छत्तीसगढ़ / रायपुर
उद्यानिकी प्रशिक्षण से सशक्त होंगे किसान और युवा
क्षमता विकास पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
श्री गुरू ख़ुशवंत साहेब, मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तकनीकी शिक्षा एवं रोज़गार तथा कौशल विकास विभाग की प्रेस वार्ता
146 करोड़ रू. की लागत से काशी की तर्ज पर बनेगा भव्य भोरमदेव कॉरिडोर
राज्यपाल ने क्रिसमस पर्व पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती पर किया नमन
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर को दी ऐतिहासिक सिंचाई सौगात
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बढ़ा सुविधाओं का दायरा; मेडिकल ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से सुधरी स्वास्थ्य व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी
ज्ञानपीठ सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी भावभीनी अंतिम श्रद्धांजलि
अस्पतालों में अवकाश के दिनों में भी इमरजेंसी सेवाएं रहती हैं बहाल
छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
देश और प्रदेश में खेलों को लेकर बहुत ही उत्साहजनक वातावरण
मुख्यमंत्री ने जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का किया शुभारंभ
रायपुर, 23 दिसंबर 2025


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज यहां राजधानी रायपुर के कोटा रोड स्थित स्वामी विवेकानंद एथेलेटिक स्टेडियम में आयोजित 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के शुभारंभ किया। उन्होंने 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी और खिलाड़ियों को उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह सौभाग्य है कि प्रदेश को राष्ट्रीय ट्राइबल गेम्स के आयोजन का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया के माध्यम से देश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बहुत अच्छे अवसर मिल रहे हैं। साथ ही आज पूरे देश और प्रदेश में खेल को लेकर बेहतर वातारण तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता मे शामिल है। सरकार द्वारा सभी खेलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने सभी सुविधाएं और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी खेलो इंडिया के नये परिसरों की शुरुआत की गई है, इससे खेल प्रतिभाओं को सभी जरुरी सुविधाएं मिल रही हैं। राज्य में खेल अलंकरण समारोह का आयोजन किया जाता है जिससे खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। हमारी सरकार ओलंपिक में शामिल होने वाले एथलीट को 21 लाख रुपये देगी। यदि हमारे प्रदेश का कोई युवा खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है तो उसे 3 करोड़, रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने वालों को एक करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन छत्तीसगढ़ प्रदेश आरचरी एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 22 से 30 दिसंबर तक आयोजित होगी। प्रतियोगिता में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 500 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री कैलाश मोरारका, महासचिव श्री आयुष मोरारका, श्री ईश्वर प्रसाद अग्रवाल सहित विभिन्न प्रदेशों से आए खिलाड़ी, कोच,मैनेजर तथा गणमान्यजन व खेलप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ में कौशल-एकीकृत औद्योगिक विकास को मिल रही नई गति – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ स्किल टेक में कौशल-आधारित निवेश को मिली नई गति: 13,690 करोड़ रुपये के स्किलिंग-लिंक्ड निवेश आकर्षित
GAIL का 10,500 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना प्रमुख आकर्षण
रायपुर, 23 दिसंबर 2025

भविष्य-उन्मुख कौशल विकास के साथ औद्योगिक विकास को सुदृढ़ रूप से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास विभाग एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा 23 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ स्किल टेक का आयोजन किया गया। यह उद्योग-केंद्रित निवेश कार्यक्रम प्रधानमंत्री सेतु योजना (PM SETU) के अंतर्गत कौशल विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न निवेश प्रस्तावों पर समझौता ज्ञापन (MoUs) हस्ताक्षरित किए गए तथा निवेश आमंत्रण पत्र जारी किए गए। कुल मिलाकर 13,690 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश सामने आए हैं, जिनसे राज्य में 12,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ये निवेश विभिन्न क्षेत्रों में कौशल-आधारित रोजगार को मजबूती प्रदान करेंगे।
कौशल-आधारित औद्योगिक विकास की धुरी बना गेल का प्रोजेक्ट
निवेश प्रतिबद्धताओं में गेल (GAIL) का प्रस्तावित गैस-आधारित उर्वरक संयंत्र राज्य के लिए एक प्रमुख एवं सबसे बड़े औद्योगिक प्रस्तावों में से एक के रूप में उभरकर सामने आया।
लगभग 10,500 करोड़ रुपये के प्रथम चरण निवेश तथा 1.27 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) यूरिया उत्पादन क्षमता के साथ यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल एवं उर्वरक मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करेगी।
