छत्तीसगढ़ / रायपुर
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 : डिजिटल साहित्य:प्रकाशकों के लिए चुनौती पर सार्थक विमर्श
साहित्य के लिए डिजिटल माध्यम चुनौती नहीं, बल्कि अवसर
रायपुर, 23 जनवरी 2026
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित सत्रों की श्रृंखला में अनिरुद्ध नीरव मंडप में एक विचारोत्तेजक चर्चा सत्र संपन्न हुआ। “डिजिटल साहित्य : प्रकाशकों के लिए चुनौती” विषय पर केंद्रित इस सत्र में डिजिटल युग में साहित्य प्रकाशन की बदलती प्रकृति, संभावनाओं और चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया गया।
सत्र में प्रभात प्रकाशन, दिल्ली के प्रतिनिधि श्री प्रभात कुमार ने डिजिटल माध्यमों के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ई-बुक्स, ऑडियो बुक्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के नए अवसर प्रदान किए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल परिवर्तन के चलते पारंपरिक प्रकाशन मॉडल को नई प्रतिस्पर्धा और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सत्र के सूत्रधार डॉ. सुधीर शर्मा वैभव प्रकाशन, रायपुर ने डिजिटल तकनीक, कॉपीराइट संरक्षण, पाठकों की बदलती रुचियों और साहित्यिक गुणवत्ता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर संवाद को आगे बढ़ाया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल माध्यम को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में अपनाकर नवाचार के जरिए साहित्य प्रकाशन को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से त्रिवेणी देवांगन को बिजली बिल से मिली राहत
रायपुर, 23 जनवरी 2026
प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव ला रही है। यह योजना जहां एक ओर लोगों को बढ़ते बिजली खर्च से राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ, सस्ती और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा के विजन के अनुरूप यह योजना तेजी से जमीन पर असर दिखा रही है, और कोंडागांव जिला प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर उर्जा के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी है।
कोण्डागांव नगर के गांधी वार्ड की निवासी श्रीमती त्रिवेणी देवांगन और उनका परिवार इस बदलाव का जीवंत उदाहरण हैं। श्रीमती त्रिवेणी देवांगन के पति श्री ज्ञानेश देवांगन को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी विद्युत विभाग के माध्यम से प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि विकास नगर स्थित सामुदायिक भवन में योजना को लेकर आयोजित एक कार्यशाला में उन्होंने भाग लिया था। इस कार्यशाला में अधिकारियों द्वारा सोलर रूफ टॉप प्लांट की प्रक्रिया, विभिन्न किलोवाट क्षमता, सब्सिडी की व्यवस्था और ग्रिड से जुड़ाव की पूरी जानकारी सरल शब्दों में दी गई। सभी पहलुओं को समझने के बाद उन्होंने योजना का लाभ लेने का निर्णय किया।
कार्यशाला के दौरान मिली जानकारी के आधार पर श्री ज्ञानेश देवांगन ने अपने घर के लिए 3 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का चयन किया। योजना के तहत दिसंबर 2025 में उनके घर की छत पर रूफ टॉप सोलर प्लांट स्थापित किया गया। उन्होंने बताया कि सोलर प्लांट लगने से पहले उनके घर की प्रतिदिन की बिजली खपत लगभग 12 यूनिट थी, जिसके कारण हर महीने करीब तीन हजार रुपये तक का बिजली बिल आ जाता था। यह खर्च परिवार के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बन रहा था।
रूफ टॉप सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब सौर ऊर्जा से घर की जरूरतें पूरी हो रही हैं और बिजली बिल में बड़ी राहत मिली है। श्री ज्ञानेश देवांगन बताते हैं कि सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली का पूरा उपयोग घर में नहीं हो पाता, इसलिए बची हुई बिजली को ग्रिड के माध्यम से विद्युत विभाग को भेज दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त आय का लाभ भी मिल रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त 78 हजार रुपये की सब्सिडी मात्र 15 दिनों के भीतर उनके खाते में प्राप्त हो गई, जबकि राज्य सरकार की सब्सिडी अभी प्रक्रियाधीन है। इस त्वरित सहायता से योजना के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का विजन है कि छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए और हर घर तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित हो। राज्य सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, आम नागरिकों को जागरूक करने और योजनाओं का लाभ सरलता से उपलब्ध कराने के प्रयास इसी दिशा में किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना मुख्यमंत्री के इसी विजन को साकार करने में एक मजबूत कड़ी बन रही है।
अम्बेडकर अस्पताल में सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक सुविधा शुरू
हृदय, मस्तिष्क, पेट, फेफड़े व अन्य अंगों की सटीक जांच
रायपुर, 23 जनवरी 2026

पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में अब सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक जांच सुविधा शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी, ब्रेन (सेरेब्रल), एब्डोमिनल, पेरिफेरल एवं पल्मोनरी एंजियोग्राफी जांच की जा रही है, जो नॉन इंवेसिव (Non-invasive) पद्धति पर आधारित है। विगत सप्ताह 29 मरीजों की विभिन्न बीमारियों में सीटी एंजियो जाँच हुई जिससे समय रहते उन्हें उचित उपचार मिला।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और दूरदराज़ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस सुविधा के प्रारंभ होने से हृदय, मस्तिष्क, पेट, हाथ-पैर एवं फेफड़ों से संबंधित गंभीर रोगों के शीघ्र, सटीक एवं विश्वसनीय निदान में मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले मरीजों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों के लिए सभी जांचें निःशुल्क हैं। वहीं एपीएल श्रेणी के मरीजों के लिए ओपीडी में सीटी स्कैन ₹1000 एवं एमआरआई ₹2000 की दर से उपलब्ध है, जबकि भर्ती एपीएल मरीजों को ये जांच सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं।
रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक पात्रे ने बताया कि विभाग में उपलब्ध आधुनिक सीटी स्कैन मशीन एवं प्रेशर इंजेक्टर की सहायता से सभी जांच सेवाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सीटी एंजियोग्राफी की प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है, मरीज को असुविधा नहीं होती। इसमें पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में रिकवरी टाइम भी कम होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी में कैथेटराइजेशन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक जांच है।
सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी के माध्यम से हृदय की कोरोनरी धमनियों में होने वाले संकुचन एवं ब्लॉकेज का उच्च गुणवत्ता की विस्तृत (Detailed) 3D इमेजिंग के साथ आकलन किया जाता है। वहीं ब्रेन एंजियोग्राफी से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों जैसे स्ट्रोक, एन्यूरिज्म एवं धमनी-शिरापरक विकृति (एवीएम) की सटीक जांच संभव हो पाती है। इस जांच में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जांच के बाद सामान्य दिनचर्या में शीघ्र लौट सकता है।
उल्लेखनीय है कि सीटी एंजियोग्राफी एक आधुनिक जांच पद्धति है, जिसमें आयोडीन-आधारित कंट्रास्ट डाई की सहायता से शरीर की रक्त वाहिकाओं की स्पष्ट त्रि-आयामी (3D) तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। पूरी जांच प्रक्रिया सामान्यतः 15 से 20 मिनट में पूर्ण हो जाती है।
रायपुर साहित्य उत्सव में ओपन माइक से नवीन प्रतिभाओं को मिला सशक्त मंच: पहले दिन चार सत्रों में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे जी को समर्पित रहा ओपन माइक का मंच*
रायपुर, 23 जनवरी 2026
रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे जी को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य श्री देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क श्रीमती इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।
रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से की सौजन्य भेंट
रायपुर, 23 जनवरी 2026

रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था, शहरी सुरक्षा की चुनौतियों तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन एवं प्रशासनिक समन्वय को प्रभावी बनाने जैसे बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया।
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि राजधानी रायपुर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। नवनियुक्त कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने राजधानी की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की।
गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव का आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
राष्ट्र निर्माण की बुनियाद में साहित्य की सदैव रही है निर्णायक भूमिका: मुख्यमंत्री श्री साय
साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम : उप सभापति श्री हरिवंश
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का हुआ भव्य शुभारंभ: देशभर के 120 साहित्यकार, 42 सत्रों में करेंगे विचार-विमर्श
रायपुर 23 जनवरी 2026

राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया।

उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है।
उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं।
मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया।
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।
आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 10वीं और 12वीं परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित
प्रशस्ति पत्र और डेढ़-डेढ़ लाख की सम्मान राशि से 239 विद्यार्थी सम्मानित
रायपुर, 23 जनवरी 2026

राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। ये 2024 एवं 2025 के टॉप 10 मेधावी और विशेष पिछडी जनजाति के टॉप 01 विद्यार्थी है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित इस प्रतिभा सम्मान समारोह में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाएं हमारे जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रथम सीढ़ी है। आपने एक पड़ाव पार किया है अब अगले पड़ाव की ओर जा रहे है। जहां एक ओर इस सफलता की प्रेरणा आपको नवीन ऊर्जा के साथ प्रगति का रास्ता प्रशस्त करती है और वहीं यह सम्मान अन्य विद्यार्थियों को मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपार संभावनाओं का प्रदेश है। ‘‘धान का कटोरा‘‘ कहा जाने वाला हमारा राज्य अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति बहुत उन्नत है। हमें अपने राज्य की सनातन संस्कृति पर गर्व का भाव होना चाहिए।
श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थी आईआईटी, नीट की परीक्षा देकर इंजीनियरिंग और मेडिकल मे जाना चाहते है लेकिन सभी को सफलता नहीं मिलती है। इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं हैं। नए-नए विषय है जहां आप कैरियर की ऊची उड़ान भर सकते है। धैर्य के साथ आगे बढ़े। गिरना बडी बात नहीं है गिर कर खड़े होना महत्वपूर्ण है। सपना बड़ा होना चाहिए। सपनें को पूरा करने के लिए साधना और अभ्यास करना होता है। उन्होंने मौलिकता और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चें शिक्षा में आगे बढ़ रहे है, यह बहुत सराहनीय है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी हमारे देश एवं प्रदेश के भविष्य हो। आप लोगों के कंधे पर देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आज जो सफलता आप सभी छात्रों को मिली है निश्चित ही इस सफलता के पीछे आपके शिक्षक गुरुओं एवं माता पिता के आशीर्वाद है। उनके आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन और बसंत पंचमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा हम सब पर सदैव मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहें।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने बताया कि सत्र 2024 एवं 2025 के 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के 239 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप मेडल, प्रशस्ति पत्र और प्रत्येक विद्यार्थी को डेढ़-डेढ़ लाख की राशि सीधे उनके खाते में दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दिए इस प्रोत्साहन सेे शिक्षा के प्रति उनका रूझान बढ़ेगा और दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
कार्यक्रम में वर्ष 2024 के 110 और वर्ष 2025 के 129 टापर विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।
स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु जी. पिल्ले ने दिया एवं आभार प्रदर्शन सचिव श्रीमती पुष्पा साहू ने किया।
इस अवसर पर विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री आशाराम नेताम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
महिला पत्रकार अपने साहस से कर रहीं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत- मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री ने गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल से की मुलाकात
पहली बार छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के दल ने किया अध्ययन भ्रमण, खुशियों भरी मुस्कान के साथ जताया मुख्यमंत्री का आभार
रायपुर, 23 जनवरी 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला पत्रकार अपने साहस से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर रही हैं। मैं उन सभी महिलाओं के साहस को नमन करता हूं जो पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में रह कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रही हैं।
मुख्यमंत्री को महिला पत्रकारों के दल ने गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर पहली बार छत्तीसगढ़ से महिला पत्रकारों के दल को अन्य राज्य के अध्ययन भ्रमण पर भेजने के लिए उनका आभार जताया। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि विगत वर्ष महिला दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष महिला पत्रकारों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजे जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्हें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री ने उन सभी की इस इच्छा को पूरा किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से चर्चा के दौरान कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के दौरान आप सभी ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट, पोरबंदर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा है। आने वाले समय में ये अनुभव आपकी कलम को और भी समृद्ध करेगा, जिसका लाभ पत्रकारिता जगत के साथ ही आपके पाठकों भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष