जोर लगा रहे हैं. एक और यूजर ने लिखते है कि…हिंदू धर्म का प्रचार कर रही हो या फिर अपना. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…हे भगवान ये सब क्या देखना पड़ रहा है, अच्छा है मैं अंधा हूं. हालांकि ये इन तस्वीरों को पूरी तरह से फर्जी हैं बताया जा रहा है. जिन्हें लोग असली समझकर ऐसे कमेंट कर रहे हैं.
सपने में नजर आए अगर ये 6 चीजें, तो समझ जाएँ बरसने वाली है माँ लक्ष्मी की कृपा…
सोते हुए हर कोई सपने देखता है, कई बार उठने के बाद सपने याद रहते हैं तो कई बार हमे कुछ भी याद नहीं रहता है. पर स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कुछ न कुछ अर्थ रहता है. यानी में सपने में दिखने वाली चीजे हमे कोई न कोई संकेत देती ही हैं. आज हम आपको बताएँगे सपने में ऐसी कौन सी चीजें नजर आने का अर्थ है की आपके पास लक्ष्मी का आगमन होने वाला है. यानी बहुत जल्द आपका भंडार भरने वाला है.
प्रदोष व्रत पर अपनी राशि के अनुसार करें शिव जी का अभिषेक, कृपा बरसेगी अपरंपार
नई दिल्ली। भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat December) को बहुत ही उत्तम तिथि माना जाता है। ऐसे में मार्गशीर्ष माह का अंतिम प्रदोष व्रत शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024 को किया जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि आप किस प्रकार इस तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी: जल्द शुरू हो सकती है आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए हेली सेवा, जानिए कितना होगा किराया
देहरादून. 15 दिसंबर से आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए हेली सेवा शुरू हो सकती है. इसके लिए रुद्राक्ष एविएशन कंपनी की तैयारी पूर्ण हो चुकी है. वैसे तो पहले यात्रा 15 नवंबर तय की गई थी, लेकिन बर्फबारी न होने की वजह से हेली सेवा को स्थगित कर दिया गया था.
बर्फबारी हुई तो श्रद्धालु रोज हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट से भगवान शिव के निवास स्थान के लिए उड़ान भर सकेंगे. रुद्राक्ष का डबल इंजन एमआई 17 हेलीकॉप्टर नैनी सैनी एयरपोर्ट से हर रोज 18 श्रद्धालुओं को लेकर भगवान शिव के निवास स्थान के लिए उड़ान भरेगा.
देना होगा फिटनेस प्रमाण पत्र
कंपनी ने श्रद्धालुओं को बैठाकर इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया है. इस यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को अपना फिटनेस प्रमाण पत्र भी कंपनी को देना होगा. पहले नैनी सैनी एयरपोर्ट से आदि कैलाश और ओम पर्वत का प्रति श्रद्धालु कुल किराया 66 हजार रुपये तय किया गया था, जिसमें सरकार की तरफ से 26 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में कंपनी को दिए जाने थे.
46 हजार रुपये होगा किराए
यानि एक व्यक्ति का कुल किराया 40 हजार रुपये तय किया गया था, लेकिन अब सरकार और कंपनी की नए पॉलिसी के अनुसार यह किराया 72 हजार रुपये प्रति श्रद्धालु कर दिया गया है. इसमें भी सरकार की तरफ से 26 हजार सब्सिडी देगी, जिसके बाद प्रति व्यक्ति किराया अब 46 हजार रुपये होगा.