यह प्रस्तावित परियोजना गेल की मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (MNJPL) के साथ प्लान की गई है, जो अनुकूल तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता पर आधारित होगी। यह परियोजना राजनांदगांव जिले के बिजेतला क्षेत्र में 400 एकड़ से अधिक भूमि पर प्रस्तावित है, जबकि 100 एकड़ अतिरिक्त भूमि एक समर्पित टाउनशिप के लिए आरक्षित की गई है।परियोजना में भविष्य में मांग एवं अधोसंरचना की उपलब्धता के अनुरूप क्षमता विस्तार का भी प्रावधान रखा गया है।
परियोजना के संचालन में आने के पश्चात लगभग 3,500 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके साथ ही संचालन, तकनीकी सेवाओं, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस तथा संबद्ध क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की निरंतर मांग उत्पन्न होगी, जो राज्य के कौशल-एकीकृत औद्योगिकीकरण के दृष्टिकोण को और सशक्त करेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा—“छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल निवेश, रोजगार और कौशल को आपस में जोड़ने पर आधारित है। छत्तीसगढ़ स्किल टेक जैसे मंचों के माध्यम से हम निवेशकों के विश्वास को ज़मीनी स्तर पर परिणामों में बदल रहे हैं, ताकि राज्य में कुशल रोजगार के अवसर सृजित हों। इसके पीछे स्पष्ट नीतियाँ और प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता हमारी ताकत है।”
विविध क्षेत्रों में निवेश रुचि से मजबूत हुआ कौशल पारिस्थितिकी तंत्र
गेल के अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ स्किल टेक में परिधान एवं वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सोलर पैनल निर्माण तथा अन्य उभरते (सनराइज़) क्षेत्रों में भी निवेशकों की मजबूत रुचि देखने को मिली। ये सभी क्षेत्र राज्य की कौशल विकास प्राथमिकताओं एवं रोजगार सृजन लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
कार्यक्रम के दौरान जशपुर में स्थापित आदित्य बिरला स्किल सेंटर को भी एक महत्वपूर्ण उद्योग-प्रेरित कौशल पहल के रूप में रेखांकित किया गया, जिसका उद्देश्य पारंपरिक एवं उभरते क्षेत्रों में कार्यबल की क्षमताओं को सुदृढ़ करना और आजीविका के अवसर बढ़ाना है।
छत्तीसगढ़ स्किल टेक राज्य में पहले से चल रहे निवेश गति को और आगे बढ़ाने वाला मंच सिद्ध हुआ है।
उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष में छत्तीसगढ़ को 200 से अधिक परियोजनाओं के माध्यम से 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत परियोजनाएँ कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि कार्यान्वयन में चल रही परियोजनाओं में से 58 प्रतिशत राज्य द्वारा चिन्हित प्राथमिक (थ्रस्ट) क्षेत्रों से संबंधित हैं। ये निवेश राज्य के 26 जिलों में फैले हुए हैं, जो क्षेत्रीय संतुलन एवं औद्योगिक विविधीकरण पर छत्तीसगढ़ सरकार के विशेष फोकस को दर्शाता है।
यह आयोजन छत्तीसगढ़ की उस उभरती पहचान को पुनः पुष्ट करता है, जहाँ औद्योगिक निवेश, कौशल विकास और समावेशी विकास एक-दूसरे के साथ समानांतर आगे बढ़ते हैं, ताकि आर्थिक प्रगति राज्य के युवाओं के लिए दीर्घकालिक और सार्थक आजीविका अवसरों में परिवर्तित हो सके।
विशेष लेख : सुशासन, संवेदना और सुरक्षा : श्रमिक हित में छत्तीसगढ़ सरकार के दो वर्ष
- लेखक: छगनलाल लोन्हारे, उप संचालक (जनसंपर्क)
रायपुर, 23 दिसम्बर 2025

सुशासन केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की संकल्पबद्ध प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग विगत दो वर्षों में इसी सुशासन की भावना को धरातल पर साकार करता हुआ दिखाई देता है। इस अवधि में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने तथा उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए अनेक ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम उठाए गए हैं।
विष्णु के सुशासन की स्पष्ट झलक श्रम विभाग द्वारा अपनाए गए डिजिटल नवाचारों में दिखाई देती है। प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से समस्त नस्तियों का संधारण ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से प्रारंभ किया गया है। विभागीय योजनाओं और सेवाओं को आमजन के लिए सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने हेतु एक आधुनिक, यूज़र-फ्रेंडली विभागीय वेबसाइट विकसित की गई है। श्रमिकों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए तैयार किया गया ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप श्रमिक पंजीयन, योजनाओं में आवेदन तथा श्रमिक पलायन की ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है, जो डिजिटल सुशासन की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
