छत्तीसगढ़ / रायपुर
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव से मिलीं अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरी कॉम
राज्य में खेल सुविधाओं के विकास पर हुई चर्चा
रायपुर, 12 दिसम्बर 2025

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव से छह बार की बॉक्सिंग विश्व चैंपियन एवं ओलंपिक पदक विजेता, प्रसिद्ध मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम ने सौजन्य मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में मुलाकात के दौरान उन्हें राज्य में खेलों के विकास और खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरी कॉम जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के शुभारंभ समारोह में शामिल होने छत्तीसगढ़ आई थीं। उन्होंने 11 दिसम्बर को इसमें शामिल होकर खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अभावों और मुश्किलों के बीच अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत का नाम रोशन करने वाली मैरी कॉम की लंबी खेल यात्रा की प्रशंसा की। श्री साव ने कहा कि मैरी कॉम देश का गौरव और प्रेरणा हैं। उनकी उपस्थिति से बस्तर के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और मेहनत करने की प्रेरणा जरूर मिली होगी। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में शामिल होने छत्तीसगढ़ आने के लिए मैरी कॉम को धन्यवाद दिया।
मैरी कॉम ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अपने अनुभव साझा करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री साव से छत्तीसगढ़ के युवाओं के खेल में सुधार के लिए हरसंभव मदद की बात कही। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ गांवों से पहुंचे युवाओं को देख उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं। बस्तर ओलंपिक वहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मंच है। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अच्छा काम कर रही है। आने वाले समय में यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मेडल जरूर जीतेंगे। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए जाने पर राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
बदली भीमा की जिंदगी आई खुशहाली प्रधानमंत्री आवास योजना से
कच्चे घर से सम्मानपूर्ण जीवन तक की यात्रा
रायपुर, 12 दिसंबर 2025
भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के उन सभी बेघर परिवारों और कच्चे-जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, शौचालय) के साथ एक पक्का घर देना है, जिनके पास अपना घर नहीं है। जीवन में कठिनाइयाँ जब बड़े पहाड़ की तरह सामने खड़ी होती हैं, तब इंसान की हिम्मत और धैर्य की असली परीक्षा होती है। लेकिन यदि व्यक्ति हार न माने और सही दिशा में लगातार प्रयास करे, तो सफलता जरूर मिलती है। यही कहानी है ग्राम पंचायत अरनुपर, जनपद पंचायत कुआकोंडा दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला के निवासी श्री भीमा कश्यप पिता श्री जोगा की, जिनके जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने आशा की नई किरण जगाई।
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों से घिरे गांव अरनुपर में भीमा अपने परिवार के साथ कई वर्षों से जर्जर कच्चे मकान में रह रहे थे। बरसात में छत से पानी टपकने का डर, सर्दी में टाट और प्लास्टिक लगाकर ठंड से बचना और गर्मी में टूटती दीवारों की परेशानी हमेशा बनी रहती थी। यह सब उनकी रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पक्का घर उनका अधूरा सपना बना हुआ था। लेकिन जब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत उनके नाम आवास स्वीकृत हुआ, तो भीमा के जीवन में नई उम्मीद जागी। किस्तों की राशि मिलने के बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर धीरे-धीरे अपना पक्का घर बनाना शुरू किया। पहले मिट्टी और लकड़ी से गुजारा करने वाले भीमा के हाथों ने अब ईंट और सीमेंट से एक मजबूत घर तैयार किया। एक ऐसा घर जिसमें उनके पूरे परिवार के सुरक्षित भविष्य की नींव रखी गई।
आज भीमा और उनका परिवार नए, साफ-सुथरे और सुरक्षित पक्के घर में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहा है। बच्चों के चेहरों पर खुशी की चमक और परिवार के मन में सुरक्षा का एहसास उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। भीमा गर्व से कहते हैं कि पहले हर मौसम डर लेकर आता था, अब घर के अंदर सुकून है। बच्चों को पहली बार ऐसा घर मिला है जहाँ वे बिना डर पढ़-लिख सकते हैं। सरकार की इस योजना ने हमें नई जिंदगी दी है।
हाल ही में कलेक्टर अरनपुर के निरीक्षण पर पहुंचे। उन्होंने भीमा के नए बने आवास को देखा और घर की मजबूती, स्वच्छता और स्तर देखकर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के दौरान श्री भीमा ने बताया कि उन्हें अंतिम किस्त प्राप्त होना अभी शेष है। इस पर कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि अंतिम किस्त जल्द ही प्रदान कर दी जाएगी। कलेक्टर ने यह भी पूछा कि क्या उन्हें नियमित रूप से राशन मिल रहा है, जिस पर भीमा ने बताया कि उन्हें समय पर सभी सामग्री प्राप्त हो रही है।
कलेक्टर ने भीमा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीमा का प्रयास यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग जीवन बदल सकता है। उनका अनुभव गांव के अन्य परिवारों को भी प्रेरित करेगा। आज भीमा अपने नए घर के आंगन में खड़े होकर गर्व महसूस करते हैं। उनके लिए यह घर केवल ईंट और सीमेंट की दीवारें नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और नई शुरुआत का प्रतीक है, एक ऐसी शुरुआत जिसने उनके परिवार के जीवन में स्थायी खुशियाँ भर दी हैं।
डबरी निर्माण से ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई दिशा
रायपुर, 12 दिसंबर 2025