को हम महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप संजोने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह ना सिर्फ आपके लिए इस भ्रमण को हमेशा के लिए यादगार बनाएगा बल्कि अन्य लोग भी आपकी किताब को पढ़कर गुजरात के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात एक समृद्ध और मॉडल राज्य है। गुजरात की एक खासियत यह भी है कि वहां सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अमूल सहकारिता का एक जीवंत उदाहरण है, जिसमें मुख्यतः महिलाएं शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी हम सहकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी देश के सहकारिता मंत्री भी हैं। उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के लिए बहुत कार्य हो रहा है। सहकारिता इस बात का प्रतीक है कि मिलकर करने से बड़ा काम भी आसान होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। मंत्रालय में अब ई-फाइल प्रणाली लागू है। मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों से अपनी गुजरात यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गुजरात का सीएम डैशबोर्ड देश का सबसे एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम है जिसके माध्यम से एक जगह बैठकर ही पूरे प्रदेश पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की नींव रखी थी, हम गुजरात जैसी व्यवस्थाओं को यहां भी लागू कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से महिला पत्रकारों ने गुजरात अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को साझा किया। सुश्री निशा द्विवेदी ने कहा कि इस टूर के माध्यम से उन्हें गुजरात के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से रुबरू होने का अवसर मिला। सुश्री दामिनी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके 8 वर्षों के पत्रकारिता के करियर में पहली बार है जब महिलाओं का दल अध्ययन भ्रमण पर गया है। कोरिया की सुश्री नूरजहां ने बताया कि यह पहली बार है जब महिलाओं को इस रूप में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महिला पत्रकारों को ये मौका मिलता रहेगा।
मुख्यमंत्री को महासमुंद की पत्रकार सुश्री उत्तरा विदानी ने बताया कि गुजरात विधानसभा के भ्रमण में बहुत अच्छा लगा। वहां की खास बात यह देखने को मिली कि बच्चों सहित आमजन को विधानसभा की कार्यवाही को सुगमता से देखने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग की पत्रकार सुश्री कोमल धनेसर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में 25 वर्षों में यह पहला अवसर है जब महिला पत्रकारों को ऐसा मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जब हम भ्रमण पर निकले थे तो बहुत सारे अनजाने चेहरे थे और लौटे हैं तो नए दोस्त और नई बॉन्डिंग के साथ।
रायपुर की पत्रकार सुश्री नेहा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम सभी पत्रकार अलग- अलग संस्थानों में काम करते हैं। व्यस्तता की वजह से हमारी बात नहीं हो पाती। ये टूर रूटीन से अलग एक अनुभव रहा जिसमें नये दोस्त बने। सुश्री रचना नितेश ने मुख्यमंत्री को बताया कि ये अनुभव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक खास बात ये रही कि हमारे दल में महिला पत्रकारों की 3 पीढ़ियां शामिल थीं। हमें बहुत कुछ सीखने को मिला।
बस्तर की पत्रकार सुश्री प्रियंका जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान बस्तर से है। टूर पर जाते समय नए माहौल की वजह से मन में कई आशंकाएं थीं। मगर बाद में यह अनुभव बहुत सुखद रहा। कोरबा की सुश्री राजश्री गुप्ते ने बताया कि 8 दिनों के इस टूर में ऐसा लगा कि हमने अपने बचपन को फिर से जी लिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय को महिला पत्रकारों ने बताया कि कई लोगों की यह पहली हवाई यात्रा भी थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से पत्रकारों से कहा कि जो पहली बार हवाई यात्रा करते हैं उन्हें पार्टी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री की बात सुनकर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी।
महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री श्री साय से एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात भ्रमण के दौरान उनका इंटरेक्शन कुछ फ्रेंच पर्यटकों से हुआ। यह जानने पर की महिला पत्रकार छत्तीसगढ़ से हैं, फ्रेंच पर्यटक ने कहा- ओह सीएम विष्णुदेव छत्तीसगढ़ ! ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य को विदेशी नागरिक भी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम से पहचान रहे हैं।
महिला पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया जिन्होंने आठ दिवसीय इस अध्ययन भ्रमण में उनका पूरा ख्याल रखा। इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क डॉ रवि मित्तल, अपर संचालक जनसंपर्क श्री संजीव तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित जनसंपर्क विभाग के अधिकारीगण और महिला पत्रकार उपस्थित थे।