राज्य के नवगठित जिलों तक श्रम विभाग की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पाँच नवीन श्रम पदाधिकारी कार्यालयों की स्थापना हेतु 20 पदों का सृजन किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2024-25 के दौरान श्रमायुक्त संगठन अंतर्गत श्रम पदाधिकारी, श्रम निरीक्षक एवं उप निरीक्षक के पदों पर कुल 32 नई नियुक्तियाँ की गईं। इन प्रयासों से न केवल विभागीय कार्यों में गति आई, बल्कि श्रमिकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ भी सुनिश्चित हुईं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में आवश्यक और संतुलित सुधार करते हुए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और श्रमिक हितों के मध्य सामंजस्य स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन से छोटे व्यापारियों को राहत मिली, वहीं नियत कालिक नियोजन कर्मकार की नई श्रेणी ने रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोले।
राष्ट्रपति की अनुमति के उपरांत लागू किए गए छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन एवं विविध प्रावधान विधेयक, 2025 के माध्यम से अवैधानिक हड़ताल पर नियंत्रण, छोटे अपराधों में समझौते तथा लघु उद्योगों को छूट जैसे प्रावधान किए गए। महिला सशक्तिकरण की दिशा में रात्रि पाली में महिला कर्मकारों के सशर्त नियोजन की अनुमति देना सरकार की प्रगतिशील और संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रमिक कल्याण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की मानवीय प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। विभिन्न श्रम मंडलों के माध्यम से दो वर्षों में 11.03 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया तथा 27.33 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। इस अवधि में 784.73 करोड़ रुपये से अधिक की राशि श्रमिक कल्याण पर व्यय की गई, जो यह दर्शाती है कि यह सरकार आंकड़ों से आगे बढ़कर संवेदना के साथ श्रमिकों के जीवन में बदलाव ला रही है।
24×7 संचालित मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र ने शिकायत निवारण और पंजीयन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया है। वहीं प्रत्येक जिले और विकासखंड में संचालित मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्रों ने प्रशासन को सचमुच श्रमिकों के द्वार तक पहुँचाया है। निर्माण श्रमिकों के पंजीयन में स्व-घोषणा प्रमाण पत्र की व्यवस्था ने प्रक्रियाओं को सरल किया, जबकि मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के माध्यम से सैकड़ों श्रमिक परिवारों को अपने पक्के आवास का सपना साकार करने में सहायता मिली। मिनीमाता महतारी जतन योजना एवं असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना के अंतर्गत लाखों महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता प्रदान की गई, जिससे मातृत्व सुरक्षा को नया संबल मिला।
श्रमिक परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, छात्रवृत्ति, मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन तथा नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना जैसी पहल ने शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत मात्र पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सुशासन की मानवीय और संवेदनशील आत्मा को दर्शाता है।
केन्द्रीकृत डीबीटी प्रणाली के माध्यम से करोड़ों रुपये सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए, जिससे पारदर्शिता, विश्वास और समयबद्धता सुनिश्चित हुई। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार-मुक्त और जवाबदेह शासन की मजबूत आधारशिला है।
सुशासन दिवस के अवसर पर श्रम विभाग की यह दो वर्षीय यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह श्रमिकों के जीवन में वास्तविक, सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने का माध्यम बन चुका है।
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की सक्रिय भूमिका, संवेदनशील दृष्टिकोण और निरंतर निगरानी ने इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया है। डिजिटल नवाचार, संवेदनशील कानून, सामाजिक सुरक्षा और मानवीय सोच के साथ श्रम विभाग ने छत्तीसगढ़ को एक श्रमिक-हितैषी, सशक्त और समावेशी राज्य बनने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
ऑनलाइन टोकन से ट्रैक्टर तक : पोटियाडीह के किसान तोरण पटेल की खुशहाल खेती
धमतरी, 23 दिसंबर 2025 धमतरी जिले के ग्राम पोटियाडीह में इन दिनों खेतों के साथ-साथ किसानों के चेहरों पर भी हरियाली साफ झलक रही है। वजह है-समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारु, पारदर्शी और किसान-हितैषी व्यवस्था। गांव के किसान श्री तोरण पटेल आज राहत की सांस लेते हुए कहते हैं कि अब धान बेचने के लिए न लंबी कतारों का झंझट है, न अनिश्चितता की चिंता।
किसान तोरण पटेल के पास लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि है। इस खरीफ सीजन में वे 79 क्विंटल धान लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि शासन की ऑनलाइन टोकन व्यवस्था ने उनकी सबसे बड़ी परेशानी दूर कर दी है। समय पर टोकन मिलने से न केवल भीड़ से बचाव हुआ, बल्कि पूरा काम तय समय में आसानी से हो गया। “अब खेत का काम छोड़कर दिन-दिन भर लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती,” वे मुस्कराते हुए कहते हैं।
