छत्तीसगढ़ / बस्तर
जगदलपुर में नियम तोड़ने वाले निजी चिकित्सा संस्थानों पर जिला प्रशासन की सख्त कार्यवाही
क्लीनिक-लैब सील, भारी जुर्माना
बस्तर, 22 अक्टूबर 2025
बस्तर जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सा संस्थानों में अनियमितताओं के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। कलेक्टर श्री हरीश एस. के स्पष्ट निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक के नेतृत्व में नर्सिंग होम एक्ट 2013 और छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2010 के तहत गठित विशेष निरीक्षण दल ने जगदलपुर शहर के विभिन्न निजी क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक लैबों पर छापेमारी की। इस दौरान कई संस्थानों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद कठोर कार्रवाई की गई।
निरीक्षण दल ने पाया कि कुछ चिकित्सा संस्थान बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे थे, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। निरीक्षण के आधार पर कुम्हारपारा में संचालित डॉ. मोहनराव क्लीनिक में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर क्लीनिक को तत्काल सील कर दिया गया और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके साथ ही बालाजी डायग्नोस्टिक लैब द्वारा पूर्व में लगाए गए 20 हजार रुपए के जुर्माने का भुगतान न करने के कारण लैब को सील करने की कार्रवाई की गई। लालबाग में संचालित शिव शक्ति मेडिकल स्टोर के साथ संचालित क्लीनिक में छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2013 का पालन न करने पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने कहा, "यह कार्रवाई जिले के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य बस्तर की जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।" उन्होंने कहा कि इस तरह की औचक निरीक्षण और कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। हमारी प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी बिना किसी रियायत के जारी रहेंगी।"
इस अवसर पर जिला प्रशासन ने बस्तर के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे उपचार के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत चिकित्सा संस्थानों का ही चयन करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गैर-पंजीकृत या अनधिकृत संस्थानों में उपचार कराने से स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। नागरिकों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी अनियमितता की सूचना प्रशासन को दें।
जगदलपुर में प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को नागरिकों ने सराहा है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह कदम निजी चिकित्सा संस्थानों में मानकों का पालन सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस तरह की निरीक्षण प्रक्रिया को और सघन किया जाएगा। सभी निजी चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पंजीकरण और अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा भविष्य में और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव की पहल पर जशपुर और बस्तर जिले में 4 नवीन महाविद्यालयों के लिए 132 पद स्वीकृत
उच्च शिक्षा विभाग को कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति
बस्तर, 21 अक्टूबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 4 नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन महाविद्यालयों की स्थापना फरसाबहार (जिला-जशपुर), करडेगा (जिला-जशपुर), नगरनार (जिला-बस्तर) तथा किलेपाल (जिला-बस्तर) में की जाएगी।
मुख्यमंत्री की इस पहल से जशपुर एवं बस्तर जैसे जनजाति बहुल एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। दूरस्थ अंचलों की बेटियों और बेटों को अब कॉलेज की पढ़ाई के लिए अब अपने घरों से दूर अन्यत्र नही जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा की पहुंच हर इलाके में हो, इसके लिए राज्य सरकार शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है और सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि इन चारों महाविद्यालयों के लिए कुल 132 पदों (प्रति महाविद्यालय 33 पद) के सृजन की स्वीकृति के साथ ही कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति भी राज्य शासन ने दे दी है। स्वीकृत पदों में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ाधिकारी, सहायक ग्रेड-1 एवं प्रयोगशाला कर्मी आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय की इस पहल से आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं की शिक्षा, रोजगार एवं कौशल वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे। प्रदेश में समान और संतुलित शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।
तीरथगढ़ में बांस की नाव पर रोमांच
इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा: वन मंत्री श्री केदार कश्यप