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 : डिजिटल साहित्य:प्रकाशकों के लिए चुनौती पर सार्थक विमर्श
बलौदाबाजार में औद्योगिक हादसे पर सख्त कार्रवाई
रियल इस्पात एंड एनर्जी का किल्न क्रमांक-01 सील
संचालन व मेंटेनेंस पर प्रतिबंध
रायपुर, 23 जनवरी 2026
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत ग्राम धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. के कारखाना परिसर में घटित भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया है। दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कारखाना अधिनियम के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं मेंटेनेंस सहित समस्त कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है।
कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार 22 जनवरी 2026 को प्रातः लगभग 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट एवं गर्म ऐश की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जब कि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार द्वारा उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की गई ।इस दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा एसओपी का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।
किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे। जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए।
मुख्य कारखाना निरीक्षक सह श्रमायुक्त छत्तीसगढ़ का कहना है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
लेमनग्रास की खेती से बदल रही छोटे किसानों की किस्मत
रायपुर, 23 जनवरी 2026
लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इसमें लागत कम, मुनाफा ज़्यादा है और यह बंजर ज़मीन पर भी होती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। यह फसल कीटों और जंगली जानवरों से सुरक्षित रहती है, एक बार लगाने पर कई सालों तक पैदावार देती है l इससे निकलने वाले तेल की बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है, जिसका उपयोग साबुन, परफ्यूम, और हर्बल उत्पादों में होता है, जिससे किसानों की किस्मत बदल रही है।
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड गौरेला- पेण्ड्रा-मरवाही जिला अधिकतर वनों से घिरा हुआ क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश किसानों के पास कम खेती योग्य भूमि है। कई किसानों के पास तो एक एकड़ जमीन भी नहीं है। ऐसे किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी या बड़े शहरों में पलायन करने को मजबूर थे।
उल्लेखनीय है कि किसानों की इस स्थिति को देखते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में बोर्ड के द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के अंतर्गत लेमनग्रास की खेती को जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया है।
किसान लगभग 230 एकड़ में कर रहे हैं लेमनग्रास की खेती
बोर्ड द्वारा क्लस्टर मॉडल के माध्यम से किसानों को समूह में जोड़ा गया। लेमनग्रास की बुवाई से पहले ही किसानों का तेल क्रय करने वाले उद्योगों के साथ अनुबंध कराया गया। इन उद्योगों द्वारा बोरवेल, खेत की जुताई, पौधारोपण, फेंसिंग
तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अग्रिम वित्तीय सहायता दी गई। किसान फसल बेचने के बाद इस राशि को चरणबद्ध तरीके से वापस करते हैं साथ ही, बोर्ड द्वारा लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं और तेल निकालने के लिए आसवन संयंत्र (डिस्टिलेशन यूनिट) भी स्थापित किए गए। भविष्य में हर 50 किसानों पर एक संयंत्र स्थापित करने की योजना है। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के 4 क्लस्टरों खरड़ी, पंडरी, अमारू और हरड़ी के 123 किसान लगभग 230 एकड़ में लेमनग्रास की खेती कर रहे हैं।
एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक मिलती है फसल
गांव बहरी–जोरकी के किसान अगहन सिंह के पास केवल 35 डिसमिल (लगभग 1/3 एकड़) भूमि थी। कम जमीन होने के कारण उनकी आय सीमित थी। बोर्ड से प्रेरणा लेकर उन्होंने लेमनग्रास की खेती शुरू करने का फैसला किया। बोर्ड द्वारा उन्हें लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क प्रदान की गईं। लेमनग्रास की फसल केवल 4 महीने में तैयार हो जाती है। पहली कटाई में 4 लीटर तेल प्राप्त होता है जिसका बाजार मूल्य 1000 रुपए प्रति लीटर है जिससे कुल आय 4,000 रुपए होगी। इसी तरह दूसरी कटाई (अगले 4 महीने बाद) से 8 लीटर तेल प्राप्त होगा जिससे कुल आय 8,000 रुपये होगी। इस तरह किसान को एक वर्ष में कुल आय 12,000 रुपये और यह आय आने वाले 5 वर्षों तक लगातार मिलती रहेगी, क्योंकि एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक फसल मिलती है।
किसान लेमनग्रास की खेती से बन रहे हैं आत्मनिर्भर
अगहन सिंह जैसे कई किसान आज लेमनग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इस मॉडल की खासियत यह है कि किसान शून्य बजट में खेती शुरू कर सकते हैं और उन्हें तत्काल आय मिलनी शुरू हो जाती है।
लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान
लेमनग्रास की खेती से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार के स्थानीय अवसर, पलायन में कमी और छोटे किसानों की आर्थिक मजबूती जैसे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा- मरवाही में यह कहना बिल्कुल उचित है कि लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान बनकर उभर रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश ने की सौजन्य मुलाकात
रायपुर, 23 जनवरी 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने शॉल और प्रतीक चिन्ह नंदी भेंट कर श्री हरिवंश का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि श्री हरिवंश आज पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
IICDEM–2026 में ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ
निर्वाचन सेवाओं के लिए एकीकृत, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल मंच
रायपुर, 22 जनवरी 2026 भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन पर आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM)–2026 के अवसर पर आज ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया। यह निर्वाचन से संबंधित समस्त जानकारियों और सेवाओं के लिए आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 21 से 23 जनवरी, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
ECINET की परिकल्पना भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर की थी। इसके विकास की घोषणा मई, 2025 में की गई थी।
शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ECINET का विकास विधि के कठोर अनुपालन में किया गया है और यह 22 अनुसूचित भाषाओं तथा अंग्रेज़ी में उपलब्ध है। उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) को अपने-अपने कानूनों और भाषाओं के अनुरूप ऐसे ही डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने हेतु भारत के साथ सहयोग का आमंत्रण भी दिया।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि ECINET निर्वाचन प्रबंधन निकायों में जनविश्वास को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम है। यह अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, सभी कार्यों की निगरानी में सहायक है तथा त्वरित निर्णय एवं सूचना प्रसार को संभव बनाता है।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि IICDEM–2026 सम्मेलन विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों को प्रौद्योगिकी के उपयोग और डिजिटल नवाचारों से जुड़े वैश्विक अनुभवों से सीखने और प्रेरणा लेने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
अपनी प्रस्तुति के दौरान महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) डॉ. सीमा खन्ना ने बताया कि साइबर सुरक्षा ECINET के प्रमुख स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एक रणनीतिक सक्षमकर्ता के रूप में उभर चुकी है। ECINET पारदर्शिता, दक्षता, विश्वसनीयता तथा निर्वाचन प्रक्रिया में जनविश्वास को और अधिक मजबूत करता है।
ECINET विश्व का सबसे बड़ा निर्वाचन सेवा प्लेटफॉर्म है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सभी निर्वाचन सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक सहज डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। इसके अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक ऐप्स और पोर्टलों को एक ही मंच पर समाहित किया गया है।
यह प्लेटफॉर्म भारत के संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 एवं 1951, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 तथा निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के पूर्ण अनुपालन में विकसित किया गया है।
ECINET नागरिकों, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों तथा निर्वाचन अधिकारियों को एक साझा मंच पर जोड़ता है। इसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली खोज, Track Your Application, Know Your Candidate, निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क, Book-a-call with BLO, ई-ईपीआईसी डाउनलोड, मतदान प्रवृत्तियां, शिकायत निवारण सहित अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ECINET के बीटा संस्करण का 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों तथा विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इससे निर्वाचन आयोग को नागरिक-केंद्रित सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान करने तथा एक क्लिक पर निर्वाचन से संबंधित समस्त जानकारियां उपलब्ध कराने में सहायता मिली। अंतिम रूप दिए जाने से पूर्व नागरिकों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए थे।