पिछले वर्ष की बात करें तो श्री पटेल ने 168 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था। समय पर मिले भुगतान से उन्होंने एक बड़ा सपना पूरा किया-ट्रैक्टर की खरीदी। इससे खेती का काम आसान हुआ, लागत घटी और उत्पादकता बढ़ी। साथ ही, सहकारी समिति से खाद-बीज की व्यवस्था भी सहजता से हो गई, जिससे फसल की तैयारी समय पर संभव हो सकी।
दसवीं तक शिक्षा प्राप्त तोरण पटेल मानते हैं कि आज खेती केवल मेहनत नहीं, बल्कि योजना, तकनीक और सरकारी सहयोग का परिणाम है। वे कहते हैं कि शासन की योजनाओं से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और हर काम समय पर पूरा हो रहा है। उपार्जन केंद्रों में पेयजल, छाया, तौल, भुगतान और मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं से किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
श्री पटेल ने इन सभी व्यवस्थाओं के लिए प्रदेश के मुखिया श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह साबित करती है कि जब नीति सही हो, व्यवस्था मजबूत हो और किसान को सम्मान मिले, तो खेती सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का रास्ता बन जाती है। यह सफलता की कहानी न केवल पोटियाडीह, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है।
कलेक्टर ने ली साप्ताहिक समय सीमा की बैठक
कलेक्टर ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश
महासमुंद, 23 दिसम्बर 2025 कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने सुबह 10 बजे से समय-सीमा की बैठक लेकर संचालित कार्यक्रमों एवं शासकीय योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रशासन गांव की ओर अभियान, मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम, धान खरीदी की प्रगति, अवैध परिवहन नियंत्रण, ई-केवाईसी एवं आवास योजनाओं सहित अन्य विषयों पर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, श्री रवि कुमार साहू, अनुविभागीय अधिकारी, सभी विभागीय जिलाधिकारी, जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ तथा वीसी के माध्यम से ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने प्रशासन गांव की ओर अभियान की समीक्षा करते हुए आयोजित शिविर में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक, आरटीओ एवं आधार कार्ड से संबंधित शिविर लगाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि आसपास के ग्रामीण अधिक से अधिक संख्या में शिविरों में भाग लें तथा आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि इस माह तक सभी स्वीकृत कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं। जनपद सीईओ, आरईएस एवं पीडब्ल्यूडी विभाग को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति के लिए आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य होगी तथा 01 जनवरी से सभी शासकीय पत्रों का आदान प्रदान ई-ऑफिस के माध्यम से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
धान खरीदी व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला नोडल अधिकारी प्रत्येक सप्ताह भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से करें, विशेषकर शनिवार एवं रविवार को। जिन राइस मिलों का डीओ कट चुका है, वहां से उठाव सुनिश्चित किया जाए। बोगस उठाव पाए जाने पर संबंधित प्रबंधक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही राइस मिल्स का भी पीवी ऐप के माध्यम से सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। धान खरीदी में छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने धान उठाव को लेकर भी निर्देश दिए कि मिलरों एवं परिवहन एजेंसियों के समन्वय से निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नियमित एवं सुचारू उठाव सुनिश्चित किया जाए। उठाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोडिंग के दौरान पूरी प्रक्रिया का शॉर्ट वीडियो बनाने कहा।
कलेक्टर ने बैठक में सांसद खेल महोत्सव की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यह खेल महोत्सव 24 एवं 25 दिसंबर को महासमुंद स्थित वन विभाग के खेल परिसर में आयोजित होगा। इसके साथ ही सिरपुर महोत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि इस वर्ष आयोजन 1 से 3 फरवरी तक भव्य रूप में किया जाएगा। महोत्सव में प्रसिद्ध एवं स्थानीय कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य प्रस्तुति दी जाएगी। कलेक्टर ने अभी से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर द्वारा जल संचयन अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक जल संवर्धन कार्य किए जाने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि 16,000 स्ट्रक्चर का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