रायपुर, 21 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात क्षेत्र में अब पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है। यहां बांस से बनी नावों पर राफ्टिंग की शुरुआत की गई है, जो रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम पेश करती है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने तीरथगढ़ पहुंचकर इस नई पहल का जायजा लिया और मूंगाबाहर नाले में स्वयं बांस की नाव (बांबू राफ्टिंग) और कायाकिंग का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ इको टूरिज्म को बढ़ावा देंगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ग्रामीण और वन क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से आजीविका के साधन उपलब्ध कराने प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर प्राप्त हों।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री कश्यप ने इको विकास समिति के सदस्यों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बस्तर संभाग में पर्यटन को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। तीरथगढ़ जैसे प्राकृतिक स्थलों में इको टूरिज्म की पहल न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगी।
अब गणपति, देवजी और हिड़मा फोर्स के निशाने पर
जगदलपुर। माओवादी आंदोलन के इतिहास में यह सप्ताह निर्णायक साबित हुआ है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बीते तीन दिनों के भीतर पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो (सीआरबी) सचिव भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य तथा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) प्रवक्ता रूपेश उर्फ विकल्प समेत 271 माओवादियों के सामूहिक रुप से पुर्नवासित होकर पुर्नजीवन की ओर बढ़ने के कदम ने संगठन की कमर तोड़ दी है।
इस घटना के साथ ही बस्तर में माओवादी हिंसा के विरुद्ध संघर्ष का अंतिम अध्याय प्रारंभ हो गया है। बस्तर, कोंडागांव और दंतेवाड़ा जिले पहले ही माओवादी प्रभाव से मुक्त घोषित हो चुके हैं। नारायणपुर, कांकेर और अबूझमाड़ के जंगलों से भी माओवादी प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है। यानी, बस्तर का आधे से अधिक भूभाग अब माओवादी मुक्त हो चुका है।
अब माओवादी प्रभाव केवल दक्षिण बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिलों के सीमावर्ती इलाकों तक सिमट गया है। सुरक्षा बलों की रणनीति अब इन्हीं क्षेत्रों में निर्णायक दबाव बनाने पर केंद्रित होगी। फिलहाल पोलित ब्यूरो सदस्य और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन प्रमुख देवजी, पूर्व महासचिव गणपति, केंद्रीय समिति सदस्य एवं बटालियन प्रभारी हिड़मा, तेलंगाना स्टेट कमेटी सचिव चंद्रन्ना और डीकेएसजेडसी सदस्य बारसे देवा को संगठन के शेष नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।
पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’: दण्डकारण्य के 210 माओवादी कैडर लौटे समाज की मुख्यधारा में
बस्तर, 17 अक्टूबर 2025


राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।

यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं—समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है—एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।

यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) श्री विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर श्री हरिस एस., बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे।
‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
बस्तर पुलिस ने दिवाली से पहले पकड़ी 100 पेटी गोवा व्हिस्की, तस्कर फरार
बस्तर । दिवाली से पहले छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस ने शराब तस्करों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मध्य प्रदेश से आ रही गोवा व्हिस्की की तस्करी करते हुए एक वाहन को पकड़ा, जिसमें भारी मात्रा में शराब थी। हालांकि, वाहन चालक पुलिस को देखकर फरार होने में कामयाब रहा। मिली जानकारी के अनुसार यह मामला बड़ांजी थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक वाहन (नंबर CG 17 LA 9565) में भारी मात्रा में शराब की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राम टकरागुड़ा-बेलर मार्ग पर रेड की कार्रवाई की।
घटना के दौरान वाहन चालक ने अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी वहीं छोड़ दी और फरार हो गया। पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली, जिसमें गोवा व्हिस्की की 100 पेटी बरामद हुई। बरामद शराब की कीमत लगभग 6 लाख 40 हजार रुपए आंकी गई है। पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर थाने लेकर आई। बड़ांजी थाना के पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी युवक की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और तस्करी में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को सराहा है और पुलिस से कहा कि ऐसे प्रयास तस्करी और अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण रखने में मदद करेंगे। पुलिस अधिकारियों ने भी जनता से अपील की है कि अवैध शराब की जानकारी मिलने पर तुरंत सूचना दें, ताकि कार्रवाई समय पर की जा सके। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई दिवाली के त्योहार के मद्देनजर की गई थी, ताकि अवैध शराब की बिक्री और तस्करी से संबंधित अपराधों को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि जिले में शराब तस्करी की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे मामलों में पुलिस कड़ी कार्रवाई करती रहेगी।