बीटा संस्करण के जारी होने के बाद अब तक ECINET के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक पंजीकरण प्रपत्रों का निपटान किया जा चुका है, जो औसतन 2.7 लाख प्रपत्र प्रतिदिन है। इस प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) पंजीकृत हैं। विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 150 करोड़ से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त, ECINET जमीनी स्तर पर कार्यरत निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी के लिए भी एक सुसंगत एवं प्रभावी तंत्र प्रदान करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से इस सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री यशवंत कुमार, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री भोसकर विलास संदिपान, सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री रूपेश वर्मा तथा सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती तरुणा साहू ने सहभागिता की। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से क्रोएशिया और आयरलैंड के प्रतिनिधियों के साथ “कैंपेन फाइनेंस एवं मैनेजमेंट” विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें चुनावी व्यय प्रबंधन, पारदर्शिता तथा सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं पर उपयोगी अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।
प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने एससी-एसटी संचालनालय का किया औचक निरीक्षण
मंत्रालय से इंद्रावती भवन पैदल पहुंचकर जानी जमीनी हकीकत
होलिस्टिक एप्रोच और टीम भावना के साथ कार्य करने पर दिया जोर
रायपुर, 22 जनवरी 2026 आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज मंत्रालय से इंद्रावती भवन तक पैदल पहुंचकर एससी-एसटी संचालनालय का औचक निरीक्षण किया और विभागीय योजनाओं एवं कार्यों के संबंध में जानकारी ली। श्री बोरा ने अधिकारियों को होलिस्टिक एप्रोच (समग्र दृष्टिकोण) और टीम भावना के साथ कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के कार्यों में सहयोग से न केवल कार्यालय में सकारात्मक वातावरण बनेगा, बल्कि विजन 2047 के अनुरूप विकसित भारत के लक्ष्य में विभाग महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और उत्तरदायित्व को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसे सुनिश्चित करने के लिए विभाग में सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आधारबेस बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली का अनिवार्य रूप से पालन कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित समयावधि में जवाबदेही के साथ अपने कार्य को पूर्ण करें। उन्होंने इस दौरान कलेक्टर कॉन्फ्रेंस अनुपालन प्रतिवेदन, महिला सशक्तिकरण योजनाएं, विजन डॉक्यूमेंट 2047 का प्रेजेंटेशन तथा विभागीय प्रशासनिक प्रतिवेदन की समीक्षा की। साथ ही राज्यपाल के बजट अभिभाषण अंतर्गत योजनाओं और विभागीय बजट व्यय पर भी चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने पीएम जनमन योजना अंतर्गत एमपीसी निर्माण, धरती आबा योजना के तहत छात्रावास-कक्षा भवन निर्माण, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना तथा लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने विभागीय वेबसाइट को नियमित रूप से अपडेट करने तथा गतिविधियों, निविदाओं एवं फोटो गैलरी को अद्यतन रखने के निर्देश दिए।
बैठक में संयुक्त सचिव श्री बी.के.राजपूत, श्री अनुपम त्रिवेदी, अपर संचालक श्री संजय गौड़, श्री जितेन्द्र गुप्ता, श्री आर. एस. भोई, वित्त नियंत्रक श्री लाजरूस मिंज, कार्यपालन अभियंता श्री त्रिदीप चक्रवर्ती, अपर कलेक्टर श्रीमती बबली कुजूर, उपायुक्त श्री प्रज्ञान सेठ, श्री एल.आर. कुर्रें, श्रीमती मेनका चंद्राकर, श्री विश्वनाथ रेडडी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य सरकार उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध : मंत्री श्री दयाल दास बघेल
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पर होने वाले क्षेत्रीय सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा
रायपुर, 22 जनवरी 2026
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज राजधानी रायपुर स्थित राज्य अतिथि गृह पहुना में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विषय पर आगामी माह के 21 और 22 फरवरी को आयोजित होने वाले क्षेत्रीय सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की। खाद्य मंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए प्रस्तावित क्षेत्रीय सम्मेलन की सभी तैयारियां समयबद्ध एवं समन्वित रूप से पूर्ण करने निर्देश दिए।
मंत्री श्री बघेल ने बैठक में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, उपभोक्ता हितों की सुरक्षा तथा राज्य में उपभोक्ता आयोगों के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बैठक में बेमेतरा जिला उपभोक्ता आयोग के उद्घाटन, रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में अतिरिक्त पीठ की स्थापना, उपभोक्ता जागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार कार्यक्रमों तथा आयोगों के आधारभूत ढांचे एवं सुविधाओं के विकास की जानकारी ली।
उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पर आधारित क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन पहली बार रायपुर में किया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण सहित आठ राज्यों के उपभोक्ता आयोगों एवं उनके जिला आयोगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
बैठक में न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरड़िया, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग, श्रीमती रीना बाबासाहेब कांगले, सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, श्री श्रीनिवास तिवारी, रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग तथा श्री भगवत जायसवाल, उप सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग उपस्थित थे।
राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को राष्ट्र निर्माता और सच्चा नागरिक बनाने की सशक्त कड़ी-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा
एनएसएस से संस्कार, सेवा और नागरिकता का निर्माण — डीके कॉलेज में राज्य स्तरीय शिविर का भव्य शुभारंभ
रायपुर, 22 जनवरी 2026
दाऊ कल्याण शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलौदाबाजार में गुरुवार को 7 दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शिविर का उद्घाटन किया।
इस राज्य स्तरीय शिविर में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए छात्र-छात्राएं सहभागिता कर रहे हैं, जहां वे विविध प्रतियोगिताओं, गतिविधियों और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से नेतृत्व, अनुशासन और सामाजिक दायित्व का अनुभव प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को राष्ट्र निर्माता और सच्चा नागरिक बनाने की सशक्त कड़ी है। एनएसएस न केवल शिक्षा के साथ दायित्वबोध और कर्तव्यबोध विकसित करता है, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताएं केवल हार-जीत तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि बेहतर व्यक्तित्व और जिम्मेदार नागरिक बनने के गुण भी सिखाती हैं।मंत्री श्री वर्मा ने बताया कि वे स्वयं इस महाविद्यालय के विद्यार्थी रह चुके हैं और आज अतिथि के रूप में यहां आना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा महाविद्यालय के लिए नए भवन निर्माण हेतु 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
विधायक श्री किरण सिंह देव ने कहा कि एनएसएस छात्रों में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और अनुशासन की भावना विकसित करता है। इस शिविर के माध्यम से विभिन्न जिलों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे से सीखने और अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से शिविर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आकांक्षा जायसवाल, पूर्व विधायक श्री शिवरतन शर्मा, डॉ. सनम जांगड़े, श्री प्रमोद शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में जीवंत होगी जनजातीय वीरों की गाथा
‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम पर देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का भव्य प्रदर्शन
राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में प्रेस प्रीव्यू का आयोजन
रायपुर, 22 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली छत्तीसगढ़ की झांकी इस वर्ष देशवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को भव्य रूप में प्रस्तुत करेगी।रक्षा मंत्रालय द्वारा आज राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में आयोजित प्रेस प्रीव्यू के दौरान राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष छत्तीसगढ़ की झांकी का प्रदर्शन किया गया। झांकी के माध्यम से उन अमर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों के विरुद्ध संघर्ष किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
इन महान बलिदानियों की स्मृति में नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय स्थापित किया गया है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
विशेषज्ञ समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कलाकारों ने बीते एक माह से दिन-रात परिश्रम कर झांकी को अंतिम रूप दिया है। इस वर्ष कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है।
झांकी में उकेरे गए प्रेरणादायी दृश्य
झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है। धुर्वा समाज के इस महानायक ने अन्याय के विरुद्ध जनजातीय समाज को एकजुट किया। भूमकाल विद्रोह के प्रतीक आम की टहनियां और सूखी मिर्च झांकी में विशेष रूप से प्रदर्शित हैं। विद्रोह की व्यापकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया है। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के हित में संघर्ष किया तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति अटूट संकल्प को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।