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में डबरी निर्माण कार्य न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उनकी आजीविका का सशक्त जरिया भी बन रहा है। वर्तमान में जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देते हुए कोंडागांव जिले में डबरी निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवार कई तरह से लाभान्वित हो रहे हैं।
डबरी निर्माण से जल भराव की सुविधा बढ़ती है, जिससे वर्षभर कृषि कार्य, सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और बतख पालन जैसे आयमूलक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। यह स्थानीय स्तर पर जल संचयन को मजबूत करता है और ग्रामीणों को अतिरिक्त आजीविका स्रोत प्रदान करता है। मनरेगा के तहत नवीन डबरी निर्माण ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव एवं मांग के आधार पर स्वीकृत किए जा रहे हैं। निर्माण से पूर्व वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप भूमि की जांच की जा रही है, ताकि निर्माण उपरांत पानी का पर्याप्त भराव सुनिश्चित हो सके।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई ने जानकारी दी कि जिले में इस वर्ष अब तक कुल 384 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रति ग्राम पंचायत 5 से 10 डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जो मांग एवं उपलब्ध स्थल के आधार पर स्वीकृत किए जाएंगे। इस पहल से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी तथा “मोर गाँव-मोर पानी” महाभियान का उद्देश्य भी पूरा होगा।
आत्मनिर्भरता, खुशहाली और ग्रामीण प्रेरणा की अद्भुत मिसाल
मनरेगा की डबरी से बदली रमेश की जिंदगी
सब्जी उत्पादन और मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर, गांव के लिए बने प्रेरणास्रोत
रायपुर, 12 दिसंबर 2025


महात्मा गांधी नरेगा के डबरी निर्माण ने ग्राम पंचायत रेगड़ा के पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में नई आशाएं जगाई है। सिंचाई, मछली पालन और सब्जी उत्पादन से उनकी आय बढ़ी। पानी की कमी से जूझता जीवन अब खुशहाली में बदल रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत रेगड़ा के वन अधिकार पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी ने वह बदलाव लाया जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश थी। पहले रमेश की खेती पूरी तरह वर्षा पर आधारित थी, जिससे उत्पादन सीमित होता था और आय भी अनिश्चित रहती थी। कठिन परिश्रम करने के बावजूद परिवार की आजीविका पर हमेशा संकट बना रहता था। परंतु मनरेगा के माध्यम से उनके खेत में कराए गए डबरी निर्माण कार्य ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। कठिन मिट्टी और चट्टानों से भरे क्षेत्र में डबरी बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक और मेट के मार्गदर्शन में कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में 652 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे ग्रामीणों को तात्कालिक रोजगार और आय का अवसर मिला।
डबरी निर्माण से स्थायी आजीविका स्रोत
डबरी निर्माण के बाद रमेश के खेत में वर्षभर सिंचाई उपलब्ध हो गई। इसका प्रत्यक्ष लाभ उन्हें खेती में मिला। अब उनके खेत में धान, मूंगफली, तरबूज, केला तथा विविध सब्जियों का उत्पादन होने लगा है। इससे न केवल उनके कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुला। साथ ही डबरी में मछली पालन की शुरुआत ने उन्हें एक और स्थायी आजीविका स्रोत प्रदान किया।
डबरी निर्माण से खुशहाली और आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहा है रमेश
मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सरकारी योजनाओं को ईमानदारी और सही दिशा में लागू किया जाए, तो ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव संभव है। आज रमेश का परिवार आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है और उनकी तरक्की की कहानी पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है। ग्राम पंचायत रेगड़ा में निर्मित यह डबरी आज रोजगार, विकास और समृद्धि का नया प्रतीक है। रमेश गर्व से कहते हैं “डबरी ने हमारे जीवन में स्थायी खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई राह खोल दी है।”
दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना की प्रेरक मिसाल : 63 वर्षीय श्री गनपत कश्यप ने बदली अपनी दुनिया
रायपुर, 12 दिसंबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के लिए चलाई जा रही योजनाएँ आज समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही हैं। इनमें से एक दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना का प्रभाव पेण्ड्रा क्षेत्र में देखने को मिलता है, जहाँ 63 वर्षीय श्री गनपत कश्यप ने शासन की सहायता का सही उपयोग कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
ग्राम पतंगवा, जिला गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही के निवासी श्री गनपत कश्यप दिव्यांग होने के बावजूद हमेशा आत्मसम्मान और मेहनत के साथ जीवन जीने की सोच रखते थे। शासन के समाज कल्याण विभाग एवं वित्त एवं विकास निगम द्वारा प्रदत्त ऋण सहायता ने उनके जीवन में एक नई रोशनी ला दी। इस आर्थिक सहयोग को अवसर मानकर उन्होंने अपने गाँव में किराना दुकान की शुरुआत की। उनकी दुकान धीरे–धीरे आजीविका का मजबूत स्तंभ बन गई और उनके परिवार—बेटा, बहू, नाती–नातिन—के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा आई।
श्री कश्यप की लगन और संघर्ष की कहानी आज गाँव में ही नहीं, पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। हाल ही में जब महाविद्यालय के छात्र–छात्राएँ उनकी दुकान पर पहुँचे और फोटो–वीडियो लेकर उनकी सफलता को सोशल मीडिया पर साझा किया, तो ग्रामवासियों ने भी गर्व से कहा कि एक वृद्ध दिव्यांगजन कैसे अपने परिश्रम और शासन की सहायताओं से पूरे परिवार का भविष्य संवार सकता है, यह श्री गनपत कश्यप की कहानी स्पष्ट बताती है।