बड़ांजी थाना क्षेत्र में यह कार्रवाई अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शराब तस्करों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और आने वाले दिनों में ऐसे अन्य प्रयास भी किए जाएंगे। पुलिस ने यह भी कहा कि वाहन के साथ पकड़ी गई शराब की सही गिनती और मात्रा की पुष्टि के लिए आगे जांच जारी है। इसके अलावा, यह भी पता लगाया जा रहा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी और इसके वितरण में कौन-कौन लोग शामिल थे।
इस घटना से जिले में अवैध शराब तस्करी पर नियंत्रण के प्रयासों को और मजबूत माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक उदाहरण है और आगे भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। बस्तर पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि शराब तस्करी और बिक्री के मामलों में कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपी युवक की जल्द गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तत्परता को दिखाया है। पुलिस का मानना है कि त्योहार के मौसम में समय पर कार्रवाई करने से अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर नियंत्रण रखना आसान होगा और जनता को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ हुए नक्सलमुक्त — बस्तर में शांति और विकास का नया युग : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
हिंसा की राह देती है अंतहीन दर्द, आत्मसमर्पण देता है जीवन को नई दिशा- मुख्यमंत्री श्री साय
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन अभियान ऐतिहासिक सफलता की ओर
बस्तर, 16 अक्टूबर 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत आज नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति जीत रही है। उन्होंने कहा कि बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए — यह आँकड़े हमारे राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के अडिग संकल्प के साक्षी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब बहुत निकट है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। डबल इंजन सरकार की संवेदनशील नीतियों, बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस सकारात्मक परिवर्तन को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे न केवल सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि विकास और विश्वास की किरण भी हर गांव तक पहुँची है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से ही आज बस्तर भयमुक्त हुआ है और शांति की राह पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई अपने निर्णायक चरण में है। “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं ने बस्तर में संवाद, विकास और संवेदना की नई धरती तैयार की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति दो टूक है — हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो नक्सली शांति और विकास का मार्ग चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जो बंदूक उठाकर समाज में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने सभी नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को एक नई दिशा देते हुए एक नई शुरुआत का रास्ता खोलता है। अपनी मातृभूमि के भविष्य और अपने परिवारों के उज्जवल कल के लिए हथियार त्यागें और विकास की रोशनी में कदम रखें।”
उल्लेखनीय है कि देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर जानकारी कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल आतंक के गढ़ हुआ करते थे, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदना की नई कहानी भी है। बीते दो दिनों में देश में कुल 258 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके बेहतर भविष्य और देश की एकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और देश की प्रगति में सहभागी बनें।
बीजापुर की संस्कृति और स्वाद ने मोह लिया मन
बस्तर राइजिंग’ टीम ढोल-नृत्य संग हुई मंत्रमुग्ध
बस्तर, 15 अक्टूबर 2025


‘बस्तर राइजिंग’ अभियान के तहत बीजापुर पहुँचे प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक नृत्य, स्थानीय व्यंजन और लोक संस्कृति के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मुख्य कार्यक्रम ऐतिहासिक लोहा डोंगरी में हुआ, जहाँ विभिन्न विभागों द्वारा बीजापुर की कला, संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाते हुए सुंदर स्टॉल लगाए गए। ‘बस्तर राइजिंग’ के माध्यम से बीजापुर की संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और जनजीवन को जो पहचान मिल रही है, वह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाई भी प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में बीजापुर की आदिवासी रसोई के पारंपरिक स्वाद की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों ने सभी का मन जीता लिया। महुआ की चाय, चापड़ा चटनी, तिखुर का हलवा, मड़िया पेज और लांदा जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखकर प्रतिनिधिमंडल बीजापुर की सांस्कृतिक मिठास में डूब गया। प्रतिनिधियों ने इन व्यंजनों की परंपरागत विधियों और उनके सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी भी ली।
ढोल-मांदर की थाप पर थिरके प्रतिनिधि