बेल पत्र के पेड़ के नीच इन मंत्रों का जप प्रदान करता है धन और समृद्धि
जन्म कुंडली के षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में चंद्रमा की उपस्थिति व्यक्ति को अतिविचारशीलता, संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता प्रदान करके भावुक व स्वप्नदृष्टा बनाती है। लेकिन अत्यधिक संवेदनशीलता व अति भावुक होने से इनका व्यक्तित्व एकतरफा, रूखा व नाटकीय होकर इनके लाभ और सफलता पर कई बार उद्यम के अभाव में प्रभावित करता है और इनके जीवन पर नकारात्मक असर डालता है। इन्हें धन के जोखिम से बचाना चाहिए तथा सट्टे या फ़्यूचर ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होगी।
इसे भी आजमाइए
अगर घर में बार-बार वाद-विवाद रहता हो तो पूरे घर में घी से भीगे कपूर को प्रज्ज्वलित कर पूरे घर में दिखाएं। क्लेश के उन्मूलन में राहत मिलेगी, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।
बात पते की
केतु यदि कुंडली के सप्तम भाव में आसीन हो तो अर्थ लाभ देता है। इन व्यक्तियों को जीवन में स्थिर रूप से उत्तम सुख मिलता है। इन्हें शत्रुओं और विरोधियों पर विजय हासिल होती है। ये वर्ष की आयु के बाद अपार मान-प्रतिष्ठा के भागी है। घमण्ड और झूठे वादों से ये मुसीबत में फँसते हैं। कई बार ये भ्रमित नज़र आते हैं।कभी कभी सही को ग़लत समझ बैठते हैं। इन्हें अपनों पर बार बार संदेह होता रहता है। किसी करीबी व्यक्ति के कारण इन्हें मानहानि का सामना करना पड़ता है। मित्रों से इन्हें पीड़ा मिलती है। दाम्पत्य सुख में कमी होती है। धन आने पर ये मुक्त हस्त से खर्च करते हैं, जिससे भविष्य में अर्थ कष्ट का उदय होता है। पैतृक संपत्ति का सुख इनको नहीं मिलता। शत्रुओं का भय रहता है।सरकार से इन्हें तनाव प्राप्त होता है। अधूरा ज्ञान इन्हें झमेले में फंसाता है। विरोधियों की साज़िश इनको पीड़ा पहुंचाती है।शरीर के मध्य भाग में चोट चपेट से कष्ट होता है। यह केतु अधीर, कायर, ईर्ष्यालु और अभिमानी बनाता है। जीवन के अंतिम कुछ वर्षों में इनके भीतर आध्यात्मिकता बोध प्रस्फुटित होने लगता है। इनके पैरों में कमज़ोरी आ जाती है। इनको नाना और मामा से मिलने वाले स्नेह पर नकारात्मक असर पड़ता है।
अयोध्या धाम दर्शन के लिए महासमुंद जिले से 158 तीर्थयात्रियों का जत्था 25 नवंबर को होगा रवाना
महासमुंद। राज्य सरकार द्वारा संचालित श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले से चयनित 158 तीर्थयात्रियों का जत्था रवाना होगा। यह योजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और नागरिकों को भगवान श्रीराम के पवित्र धाम अयोध्या के दर्शन कराने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है। जिला नोडल अधिकारी के अनुसार, चयनित तीर्थयात्रियों में 88 ग्रामीण क्षेत्रों और 65 नगरीय निकायों से हैं। इनके साथ 5 एस्कॉट अधिकारी भी यात्रा का हिस्सा होंगे।
यह यात्रा न केवल धार्मिक अनुभव प्रदान करेगी, बल्कि अयोध्या की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को भी समझने का अवसर देगी। चयनित यात्रियों का यह समूह 25 नवंबर 2024 को अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगा। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने यात्रा की सफलतापूर्वक योजना और संचालन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें यात्रा के दौरान उनकी स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने की उचित व्यवस्था शामिल है। विदित हो कि श्री रामलला दर्शन योजना राज्य सरकार का एक अभिनव प्रयास है, जिसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देकर नागरिकों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। यह यात्रा भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम है।