वर्तमान समय में स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण श्री कश्यप स्वयं दुकान संचालित नहीं कर पा रहे, लेकिन उनके पुत्र श्री हेमन्त कश्यप ने अपने पिता के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है। आज यह दुकान सिर्फ आजीविका का साधन नहीं बल्कि संघर्ष, उम्मीद और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है।
शासन की दिव्यांगजन स्वावलंबन योजनाएँ यह सिद्ध कर रही हैं कि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और संकल्प शक्ति मिलकर जीवन की किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकती है। श्री गनपत कश्यप की कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों दिव्यांगजनों को नया हौसला देती है, जो आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
दिव्यांगजन स्वावलंबन को नई दिशा : शासन की संवेदनशील पहल से श्री चंदन निलहर बने आत्मनिर्भर
रायपुर,12 दिसंबर 2025

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के दिव्यांगजनों के सम्मान, अधिकार और स्वावलंबन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा संचालित दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना आज हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण बन चुकी है। इसी योजना ने रायपुर जिले के ग्राम देवपुरी निवासी श्री चंदन निलहर के जीवन में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाया है।

जन्म से दिव्यांग और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति वाले श्री निलहर पर पिता के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वे संघर्ष कर रहे थे। ऐसे समय में उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संपर्क कर ई-रिक्शा क्रय हेतु ऋण आवेदन प्रस्तुत किया। विभाग द्वारा सभी आवश्यक जांच के पश्चात छत्तीसगढ़ दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम, रायपुर के माध्यम से वर्ष 2024 में 3 लाख 44 हजार 730 का ऋण स्वीकृत किया गया।
न्यूनतम ब्याज दर पर उपलब्ध कराए गए इस ऋण से श्री निलहर को ई-रिक्शा प्राप्त हुआ, जिसने उनकी तकदीर ही बदल दी। आज वे प्रतिदिन ई-रिक्शा चलाकर स्थिर आय अर्जित कर रहे हैं और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। अब उनके घर में आर्थिक स्थिरता आई है और जीवन में आत्मविश्वास का संचार हुआ है। ई-रिक्शा ने उन्हें आजीविका का साधन ही नहीं दिया, बल्कि समाज में सम्मानपूर्वक जीने का अवसर भी प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर दिव्यांग व्यक्ति को अवसर, संसाधन और सम्मान प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा में आगे बढ़ाना है। समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग दिव्यांगजन स्वावलंबन को मिशन मोड में लेकर कार्य कर रहा है, ताकि कोई भी व्यक्ति अभाव के कारण पीछे न रह जाए।
समाज कल्याण विभाग ने श्री चंदन निलहर की सफलता को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह योजना दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है। सही सहयोग और संबल मिलने पर दिव्यांगजन न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि समाज में प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहे हैं।
दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना की सफलता यह सिद्ध करती है कि संवेदनशील शासन, उचित समर्थन और दृढ़ इच्छा शक्ति मिलकर जीवन की दिशा बदल सकती है।
उद्योग हितैषी नीति से राज्य में 7.69 लाख करोड़ रूपए के निवेश
-छगनलाल लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क)
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साधने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रदेश में नई औद्योगिक नीति (2024-30) लागु की गई है। राज्य की उद्योग हितैषी नीति के फैसले निवेशक छत्तीसगढ़ में उद्योग-धंधा स्थापित करने की दिशा में आकर्षित हो रहे हैं। प्रदेश में 01 जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक 2415 उद्योग स्थापित हुए जिनके द्वारा लगभग 18058.34 करोड़ का निवेश किया गया एवं लगभग 42 हजार 500 रोजगार सृजित हुए। 01 जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक उद्योगों को 1000 करोड़ से अधिक अनुदान का वितरण किया गया।
निवेश प्रोत्साहन
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को 1 नवंबर 2024 से प्रभावी किया गया है। पहली बार नीति को रोज़गार उन्मुख बनाया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की पहल पर प्रशिक्षण सब्सिडी ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा 1000 से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए कस्टमाइज़्ड पैकेज की व्यवस्था की गई है। राज्य में श्रम-प्रधान उद्योगों को आकर्षित करने हेतु 27 मई 2025 को की गई संशोधन के माध्यम से रोज़गार सृजन सब्सिडी एवं एम्प्लॉयमेंट मल्टिप्लायर का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने हेतु औद्योगिक विकास नीति के तहत पात्र सेवा क्षेत्रों की सूची को बढ़ाकर 43 किया गया है।
पहली बार पर्यटन एवं स्वास्थ्य सेवाओं को औद्योगिक विकास नीति में शामिल किया गया है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने हेतु 27 मई 2025 के संशोधन द्वारा निजी विद्यालय निजी शीर्ष 100 एवं विदेशी विश्वविद्यालय तथा निजी आवासीय खेल अकादमियों को औद्योगिक विकास नीति में सम्मिलित किया गया है। नीति के प्रचार-प्रसार व निवेश आकर्षित करने हेतु रायपुर, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु ओसाका, जगदलपुर एवं अहमदाबाद में इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन प्रयासों के चलते राज्य को लगभग 7.69 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें स्टील पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, आईटी, बीपीओ लीन एनर्जी आदि क्षेत्र शामिल हैं। नवा रायपुर में राज्य में देश का प्रथम एआई डाटा सेन्टर तथा सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु रु 11.000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं इनकी स्थापना की जा रही है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