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा गौर नृत्य। जब ढोल और मांदर की थाप बजी, तो पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी कलाकारों के साथ नृत्य में शामिल होकर बीजापुर की जीवंत संस्कृति का आनंद लेते दिखे। इस आयोजन में स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ, गारमेंट फैक्ट्री की महिला कर्मचारी, स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ी, बीजादूत स्वयंसेवक और अन्य स्थानीय लोग शामिल हुए। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक मिलन का अवसर बना, बल्कि बीजापुर की सामाजिक और आर्थिक संभावनाओं को सामने लाने वाला सशक्त मंच भी साबित हुआ।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री प्रतूल जैन, फ्रेनो डिसूजा और पलक चौधरी ने किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति, खान-पान और प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है। ‘बस्तर राइजिंग’ अभियान का उद्देश्य इस समृद्ध परंपरा को देश और दुनिया तक पहुँचाना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रीमती नम्रता चौबे, संयुक्त कलेक्टर श्री जागेश्वर कौशल, डिप्टी कलेक्टर श्री नारायण प्रसाद गवेल, जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बीजापुर की विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से अवगत कराया।
सिंचाई विभाग के निरीक्षण गृह और कार्यालय भवनों निर्माण हेतु 8 करोड़ रूपए से अधिक राशि स्वीकृत
रायपुर, 15 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासख्ण्ड-जगदलपुर में जल संसाधन उप संभाग के कार्यालय भवनों और निरीक्षण गृह निर्माण कार्य के लिए 8 करोड़ 9 लाख 89 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसमें निरीक्षण गृह के लिए 3 करोड़ 85 लाख 46 हजार रुपये तथा उप संभाग के कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 24 लाख 43 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। निर्माण कार्यों को कराने के लिए जल संसाधन मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
बस्तर के आसना में खुलेगा राज्य का पहला वन विज्ञान केन्द्र
संचालन के लिए सलाहकार समिति बनी
15 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ में बस्तर वन मंडल के आसना में राज्य के पहले वन विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जायेगी। राष्ट्रीय कैम्पा मिशन भारत सरकार द्वारा इसकी स्वीकृति दे दी गई है। राष्ट्रीय कैम्पा की 23वीं क्रियान्वयन समिति की बैठक में पायलट बेसेस पर झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़िसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में एक-एक वन विज्ञान केन्द्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ में बस्तर के आसना में वन विज्ञान केन्द्र शुरू होगा। इसके संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रमों के निर्धारण के लिए मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर वृत्त की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है। इस समिति में 8 विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।
वन विज्ञान केन्द्र की सलाहकार समिति में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल सहित जशपुर के श्री राजेश गुप्ता, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजीवन कुमार, रायपुर के श्री गिरीश कुबेर, श्री राजीव शर्मा, डॉ. एम.एल. नायक, श्री सुबोध मनोहर पांडे और पूणे महाराष्ट्र के डॉ. राहुल मुंगीकर को शामिल किया गया हैै। सरगुजा वृत्त के मुख्य वनसंरक्षक भी समिति के सदस्य होंगे। बस्तर के वन मंडलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव मनोनित किया गया है। समिति में नामांकित विषय विशेषज्ञों को वन विज्ञान केन्द्र के संचालन, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम निर्धारण में सहयोग के लिए किसी प्रकार का मानदेय या वेतन नहीं दिया जायेगा।
आगामी धान खरीदी कार्य को पारदर्शिता और सतर्कता के साथ करें संपादन- कलेक्टर श्री हरिस एस
समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के निर्देशों के क्रियान्वयन पर हुई चर्चा
जगदलपुर, 15 अक्टूबर 2025
कलेक्टर श्री हरिस एस ने कहा कि आगामी धान खरीदी कार्य को पारदर्शिता और सतर्कता के साथ संपादन किया जाए। उन्होंने धान खरीदी केन्द्र की प्राथमिक तैयारी के संबंध में चर्चा करते हुए 12 संवेदनशील धान खरीदी केन्द्रों के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा सीमावर्ती जांच नाकों पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सभी एसडीएम और तहसीलदार को अपने अनुभाग क्षेत्र में लगातार छापामार कार्यवाही करने के लिए निर्देशित भी किया। कलेक्टर श्री हरिस ने मंगलवार की शाम जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में समय सीमा की बैठक लेकर अधिकारियों को उक्त निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस के एजेंडा पर जिला स्तर पर महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु चर्चा करते हुए कहा कि शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का क्रियान्वयन शत-प्रतिशत किया जाना है। उन्होंने जिले में गिरदावरी कार्य के तहत डीसीएस रिपोर्ट एवं गिरदावरी रिपोर्ट में पाए गए अंतर का समितिवार जांच कर सुधार करवाने के निर्देश दिए। धान संग्रहण केंद्र से पिछले वर्ष की धान का उठाव नहीं हुआ उसके संबंध में भी चर्चा किए। समिति स्तर से भी एग्रीस्टैक में पंजीयन बढ़ाएं। पंचायतों में एग्रीस्टैक पंजीयन की सूचना के तहत चस्पा कर किसानों को जानकारी दी जाए, बिना एग्रीस्टैक पंजीयन के धान की विक्रय नहीं किया जा सकेगा इसलिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें। पीएम किसान सम्मान निधि में एक माह के अंदर लक्षित किसानों को चिन्हाकित करना है और हितग्राहियों के आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना एवं एफआरए हितग्राहियों की भी सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण के कार्य में लापरवाही होने पर संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही की जाए।