Maha Kumbh Prayagraj 2025: शब्दों में नहीं बांधी जा सकती है, तीर्थों के राजा प्रयागराज की महिमा,
प्रयाग में त्रिधाराओं का संगम है, ये त्रिधाराऐं गंगा, यमुना और सरस्वती की हैं। यहां पर सरस्वती अकाररूप में हैं, यमुना उकाररूप में हैं और गंगा मकाररूप में है, इसी प्रकार प्रयाग संगम प्रणव ओंकार का साक्षात स्वरूप है। इस रूप में तीर्थों का राजा प्रयाग शब्द ब्रह्म ओंकार का प्रतीक और आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक सम्पदाओं का सिद्ध केन्द्र है। जैसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेव का योगदान सृष्टि के सृजन, पालन और संहार में हैं, उसी प्रकार त्रिधाराओं का मिलन त्रित्व को अपने में समाए हुए है। आज के इस डिजिटल युग में जहां लोग प्रायः शरद ऋतु की ठंडक में घर से निकलना पसंद नहीं करते हैं, वहीं प्राचीन परम्परा का निर्वाह करते हुए असंख्य लोग देश-विदेश से संगम तट पर एकत्र होकर रेती पर कुटिया बनाकर
एक माह पर्यन्त कल्पवास कर पुण्यार्जन करते हैं।
त्रिवेणी की इस त्रिविध सम्पदा को महाकुम्भ के अवसर पर प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न अंचलों से लोग यहां आते हैं। विदेशों से भी श्रद्धालु कुम्भ के अमृत पान की अभिलाषा से यहां उपस्थित होते हैं। त्रिवेणी संगम केवल जलधारा का मिलन नहीं, बल्कि आस्था, मोक्ष, और ऊर्जा का प्रतीक है। यहां डुबकी लगाना केवल शारीरिक शुद्धि नहीं, बल्कि आत्मिक मुक्ति का मार्ग है। पौराणिक मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने यहां यज्ञ किया था, जिससे इसे तीर्थराज की उपाधि मिली। यह वह भूमि है जहां वेदों और पुराणों की ऋचाएं गूंजती हैं।
महाकुंभ केवल मेला नहीं, यह विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है। साधु-संतों का समागम, मंत्रोच्चार, यज्ञ और गंगा, यमुना की गूंजती धारा इसे अद्वितीय बनाती हैं। प्रयागराज आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जहां की रेती का प्रत्येक कण श्रद्धा और विश्वास से भरपूर है। माघ मास में महाकुम्भ के दौरान यज्ञ, अनुष्ठान, प्रवचन आदि अनेकानेक गतिविधियों के कारण प्रयागराज की वायु में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा व्याप्त हो जाती है, जो प्रत्येक व्यक्ति को आत्मिक शांति और मन को स्थिरता प्रदान करती है।
जब अनिष्ट ग्रह पड़ जाएं पीछे, तो याद करें भैरव बाबा को क्योंकि काल भी डरता है भैरव बाबा से
भैरव उपासना करने से अशुभ ग्रह राहु, केतु, शनि की पीड़ा से शीघ्र-अतिशीघ्र मुक्ति मिलती है। जिन राशि वालों को शनि पीड़ा दे रहे हैं, उन्हें तथा जिन राशि का गोचर में राहु अशुभ स्थान पर आ रहा हो, उन्हें भैरव जी की उपासना करने से नहीं चूकना चाहिए। भैरव जी को भगवान शिव का रूप माना जाता है, भैरव जी कई रूप में प्रसिद्ध हैं, जिसमें बटुक भैरव, चण्ड भैरव, काल भैरव, कपाल भैरव इत्यादि प्रमुख हैं।
भैरवजी के संबंध में कई कथाओं का विवरण विभिन्न पुराणों में प्राप्त होता है। इस कथा से तो सभी परिचित होंगे कि जब भगवान शिव सती का निर्जीव देह अपने कंधे पर रखकर ब्रह्माण्ड का चक्कर लगा रहे थे तो भगवान श्रीहरि विष्णु के सुदर्शन द्वारा सती के विभिन्न अंग कटकर पृथ्वी पर जगह-जगह गिरे, उन स्थलों पर भगवान शिव ने साधना की और उन शक्तिपीठों की सुरक्षा के लिए गण के रूप में एक-एक भैरव को स्थित किया। इस प्रकार 108 शक्तिपीठों का सृजन हुआ और मान्यता अनुसार शंकरजी भैरव रूप में प्रत्येक शक्तिपीठ पर भिन्न नामों से निवास करने लगे, इसलिए भैरव जी को देवी का द्वारपाल और रक्षक भी कहा जाता है।