अनुपालनों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, राज्य ने अनुपालन बोझ को घटाने की पहल की है। इसके तहत 1167 जटिल अनुपालनों की पहचान की गई, 231 प्रावधानों को अपराध मुक्त (decriminalize) किया गयाए 369 प्रक्रियाओं-प्रक्रियाओं को डिजिटल किया गया, 194 प्रावधानों-प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, तथा 14 प्रावधानों में अनावश्यकता (redundancy) को समाप्त किया गया।
कुल 716 व्यवसाय केंद्रित अनुपालनों में से 117 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया, 231 प्रक्रियाएँ प्रक्रियाओं को डिजिटल किया गया, 153 प्रावधानों प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया और 14 प्रावधानों में अनावश्यकता कम की गई। इसके अलावा कुल 451 नागरिक केंद्रित अनुपालनों को सुव्यवस्थित किया गया है, जिनमें से 114 प्रावधानों को अपराधमुक्त 138 प्रक्रियाओं प्रक्रियाओं को डिजिटल, तथा 41 प्रावधानों प्रक्रियाओं को सरल किया गया है।
इन सभी पहलों का उद्देश्य राज्य में व्यवसायों के लिए एक अनुकूल और सहज वातावरण तैयार करना है ताकि उद्योग और व्यापार क्षेत्र और अधिक विकसित हो सके। बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के तहत विभिन्न विभागों के नियम और प्रक्रियाएँ सरल की गईं। महिलाओं को सुरक्षित तरीके से 24×7 कार्य की अनुमति देने हेतु संबंधित नियमों में संशोधन किए गए। राज्य में 435 बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान को क्रियान्वयित किया गया है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के अंतर्गतराज्य 4 श्रेणियों में टॉप अचीवर बना।
82 जिला स्तरीय सुधारों की पहचान की गई, जिनमें से 124 सुधार लागू किए जा चुके हैं नई सिंगल विंडो प्रणाली भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के आधार पर विकसित की गई है। नया पोर्टल 1 जुलाई 2025 को लॉन्च किया गया। राज्य के विभिन्न अधिनियमों में छोटे अपराधों को अपराध मुक्त (decriminalize) करने हेतु विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ जनविश्वास प्रावधानों में संशोधन अधिनियम 2025 मानसून सत्र में विधानसभा द्वारा पारित किया गया। अधिनियम के माध्यम से 8 अधिनियमों के अंतर्गत 163 प्रावधानों को गई अपराधिकृत किया गया। जनविश्वास अधिनियम पारित करने वाला देश में दूसरा राज्य बना। औद्योगिक भूमि आवंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु छत्तीसगढ़ भूमि आवंटन नियमों में संशोधन किया गया है। अब औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व की जगह ई-टेंडरिंग के माध्यम से किया जा रहा है।
औद्योगिक अधोसंरचना
पिछले एक वर्ष में 7 औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए तथा 7 अन्य स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना प्रक्रिया में हैं। विगत दो वर्षों में औद्योगिक लैंड बैंक हेतु कुल 05 जिलों में कुल रकबा 255.725 हेक्टेयर भूमि का आधिपत्य विभाग को प्राप्त हुआ है। औद्योगिक लैंड बैंक हेतु कुल 08 जिलों में कुल रकबा 940.65 हेक्टेयर नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड हेतु 02 जिलों में कुल रकबा 172.112 हेक्टेयर भूमि का चिन्हांकन किया गया है तथा हेल्थ एण्ड वेलनेस हेतु 07 जिलों में कुल रकबा 82.000 हेक्टेयर शासकीय भूमि का चिन्हांकन किया गया है।
एक्सपोर्ट फ़ैसिलिटेशन काउंसिल
सरकारी खरीद को पारदर्शी और किफायती बनाने हेतु राज्य सरकार द्वारा जीईएम पोर्टल अपनाया गया है। सीएसआईडीसी के माध्यम से जीईएम टीम द्वारा जिलेवार और विभागवार प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु आईआईएफटी कोलकाता के साथ एमओयू कर राज्य स्तर पर एक्सपोर्ट फ़ैसिलिटेशन काउंसिल स्थापित की गई है। साथ ही निर्यात संवर्धन हेतु प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट निर्यात आयुक्त कार्यालय में नियुक्त की गई है।
राज्य सरकार के 02 वर्ष पर विशेष : छत्तीसगढ़ बना भारत का ग्रोथ इंजन
- छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क)
रायपुर, 12 दिसम्बर 2025
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य अनुरूप छत्तीसगढ़ में न केवल तेजी से अधोसंरचनाएं विकसित हो रही है, बल्कि सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को भी हासिल किया जा रहा है। विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के विकास इंजन के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में डिफेंस, आईटी, एआई, ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य में विकास, विश्वास और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। राज्य की प्रगति में माओवाद आतंक हमेशा से ही बाधक रही है। अब यह बाधा दूर होने जा रही है। माओवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। शासन व्यवस्था में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु 01 दिसम्बर 2025 से मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे कार्य संस्कृति और जवाबदेही को नई पहचान मिल रही है।
प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण जुड़ा है नवा रायपुर अटल नगर में छत्तीसगढ़ के नए भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। यह विधानसभा भवन नई ऊर्जा, नई सोच और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प का प्रतीक है।
