राजिम कुंभ (कल्प) 2026 : पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं को दिया आमंत्रण
1 से 15 फरवरी तक संगम नगरी राजिम बनेगी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
आइए, आस्था की डुबकी लगाइए, संस्कृति से जुड़िए और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कीजिए।
रायपुर, 31 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ की पावन धरती एक बार फिर आस्था और अध्यात्म के महासंगम का साक्षी बनने जा रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों सहित देशभर के श्रद्धालुओं को राजिम कुंभ (कल्प) में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। उन्होने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के साथ राजिम पहुँचकर इस दिव्य महापर्व के साक्षी बनें।
यह दिव्य एवं भव्य आयोजन 1 फरवरी से 15 फरवरी (माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि) तक आयोजित होगा। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित राजिम, छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है, जिसे “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” भी कहा जाता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहाँ संतों, महात्माओं, नागा सन्यासियों और लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होगा।
“आस्था, संस्कृति और समरसता का संगम”
राजिम कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है। श्रद्धालु यहाँ संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं, संतों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा आध्यात्मिक प्रवचनों से जीवन को नई दिशा देते हैं। राजिम का त्रिवेणी संगम प्राचीन काल से साधना और तपस्थली रहा है। यहाँ स्थित राजीव लोचन मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाते हैं। मान्यता है कि संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। राजिम कुंभ (कल्प) का भव्य समापन 15 फरवरी, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा।
इस बार आयोजन का मुख्य संदेश भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देना है। राजिम कुंभ के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए जा रहे है।



















छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई महतारी वंदन योजना ने दो साल पूरे कर लिए हैं। आज यह योजना सिर्फ हर महीने मिलने वाली राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए आत्मसम्मान, भरोसे और आत्मनिर्भरता का आधार बन चुकी है। योजना की शुरुआत 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथों पहली किस्त जारी होने के साथ हुई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इसे पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ लागू किया, ताकि लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंचे।मुख्यमंत्री ने 30 जनवरी को नारायणपुर जिले से महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी की। इस दौरान 68 लाख 47 हजार 355 महिलाओं के बैंक खातों में 641 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर की गई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील एवं दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों के सामाजिक पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और मुख्यधारा में प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना आज जमीनी स्तर पर बदलाव की मजबूत मिसाल बन रही है।