भैरवजी से काल भी सहमा-सहमा रहता है इसलिए इन्हें 'काल भैरव' भी कहा जाता है। काल भैरव की शरण में जाने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। कहते हैं, भैरवजी का सच्चा भक्त होने पर उसके पाप कर्मों का भोग काल भैरव सोटे से पीटकर समाप्त करते हैं। इस पीटन-क्रीड़ा को 'भैरव-यातना' कहा जाता है। चिरकाल तक नरक भोगे जाने का कष्ट इस यातना द्वारा कुछ ही क्षणों में निपट जाता है। कालभैरव सदा धर्मसाधक, शांत, तितिक्षु तथा सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने वाले प्राणी की काल से रक्षा करते हैं। भैरवजी का व्रत संकटों से बचाता है, शत्रुओं का नाश करता है।
मुख्यमंत्री ने की मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को दंतेवाड़ा में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय और परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मण्डावी तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
अगर आपके घर या आस-पास अचानक उग जाए Bel Patra का पौधा,तो जाने क्या है इसका इशारा…
हिंदु धर्म में Bel Patra का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है. यह आदि-अनंत काल से हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है. बेलपत्र भगवान शिव को अतिप्रिय होता है और उनको अर्पित किया जाता है. खासकर सोमवार के दिन, महाशिवरात्रि में, सावन के महीने में इसका विशेष महत्व होता है. Bel Patra का पौधा अगर आपके घर के आस-पास या द्वार पर उग आए तो इसे बहुत शुभ माना गया है.
आज इस आर्टिकल में जानते हैं कि कैसे यह शुभ है. इससे कौन से सकारात्मक संकेत मिले हैं और यह संकेतों का प्रतीक है.
नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा करता है Bel Patra
Bel Patra से आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है, इतना ही नहीं इससे नकारात्मकता को दूर भागती है. यानी की इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. अगर, बेलपत्र का पौधा घर के प्रवेश द्वार पर उगता आता है, तो इससे शांति और घर का वातावरण संतुलित, सौहाद्रमय होता है. परिवार किसी भी प्रकार की विपत्ति से सुरक्षित रहता है.
शुगर कंट्रोल में मददगार Bel Patra
हर पौधे में कुछ न कुछ औषधिगुण होते हैं, मगर Bel Patra की बात अलग है. यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है. मौजूदा समय में लोग इसे खा रहे हैं. बताया यह जा रहा है कि इससे शुगर कंट्रोल रहती है.
समृद्धि का प्रतीक
अगर, बेलपत्र का पौधा घर के आंगन, या प्रवेश द्वार पर उग रहा है तो यह सुख, समृद्धि और उन्नति के शुभ संकेत हैं. यह पौधा इन सबका प्रतीक है.
भगवान शिव का आशीर्वाद
Bel Patra को धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. इसे पवित्र माना गया है, इसलिए यह भगवान शिव को अर्पित किया जाता है. इसकी उपस्थिति भोलेनाथ का आशीर्वाद है. इसलिए मान्यता है कि हर सोमवार को भगवान शिव को एक Bel Patra चढ़ाना चाहिए. इससे उनकी कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है. साथ ही व्यक्ति कामयाब होता है. जीवन में कभी भी निराशा नहीं आती है. वास्तुशास्त्र में भी बेलपत्र को शुभ माना गया है. क्योंकि यह पौधा ऊर्जा संतुलित करता है. यह पौधा सभी वास्तु दोष को निवारण है.