पिछले 2 वर्षों में बस्तर और सरगुजा अंचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां सड़क, रेल, स्वास्थ्य और संचार सहित कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। बस्तर में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किए जा रह हैं। इसके लिए नई होम स्टे पॉलिसी और इको टूरिज्म के लिए विशेष प्रावधान रखे है। बस्तर और सरगुजा अंचल में उद्योगों की स्थापना पर विशेष सुविधाएं, छूट और रियायतें दी जा रही है। इसके अलावा उद्योगों को विशेष पैकेज के अंतर्गत सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत माओवाद आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 69 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बस्तर की बदलती फिजा को सबके सामने लाने में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर के युवा अब विकास से जुड़ना चाहते है, इसकी बानगी यहां चलाए जा रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। बस्तर की युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन ऑटोमोबाईल, पायलट, आईटी आदि क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
राज्य में सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल को हासिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक गतिशीलता के लिए शुरू की गई कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 40 लाख घरों में पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराया जा रहा है। इसी प्रकार 26 लाख से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और समाज में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना में 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 14 हजार करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के दायरे में राज्य की 98 प्रतिशत आबादी को लाया जा चुका है।
छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार और समर्थन मूल्य में खरीदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मोदी की गारंटी के अंतर्गत किसानों को देश में सर्वाधिक धान का मूल्य दिया जा रहा है। राज्य के 2300 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। किसानों से धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से तथा 3100 रूपए प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है। किसान हितैषी फैसलों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों के खाते में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। किसान इस राशि का खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आईआईएसडी–स्वनिति इनिशिएटिव की ‘मैपिंग इंडियाज स्टेट लेवल एनर्जी ट्रांज़िशन: छत्तीसगढ़’ रिपोर्ट का किया विमोचन
कोयला क्षेत्रों में ‘जस्ट ट्रांज़िशन’ पर विस्तृत चर्चा, राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के लिए ठोस कदमों पर बल
रायपुर 12 दिसंबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) और स्वनिति इनिशिएटिव के शोधकर्ताओं ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट “मैपिंग इंडियाज स्टेट लेवल एनर्जी ट्रांज़िशन: छत्तीसगढ़” का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने शोधकर्ताओं के साथ राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसार, ऊर्जा सुरक्षा, और सतत विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की रणनीतियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा दक्षता संबंधी नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
शोधकर्ताओं ने मुख्यमंत्री श्री साय को भारत के 52 कोयला उत्पादक जिलों की ‘एनर्जी ट्रांज़िशन वल्नरेबिलिटी’ पर आधारित एक व्यापक इंडेक्स प्रस्तुत किया, जिसमें यह दर्शाया गया कि पारंपरिक कोयला आधारित क्षेत्रों में ‘जस्ट ट्रांज़िशन’—अर्थात् आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से न्यायपूर्ण बदलाव—कितना आवश्यक है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह इंडेक्स पुराने कोयला क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार संरचना, और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों का महत्वपूर्ण संकेतक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह तथा ऊर्जा विभाग के सचिव श्री रोहित यादव उपस्थित थे।
उद्योग हितैषी नीति से राज्य में 7.69 लाख करोड़ रूपए के निवेश
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साधने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रदेश में नई औद्योगिक नीति (2024-30) लागु की गई है। राज्य की उद्योग हितैषी नीति के फैसले निवेशक छत्तीसगढ़ में उद्योग-धंधा स्थापित करने की दिशा में आकर्षित हो रहे हैं। प्रदेश में 01 जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक 2415 उद्योग स्थापित हुए जिनके द्वारा लगभग 18058.34 करोड़ का निवेश किया गया एवं लगभग 42 हजार 500 रोजगार सृजित हुए। 01 जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक उद्योगों को 1000 करोड़ से अधिक अनुदान का वितरण किया गया।
निवेश प्रोत्साहन
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को 1 नवंबर 2024 से प्रभावी किया गया है। पहली बार नीति को रोज़गार उन्मुख बनाया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन की पहल पर प्रशिक्षण सब्सिडी ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा 1000 से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए कस्टमाइज़्ड पैकेज की व्यवस्था की गई है। राज्य में श्रम-प्रधान उद्योगों को आकर्षित करने हेतु 27 मई 2025 को की गई संशोधन के माध्यम से रोज़गार सृजन सब्सिडी एवं एम्प्लॉयमेंट मल्टिप्लायर का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने हेतु औद्योगिक विकास नीति के तहत पात्र सेवा क्षेत्रों की सूची को बढ़ाकर 43 किया गया है।
पहली बार पर्यटन एवं स्वास्थ्य सेवाओं को औद्योगिक विकास नीति में शामिल किया गया है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने हेतु 27 मई 2025 के संशोधन द्वारा निजी विद्यालय निजी शीर्ष 100 एवं विदेशी विश्वविद्यालय तथा निजी आवासीय खेल अकादमियों को औद्योगिक विकास नीति में सम्मिलित किया गया है। नीति के प्रचार-प्रसार व निवेश आकर्षित करने हेतु रायपुर, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु ओसाका, जगदलपुर एवं अहमदाबाद में इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन प्रयासों के चलते राज्य को लगभग 7.69 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें स्टील पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, आईटी, बीपीओ लीन एनर्जी आदि क्षेत्र शामिल हैं। नवा रायपुर में राज्य में देश का प्रथम एआई डाटा सेन्टर तथा सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु रु 11.000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं इनकी स्थापना की जा रही है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