कलेक्टर ने राशन कार्ड ई-केवाईसी पर समीक्षा करते हुए कहा कि जिले में अब भी लंबित राशन कार्डों का ई-केवाईसी मिशन मोड में जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि राशन वितरण के दौरान लाभार्थियों को बुलाकर वहीं बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाए और मृत व अनुपलब्ध सदस्यों का विलोपन किया जाए। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास स्वीकृति, निर्माण प्रगति, लंबित प्रकरण, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय किश्त के भुगतान तथा जियो-टैगिंग की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही उन्होंने अपार आईडी शिविर लगाने, शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा पीएम जनमन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जन चौपाल, समय-सीमा पत्रक और राजस्व प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग के 13 उप अभियंता सहायक अभियंता पदोन्नत
रायपुर, 23 दिसम्बर 2025 राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के 13 उप अभियंताओं (सिविल) को सहायक अभियंता के रूप में पदोन्नत किया है। पदोन्नत अभियंताओं में सर्वश्री तेनसिंह सूर्यवंशी, प्रमोद कुमार मेश्राम, जगदीश प्रसाद, कृष्ण कुमार रात्रे, तुलसी राम जोशी, नारद सिंह ध्रुव, रामभरोस भगत, राज्यशेखर मेश्राम, प्रदीप कुमार सिंह, टी.आर. साहू, रविंद्र कुमार नागरे, अरविंद कुमार गुप्ता और कमलेश शेण्डे शामिल हैं। इन सभी पदोन्नत अभियंताओं की नवीन पदस्थापना पृथक से की जाएगी।
हर माह 7 तारीख को राज्य की ग्राम पंचायतों में मनाया जाएगा 'आवास दिवस'
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन के सख्त निर्देश
रायपुर, 23 दिसंबर 2025 प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पारदर्शिता, समयबद्ध आवास निर्माण तथा हितग्राहियों को त्वरित लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्देश जारी करते हुए प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर माह की 7 तारीख को, चावल उत्सव एवं महात्मा गांधी नरेगा के रोजगार दिवस के साथ-साथ 'आवास दिवस' का अनिवार्य रूप से आयोजन किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण को गति देना, हितग्राहियों में जागरूकता बढ़ाना तथा निर्माण कार्यों में आने वाली समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करना है। पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती निहारिका बारिक सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, आवास दिवस के अवसर पर अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी।
हितग्राहियों की सूची का सार्वजनिक वाचन
आवास दिवस के दिन ग्राम पंचायतों में स्वीकृत, निर्माणाधीन एवं पूर्ण आवासों के सभी हितग्राहियों की सूची का सार्वजनिक रूप से वाचन किया जाएगा। साथ ही स्वीकृत हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे योजना में पारदर्शिता बनी रहे।
शीघ्र आवास पूर्ण करने वालों का होगा सम्मान
जिन हितग्राहियों ने 90 दिनों के भीतर अथवा अत्यंत कम समय में अपने आवास निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया है, उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा, ताकि अन्य हितग्राही भी प्रेरित हों। जिन हितग्राहियों की किस्तें प्रगति के बावजूद लंबित हैं या जिनका केवायसी शेष है, उनका उसी दिन केवायसी पूर्ण कराकर 7 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से राशि उनके खातों में हस्तांतरित की जाएगी।
मनरेगा मजदूरी पर चर्चा एवं समस्याओं का समयबद्ध समाधान
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत 90 दिवस की अकुशल मजदूरी के भुगतान की स्थिति पर चर्चा की जाएगी और आवश्यक समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय परिस्थितियों, तकनीकी कारणों अथवा अन्य बाधाओं के चलते जिन आवासों का निर्माण प्रभावित हो रहा है, उनका हर माह 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से समाधान कर हितग्राहियों को अवगत कराया जाएगा। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी इस प्रक्रिया की सतत समीक्षा करेंगे।
निर्माण सामग्री की उपलब्धता हेतु बनेंगे 'सामग्री बैंक'
निर्माण सामग्री, राजमिस्त्री या सेंटरिंग प्लेट की कमी के कारण जिन आवासों में विलंब हो रहा है, वहां स्व सहायता समूहों सहित सभी भागीदारों के साथ सामूहिक चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा। इसके साथ ही योजना मार्गदर्शिका के अनुसार 'सामग्री बैंक' की स्थापना भी की जाएगी।
पीएम जनमन हितग्राहियों को प्राथमिकता
पीएम जनमन के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने हेतु विशेष चर्चा एवं प्रेरणा दी जाएगी। पंचायत पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रावधानों, दिशा-निर्देशों तथा अन्य विभागों के साथ अभिसरण (कन्वर्जेंस) की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी।
टोल फ्री नंबर से होगा त्वरित समाधान
हितग्राहियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के टोल फ्री नंबर 1800-233-1290 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त सभी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि हर पात्र परिवार को समय पर पक्का आवास मिल सके और 'सबके लिए आवास' के लक्ष्य को साकार किया जा सके।