Lakshmi Narayan Temple : लक्ष्मी नारायण का 400 वर्षों से अधिक पुराना मंदिर, इस मंदिर के रहस्य कर देंगे हैरान
जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर सोनो प्रखंड के माहेश्वरी पंचायत के महेश्वरी गांव स्थित बाबा लक्ष्मी नारायण मंदिर अपने स्थापना काल से लेकर आज तक यानी 400 वर्षों से भी अधिक समय से असीम आस्था का केंद्र बना हुआ है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां भव्य तरीके से पूजा अर्चना करके बाबा लक्ष्मी नारायण का वार्षिकोत्सव मनाया जाता है, जिसे अहोरात्रि भी कहा जाता है। इस दिन यहां लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना और दर्शन के लिए बिहार, झारखंड,उत्तर प्रदेश, बंगाल समेत आधा दर्जन से अधिक राज्य के श्रद्धालुओं का भारी तादाद में जमावड़ा लगता है। यहां लाखों लोगों की भीड़ जमा होती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं द्वारा इच्छित मनोकामना की पूर्ति होने और किसी मनोकामना को लेकर या अपने परिजनों की सुख समृद्धि को लेकर चावल, गुड़, घी और दही के मिश्रण से तैयार किया हुआ गुलगुला, पुआ तथा तुलसी का पत्ता नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता है। इस दिन सूर्योदय के पूर्व महिलाओं द्वारा चूल्हे पर रसोई में भोजन तैयार किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही मंदिर परिसर के काफी ऊंचा ध्वज गाड़ा जाता है और इस ध्वज को 24 घंटा के बाद ही उखाड़ा जाता है। ध्वज उखाड़े जाने के बाद लोगों के घरों में चूल्हा पर फिर से भोजन पकता है।
पुजारी चंद्रकांत पांडे, महेश पांडे,शिशुपाल पांडे, शंकर पांडे, पूर्व मुखिया अजय सिंह समेत दर्जनों स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थल पर आज से 400 वर्ष पूर्व काफी घना जंगल था और एक ऋषि मुनि यहां वास करके तपस्या करते थे। वह कंदमूल खाकर प्रत्येक दिन अपना जीवनयापन करते थे। उनके सिर में बड़ी-बड़ी जटाएं थी और वह इस जटा में भगवान शालिग्राम को रखते थे। वह ऋषि कलोथरा नदी में स्नान करने के दौरान अपनी जटा से प्रत्येक दिन भगवान शालिग्राम को निकालकर और स्नान कराकर नदी के किनारे स्थित पेड़ से पत्ता तोड़कर उस पर रख देते थे।
वह स्नान से निवृत होने के बाद फिर से भगवान शालिग्राम को अपनी जटा में बांध लेते थे। तप करने के दौरान ही उनकी मुलाकात स्थानीय ग्रामीण राम सिंह और राम पांडे से हई। इन दोनों ने ऋषि की भरपूर सेवा की।काफी लंबे अर्से तक वास करने के बाद वह ऋषि जब दूसरी जगह जाने लगे तो उन्होंने राम सिंह और राम पांडे को कोई वर मांगने को कहा।जिस पर इन दोनों ने कहा कि हे महर्षि आपकी जटा में जो शालिग्राम पत्थर है वह आप हमें दे दीजिए। तब ऋषि ने कहा कि यह शालिग्राम पत्थर नहीं है बल्कि स्वयं भगवान लक्ष्मी नारायण हैं और आप लोग सही तरीके से इनकी पूजा अर्चना नहीं कर पाओगे। लेकिन वे दोनों शालिग्राम पत्थर लेने की जिद पर अड़ गए। तत्पश्चात ऋषि ने उन दोनों को नियमपूर्वक भगवान लक्ष्मी नारायण सौंपकर और पूजा की सारी विधि बताकर दूसरी जगह चले गए।
इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने ऋषि की कुटिया के समीप ही पूरे विधि विधान से एक झोपड़ीनुमा मंदिर बनाकर लक्ष्मी नारायण की स्थापना करके पूजा अर्चना प्रारंभ किया।धीरे धीरे ग्रामीणों ने जन सहयोग से पक्का मंदिर का निर्माण किया,जहां आज भी पूजा अर्चना हो रही है।स्थापना काल से लेकर आज तक बाबा लक्ष्मी नारायण और उनका मंदिर आसपास सहित दूर दराज के लोगों को भी असीम श्रद्धा,भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