अनुपालनों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, राज्य ने अनुपालन बोझ को घटाने की पहल की है। इसके तहत 1167 जटिल अनुपालनों की पहचान की गई, 231 प्रावधानों को अपराध मुक्त (decriminalize) किया गयाए 369 प्रक्रियाओं-प्रक्रियाओं को डिजिटल किया गया, 194 प्रावधानों-प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, तथा 14 प्रावधानों में अनावश्यकता (redundancy) को समाप्त किया गया।
कुल 716 व्यवसाय केंद्रित अनुपालनों में से 117 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया, 231 प्रक्रियाएँ प्रक्रियाओं को डिजिटल किया गया, 153 प्रावधानों प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया और 14 प्रावधानों में अनावश्यकता कम की गई। इसके अलावा कुल 451 नागरिक केंद्रित अनुपालनों को सुव्यवस्थित किया गया है, जिनमें से 114 प्रावधानों को अपराधमुक्त 138 प्रक्रियाओं प्रक्रियाओं को डिजिटल, तथा 41 प्रावधानों प्रक्रियाओं को सरल किया गया है।
इन सभी पहलों का उद्देश्य राज्य में व्यवसायों के लिए एक अनुकूल और सहज वातावरण तैयार करना है ताकि उद्योग और व्यापार क्षेत्र और अधिक विकसित हो सके। बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के तहत विभिन्न विभागों के नियम और प्रक्रियाएँ सरल की गईं। महिलाओं को सुरक्षित तरीके से 24×7 कार्य की अनुमति देने हेतु संबंधित नियमों में संशोधन किए गए। राज्य में 435 बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान को क्रियान्वयित किया गया है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के अंतर्गतराज्य 4 श्रेणियों में टॉप अचीवर बना।
82 जिला स्तरीय सुधारों की पहचान की गई, जिनमें से 124 सुधार लागू किए जा चुके हैं नई सिंगल विंडो प्रणाली भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के आधार पर विकसित की गई है। नया पोर्टल 1 जुलाई 2025 को लॉन्च किया गया। राज्य के विभिन्न अधिनियमों में छोटे अपराधों को अपराध मुक्त (decriminalize) करने हेतु विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ जनविश्वास प्रावधानों में संशोधन अधिनियम 2025 मानसून सत्र में विधानसभा द्वारा पारित किया गया। अधिनियम के माध्यम से 8 अधिनियमों के अंतर्गत 163 प्रावधानों को गई अपराधिकृत किया गया। जनविश्वास अधिनियम पारित करने वाला देश में दूसरा राज्य बना। औद्योगिक भूमि आवंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु छत्तीसगढ़ भूमि आवंटन नियमों में संशोधन किया गया है। अब औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व की जगह ई-टेंडरिंग के माध्यम से किया जा रहा है।
औद्योगिक अधोसंरचना
पिछले एक वर्ष में 7 औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए तथा 7 अन्य स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना प्रक्रिया में हैं। विगत दो वर्षों में औद्योगिक लैंड बैंक हेतु कुल 05 जिलों में कुल रकबा 255.725 हेक्टेयर भूमि का आधिपत्य विभाग को प्राप्त हुआ है। औद्योगिक लैंड बैंक हेतु कुल 08 जिलों में कुल रकबा 940.65 हेक्टेयर नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड हेतु 02 जिलों में कुल रकबा 172.112 हेक्टेयर भूमि का चिन्हांकन किया गया है तथा हेल्थ एण्ड वेलनेस हेतु 07 जिलों में कुल रकबा 82.000 हेक्टेयर शासकीय भूमि का चिन्हांकन किया गया है।
एक्सपोर्ट फ़ैसिलिटेशन काउंसिल
सरकारी खरीद को पारदर्शी और किफायती बनाने हेतु राज्य सरकार द्वारा जीईएम पोर्टल अपनाया गया है। सीएसआईडीसी के माध्यम से जीईएम टीम द्वारा जिलेवार और विभागवार प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु आईआईएफटी कोलकाता के साथ एमओयू कर राज्य स्तर पर एक्सपोर्ट फ़ैसिलिटेशन काउंसिल स्थापित की गई है। साथ ही निर्यात संवर्धन हेतु प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट निर्यात आयुक्त कार्यालय में नियुक्त की गई है।
जेंडर अभियान ‘नई चेतना 4.0’ पर केंद्रित 'दीदी के गोठ' के पाँचवें एपिसोड का हुआ प्रसारण
जेंडर अभियान ‘नई चेतना 4.0’ पर केंद्रित 'दीदी के गोठ' के पाँचवें एपिसोड का हुआ प्रसारण
उद्योग मंत्री ने किया ऑक्सीजोन विकास कार्याे का लोकार्पण
पोड़ीबहार में 03 विकास कार्याे के भूमिपूजन सहित कुल 179 लाख रूपए के विकास कार्याे की दी सौगात
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025

प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने नगर पालिक निगम केारबा के वार्ड क्र. 32 पोड़ीबहार बांसबाड़ी उद्यान में ऑक्सीजोन विकास कार्यों का लोकार्पण किया, वहीं पोड़ीबहार बस्ती के विभिन्न स्थानों में किए जाने वाले 03 विकास कार्येा का भूमिपूजन भी उनके हाथों किया गया। लोकार्पण भूमिपूजन कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के द्वारा की गई, वहीं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर सहित निगम की मेयर इन काउंसिल के सदस्यगण, पार्षदगण आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा पोड़ीबहार मुक्तिधाम के सामने स्थित बांसबाड़ी उद्यान में एन.सी.ए.पी. मद से ऑक्सीजोन का निर्माण 01 करोड़ 60 लाख 11 हजार रूपये की लागत से किया गया है, जिसका लोकार्पण आज उद्योग मंत्री के हाथों किया गया। इसी प्रकार निगम द्वारा वार्ड क्र. 32 पोड़ीबहार में मंदिर के समीप प्रभारी मंत्री मद से 07 लाख रूपये की लागत से आर.सी.सी. छत का निर्माण, वार्ड क्र. 32 पोड़ीबहार अंतर्गत महालक्ष्मी इंटरप्राईजेेस से सुरेशचंद मंगल के घर तक जिला खनिज न्यास मद से 06 लाख रूपये की लागत से सी.सी.रोड व नाली का निर्माण तथा वार्ड क्र. 32 अंतर्गत यादव के घर से सी.पी.पटेल घर तक जिला खनिज न्यास मद से 06 लाख रूपये की लागत से सी.सी. रोड नाली का निर्माण किया जाना हैं, जिनका भूमिपूजन भी केबिनेट मंत्री श्री देवांगन के करकमलों से किया गया। मंत्री श्री देवांगन ने इन विकास कार्याे का विधिवत भूमिपूजन किया तथा शीघ्र कार्य प्रारंभ कर पूरी गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य कराते हुए समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।
उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार राज्य के सर्वागीण विकास के लिए दृढ़ संकल्पित है, विकास के सभी क्षेत्रों में हमारे छत्तीसगढ़ का तेजी से विकास हो रहा है, विगत दो वर्षाे के दौरान पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करते हुए राज्य सरकार ने एक जनहितैषी सरकार की छबि अंकित की है। उन्होने कहा कि जहॉं तक कोरबा के विकास का प्रश्न है तो कोरबा का तेजी से विकास हो रहा है, यहॉं की बरसों पुरानी समस्याएं दूर हो रही हैं तथा कोरबा के विकास के लिए धनराशि की केाई कमी भविष्य में भी नहीं होने दी जाएगी, यह मैं आश्वस्त करता हूॅं। इस मौके पर मंत्री श्री देवांगन ने महापौर श्रीमती राजपूत के आग्रह पर उक्त ऑक्सीजोन बांसबाड़ी के बाउण्ड्रीवाल निर्माण की घोषणा की।
इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोरबा की देवतुल्य जनता की समस्याओं को दूर करना, उन्हें समस्त मौलिक सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, मेरा सौभाग्य है कि हमें प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरूण साव एवं कोरबा के विधायक व प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का लगातार मार्गदर्शन, सहयोग व आशीर्वाद कोरबा के विकास के लिए मुझे प्राप्त हो रहा है। निर्माण कार्याे हेतु धनराशि की कोई कमी नहीं हो रही है तथा हम निर्माण कार्याे से संबंधित जो भी मांग उनकेे सामने रखते हैं, वह प्राथमिकता के साथ पूरी होती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने बदली जिंदगी
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025
प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले पक्के मकान से बेमेतरा जिले के साजा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत केंवतरा के 38 वर्षीय चेतन साहू के जीवन में खुशहाली आई है। चेतन साहू मजदूर तथा एकल दिव्यांग हैं। पूर्व में वे टूटे-फूटे घास-फूस के कच्चे मकान में रहते थे, जहाँ बरसात के दिनों में छत टपकना, घर में पानी भर जाना तथा सर्प-बिच्छू जैसे विषैले जीवों का प्रवेश आम बात थी।
परिवार को कई-कई रातें जागकर बितानी पड़ती थीं। पक्का मकान चेतन साहू के परिवार के लिए एक सपना था जो अब पूरा हो गया है। आज चेतन साहू अपने नवनिर्मित पक्के आवास में सम्मानजनक, सुरक्षित और सुखद जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अब न बारिश का भय है, न टपकती छत, और न ही रात भर जागने की विवशता। उनके चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास और संतोष इस बात का प्रमाण है कि यह योजना उनके जीवन में सुखद बदलाव लेकर आई है।
डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण कार्य में ई-रिक्शों के उपयोग से स्वच्छता दीदियों को होगी श्रम व समय की बचत : उद्योग मंत्री श्री देवांगन
उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने किया स्वच्छता दीदियों को 80 नग ई-रिक्शों का वितरण
शहर की स्वच्छता में स्वच्छता दीदियों की महती भूमिका को किया रेखांकित, दी अपनी शुभकामनाएं
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025
प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने आज कोरबा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शहर की स्वच्छता में हमारी स्वच्छता दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः हम सबका यह सदैव प्रयास होना चाहिए कि उन्हें उनके कार्य संपादन हेतु आवश्यक सुविधाएं सहज रूप से मुहैया हों, उन्होंने कहा कि मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि हमारी स्वच्छता दीदियों को आज 80 नग ई-रिक्शा प्राप्त हो रहे हैं तथा डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण के कार्य में इन ई-रिक्शों के उपयोग से स्वच्छता दीदियों के श्रम व समय की बचत होगी तथा कम परिश्रम व कम समय में वे अपना कार्य पूरा कर सकेंगी।
इस आशय के उद्गार उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवंागन ने नगर पालिक निगम कोरबा की स्वच्छता दीदियों को ई-रिक्शों के वितरण कार्यक्रम में कहीं। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को और अधिक मजबूती देने की दिशा में ठोस कार्यवाही करते हुए डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण हेतु जिला खनिज न्यास मद से स्वीकृत व 02 करोड़ 84 लाख रूपये की लागत से 80 नग ई-रिक्शा का क्रय किया गया है तथा इन्हें अपने स्वच्छता संसाधन बेडे में शामिल किया जाना हैं। आज उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने इन सभी 80 ई-रिक्शा का वितरण स्वच्छता दीदियों को किया एवं उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी।
उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने स्वच्छता दीदियों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि आपके परिश्रम व कार्यनिष्ठा से कोरबा की स्वच्छता को मजबूत आधार मिल रहा है तथा आपकी बदौलत ही कोरबा देश में स्वच्छता के क्षेत्र में 08वें स्थान पर पहुंचा है, अब आगे बढ़ने की बारी है, स्वच्छ सर्वेक्षण में कोरबा देश में नम्बर 01 पर आए, मैं इस हेतु अपनी शुभकामनाएं देता हूॅं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के द्वारा की गई, वहीं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर, आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय सहित निगम की मेयर इन काउंसिल के सदस्यगण, पार्षदगण आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने इस मौके पर दिए गए अपने उद्बोधन में आगे कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश मंे स्वच्छ भारत मिशन संचालन कर स्वच्छता व साफ-सफाई के महत्व को हम सबके सामने रखा, इससे स्वच्छता के प्रति व्यापक जनजागरूकता आई तथा आमजन स्वच्छता के प्रति जागरूक हुए। उन्होने कहा के देश के करोड़ों परिवारों में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालयों का निर्माण हुआ तथा स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव आए।