Shani Margi 2024: इन राशियों के लिए भाग्योदय कारक होने वाला है शनि का मार्गी होना
वर्तमान में शनि अपनी वक्र गति से चल रहे हैं, 15 नवम्बर को शनि वक्री से मार्गी हो जाऐंगे। 15 नवम्बर 2024 से शनि अपनी वक्री चाल का त्याग कर मार्गी हो रहे हैं, जिसके कारण 16 नवम्बर से लोगों को अपने जीवन में परिवर्तन दिखाई देगा। जिनकी जन्मपत्री में शनि महत्वपूर्ण भूमिका में है, अथवा गोचर से अनुकूल हैं, उन्हें शनि कृपा प्राप्त होगी, जिनके लिए शनि प्रतिकूल हैं, उन्हें शनि का उपाय अवश्य करना चाहिए।
इन राशियों के लिए भाग्योदय कारक है शनि मार्गी 2024 (Shani Margi 2024) - शनि का मार्गी होना, कुछ राशियों के लिए भाग्योदय कारक है, जिसमें सबसे ज्यादा लाभ मेष राशि को मिलने वाला है क्योंकि गोचर में मेष राशि से 11वीं कुम्भ राशि में स्थित शनि मार्गी अवस्था में तीव्र गति से इस राशि के जातकों का कल्याण करेंगे। गोचर ज्योतिष के अनुसार 29 मार्च 2025 के अंदर मेष राशि को सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है। मेष राशि वालों के प्रमोशन की प्रबल सम्भावनाऐं बन रही हैं, उनका रुका हुआ कार्य पूरा होने वाला है, नया वाहन अथवा नया मकान खरीदने का प्रबल योग जन्मपत्री में चतुर्थ भाव के अनुसार बन सकता है।
मेष राशि वालों के लिए नववर्ष 2025 के प्रथम तीन महीने उनके जीवन में विशेष खुशियां लेकर आने वाले हैं, गौरतलब है कि विगत कुछ समय से वक्री होने के कारण मेष राशि वाले विविध प्रकार के लाभों से वंचित थे, सफलता हाथ आते-आते निकल जा रही थी, लेकिन अब शनि के मार्गी होने से मेष राशि वालों का भाग्योदय होने से कोई नहीं रोक सकता है। अगर आपकी जन्मपत्री में अन्य ग्रह योग बने हुए हैं तो गोचर का शनि आपके लिए फायदेमंद है। मेष राशि के साथ-साथ धनु राशि तथा कन्या राशि वालों के लिए भी शनि का मार्गी होना अत्यंत शुभ है, धनु राशि वालों के लिए शनिदेव पराक्रम में वृद्धि कराएंगे, कन्या राशि वालों को स्वास्थ्य सुख एवं उनके शत्रुओं का नाश कर सुख सुविधा प्रदान करेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा पर गौरी समेत धन योग का दुर्लभ संयोग, मेष, तुला समेत इन 6 राशियों का नए साल 2025 तक मिलेंगे कई लाभ
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 15 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा और पुराणों में इस दिन को स्नान, जप-तप, व्रत की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार गजब के संयोग बन रहे हैं, जिसका फायदा कई राशियों को नए साल यानी साल 2025 तक मिलेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रमा मेष राशि में होकर मंगल के साथ राशि परिवर्तन योग बनाएंगे, साथ ही मंगल और चंद्रमा के एक दूसरे से चतुर्थ दशम होने से धन योग भी बनेगा। इसके साथ ही चंद्रमा और गुरु के एक दूसरे से द्विद्वाश योग होने से सुनफा योग भी बनेगा। वहीं शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि में विराजमान हैं इसलिए इस दिन शश राजयोग भी बन रहा है, जो फिर 30 साल के बाद ही बनेगा। कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहे शुभ योग का दुर्लभ संयोग कई राशियों के लिए नए साल तक धन, सुख और सौभाग्य में वृद्धि दायक रहेगा और परिवार में सुख-शांति और प्रतिष्ठा बनी रहेगी। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहे शुभ योग का फायदा किन किन राशि वालों को मिलेगा
कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहे शुभ योग से मेष राशि वालों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। इस राशि के जो लोग किराए के घर पर रहते हैं, उनका खुद का घर लेने का सपना पूरा हो सकता है। शुभ योग के दुर्लभ संयोग से जीवन में चल रही समस्याओं से मुक्ति मिलेगी और धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। इस दौरान परिवार में कोई शुभ व मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। शुभ योग के प्रताप से मेष राशि वालों की इस दौरान कई इच्छाएं पूरी होंगी और धर्म कर्म के कार्यों में मन लगेगा।
श्री रामलला सरकार का दिव्य श्रृंगार,
12 November. अयोध्या में विराजमान संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी प्रभु श्री रामलला का श्रृंगार प्रतिदिन भव्य रूप में होता है. रोजाना भगवान श्री राम भक्तों को अलग-अलग रूप में दर्शन देते हैं. उनकी फूलों की माला भी दिल्ली से मंगाई जाती है.
रामलला की पहली आरती सुबह 6.30 बजे होती है. रामलला को जगाने से पूजन शुरू होता है. इसके बाद उन्हें लेप लगाने, स्नान करवाने से लेकर वस्त्र पहनाया जाता है.
हर दिन और मौसम के हिसाब से अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं. गर्मियों में सूती और हल्के वस्त्र तो जाड़े में स्वेटर और ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं.
दोपहर 12 बजे भोग आरती होती है और साढ़े सात बजे संध्या आरती होती है. इसके बाद रामलला को 8.30 बजे शयन करवाया जाता है. रामलला के दर्शन 7.30 बजे तक ही किए जा सकते हैं.
रामलला को चार समय भोग लगता है. रामलला को हर दिन और समय के हिसाब से अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं. ये व्यंजन राम मंदिर की रसोई में बनते हैं. सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है.
इसी कड़ी में कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि विक्रम संवत् 2081 (12 नवंबर, मंगलवार) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम में ब्रह्मांड नायक श्री रामलला सरकार की शुभ अलौकिक श्रृंगार हुआ.
शनिवार 9 नवंबर से लग रहा मृत्यु पंचक, जानें इस दिन क्या ना करें और शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को अशुभ समय माना गया है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। पंचक काल को अशुभ और हानिकारक नक्षत्रों का योग माना गया है और जब पंचक शनिवार के दिन से शुरू होता है तो उसको मृत्यु पंचक के नाम से जाना जाता है। इस बार शनिवार 9 नवंबर से पंचक शुरू हो रहे हैं और 13 नवंबर दिन बुधवार तक रहेंगे। साथ ही शनिवार को भद्रा का साया भी रहने वाला है। ऐसे में शनि की महादशा और शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय भी कर सकते हैं।
पंचक काल पांच दिन का होता है, दरअसल चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन तक रहते हैं और जब वह कुंभ और मीन राशि में संचार करते हैं तो यह ढाई ढाई दिन मिलकर पांच दिन के हो जाते हैं। इस दौरान पांच दिनों में धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र होते हैं, इनको अशुभ नक्षत्र माना जाता है। इन पांच नक्षत्रों का समूह से बनने वाला योग पंचक कहलाता है।
शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला पंचक मृत्यु के बराबर जीवन में परेशानी दिलाता है इसलिए इन पांच दिनों में कोई भी अशुभ व जोखिम भरे कार्य करने से बचना चाहिए। इस अशुभ काल की चपेट में आने से दुर्घटना, चोट, विवाद, कानूनी मामले आदि होने का खतरा बना रहता है।