इस मौके पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी स्वच्छता दीदियों की मेहनत की बदौलत हमारे कोरबा को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त हुआ है तथा विगत स्वच्छ सर्वेक्षण में वह देश में 08वें नम्बर पर पहुंचा, हमें विश्वास है कि आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण में हम देश में नम्बर 01 पर पहुंचेंगे। निगम क्षेत्र के देवतुल्य नागरिकबंधुओं को साफ-सफाई, सड़क रोशनी, पेयजल आपूर्ति, सड़क नाली आदि की बेहतर सुविधाएं प्राप्त हों तथा इन मूलभूत सुविधाओं के लिए उन्हे अनावश्यक परेशानी न उठानी पडे़।
विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी पहल
बंदकोना में 1.23 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण, बिजली-पानी-सड़क पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के दूरदराज, आदिवासी एवं पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने और इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत उन गांवों और बस्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां सड़क, संपर्क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा है।
इसी कड़ी में जशपुर जिले के बंदकोना ग्राम में मुख्य मार्ग से बस्ती तक 1.7 किमी लंबी सड़क का निर्माण पूरा किया गया है। 1.23 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह सड़क पहाड़ी कोरवा और अन्य ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। गांव की कुल जनसंख्या 115 है, और अब यह बस्ती सुगमता से मुख्यधारा से जुड़ चुकी है।
सड़क निर्माण के बाद ग्रामीण अब आसानी से बाजार, अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी, सोसाइटी और ग्राम पंचायत तक पहुंच पा रहे हैं। एम्बुलेंस एवं मालवाहक वाहन भी सीधे बस्ती तक पहुंच रहे हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं और दैनिक आवश्यकताओं की उपलब्धता में तेजी आई है। बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं भी लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण विकास कार्य के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वर्षों से जिस सुविधा का इंतजार था, वह जन-मन योजना के माध्यम से अब साकार हो रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जन-मन योजना का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ, पहाड़ी, आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों को पक्की सड़कों, सुरक्षित आवास, पेयजल, संपर्क एवं अन्य आधारभूत ढांचे से जोड़कर सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ हर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित सभी ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बेहतर बने।
छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें लागू : भूमि मूल्यांकन हुआ अधिक पारदर्शी, किसानों और आम नागरिकों को मिलेगा वास्तविक लाभ
वैज्ञानिक रेशनलाइजेशन से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में दरों का एकरूप निर्धारण
धान खरीदी में डिजिटल तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता
‘किसान तुंहर टोकन’ ऐप से धान विक्रय प्रक्रिया हुई और आसान
किसान शिवनारायण सिंह ने घर बैठे प्राप्त किया टोकन
रायपुर, 11 दिसम्बर 2025
डिजिटल तकनीक और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने प्रदेश में धान खरीदी प्रक्रिया को पहले की तुलना में और अधिक पारदर्शी, सरल और किसान-हितैषी बना दिया है। राज्य भर के उपार्जन केन्द्रों में इस वर्ष ऑनलाइन सुविधाओं का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे किसानों का समय, श्रम और लागत तीनों की बचत हो रही है।
सरगुजा जिले के अंबिकापुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत लिबरा के किसान श्री शिवनारायण सिंह ने इस व्यवस्था पर अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए बताया कि डिजिटल प्रणाली ने धान विक्रय प्रक्रिया को पूरी तरह सुगम बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास 57.20 क्विंटल धान का रकबा है और इस बार उन्होंने अपना टोकन घर बैठे ‘किसान तुंहर टोकन’ ऐप से प्राप्त किया। टोकन कटाने की प्रक्रिया में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
किसान शिवनारायण ने बताया कि दरिमा उपार्जन केंद्र पहुंचते ही समिति कर्मचारियों ने सहयोगात्मक व्यवहार किया। नमी परीक्षण के बाद उन्हें तुरंत बारदाना उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र में धान की तौल पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न हुई, जिससे किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हो रही है। बेहतर मूल्य प्राप्त होने से किसान खेती-किसानी को विस्तार देने और कृषि निवेश बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं।
शिवनारायण सिंह ने कहा कि धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे कृषि साधनों को मजबूत करने में कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रदेश में जिला प्रशासन द्वारा सभी धान उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा, सहयोग और पारदर्शिता को सर्वाेच्च महत्व दिया जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था और सतत निगरानी के कारण इस वर्ष धान खरीदी प्रक्रिया किसानों के लिए अधिक सहज, सरल और सुगम सिद्ध हो रही है।