कलेक्टर ने पीएम सूर्यघर विद्युत योजना के क्रियान्वयन के संबंध चर्चा किया गया, जिले में लगभग 58 हितग्राहियों के घरों पर सूर्यघर सोलर प्लांट स्टॉलेशन किया गया है और लगभग 1007 आवेदन प्राप्त हुए हैं। कलेक्टर ने शहर व ग्रामीण क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों को भी प्रोत्साहित करते हुए आम नागरिकों को सूर्यघर योजना के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने बैंक से भी लोन दिलवाने की पहल करवाने कहा, साथ ही सभी ब्लॉक में 500-500 का लक्ष्य लेकर काम करवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किए ।
कलेक्टर ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के क्रियान्वयन में मॉडल के रूप में प्लान करके निर्माणाधीन आवासों को नवम्बर माह तक निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने कहा। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के 15 इंडिकेटर पर चर्चा किए। उन्होंने कहा कि पोषण पुनर्वास के बाद बच्चों का फालोअप स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं। साथ ही टेली कंसेल्टेशन, आरोग्य मंदिर की स्वास्थ्य जांच के लक्ष्य का बढ़ाने के निर्देश दिए। जिले में संचालित नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों की स्थिति की समीक्षा करते हुए नर्सिंग होम नियमों के पालन करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड, वय वंदना कार्ड के लिए आधार कार्ड बेस पर बनवाने की कार्यवाही करें। इसके अलावा किसी गांव में मलेरिया का केस मिलने पर पूरा गांव को लक्ष्य कर आवश्यक स्वास्थ्यगत कार्यवाही करें।
कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के ऑकेशनल शिक्षा के ट्रेड के तहत स्कूली स्तर पर संचालित कार्यों की सभी एसडीएम को जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम ई-चैनल की कार्यवाही पर कार्ययोजना बनाकर देने कहा। इसके अलावा शाला त्यागी की स्थिति की समीक्षा शाला विकास समिति की बैठक के दौरान प्रत्येक माह जरूर करें। साथ ही सरस्वती सायकल योजनांतर्गत सायकल वितरण स्थिति की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। अपार आईडी बनाने की प्रगति पर भी चर्चा किए और एक-एक ब्लॉक के अनुसार कार्यवाही करने कहा। साथ ही स्कूली बच्चों का आयुष्मान-आधार कार्ड बनाने पर पहल किए जाने के निर्देश दिए।
आदि कर्मयोगी की प्रगति, पीएम कौशल विकास के लाइवलीहुड कालेज में प्रशिक्षण की कार्ययोजना पर चर्चा किए। उन्होंने मत्स्यपालन को रबी सीजन के दौरान भी बढ़ावा देने हेतु नदी किनारे स्थित खेतों के किसानों को मत्स्यपालन के लिए प्रोत्साहित करने पर चर्चा किए। कलेक्टर ने सभी विभागों को जेम्स पोर्टल में उपलब्ध सामानों के खरीदी के लिए जिला स्तरीय समिति के माध्यम से जांच करवाने के बाद खरीदी करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी लाईन एजेंसी को दीवाली से पहले लंबित भुगतान को पूरा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन से लंबित बजट की मांग की जानकारी प्रत्येक माह 20 तारीख तक अनिवार्य तौर पर देने कहा। इस अवसर जिला पंचायत सीईओ श्री प्रतीक जैन, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल, श्री ऋषिकेश तिवारी, आयुक्त नगर निगम श्री प्रवीण वर्मा, सहायक कलेक्टर श्री विपिन दुबे सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
पटाखा दुकानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का परिपालन सुनिश्चित करने के निर्देश
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सम्बंधित दुकान संचालकों के विरुद्ध होगी कार्यवाही
नागरिकों से आतिशबाजी करने के दौरान सतर्कता बरतने की अपील
जगदलपुर, 15 अक्टूबर 2025
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री हरिस एस के निर्देशानुसार जिला सेनानी नगर सेना एवं जिला अग्निशमन अधिकारी द्वारा दीपावली पर्व के दौरान पटाखा दुकानों पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का परिपालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया गया है। उक्त सम्बन्ध में जारी परिपत्र में कहा गया है कि दीवाली पर्व के दौरान अस्थायी संरचना एवं पण्डालों में संचालित पटाखा दुकानों में निर्धारित सुरक्षा मापदंडों का पालन करने सहित अग्निशमन यंत्र को दुकानों पर रखते हुए आवश्यक सावधानियों को अपनाया जाए।
किसी भी तरह की चूक अथवा सुरक्षा का पालन नहीं किए जाने पर संबंधित संचालक व दुकानदार स्वयं जिम्मेदार होंगे और संबंधित दुकान संचालक के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। पटाखा दुकान रिहायशी एवं बाजार के पास नहीं खोला जाए। पटाखा दुकान का निर्माण किसी भी ज्वलनशील पदार्थ जैसे कपड़ा, बांस, रस्सी, टेंट इत्यादि का न होकर अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड द्वारा निर्मित होना चाहिए तथा अग्निमंदक घोल से उपचारित किया होना चाहिए। पटाखा दुकान एक दूसरे से कम से कम 03 मीटर साईड पर एवं एक दूसरे के सामने न बनाई जाए।
साथ ही प्रकाश व्यवस्था हेतु किसी भी प्रकार के तेल का लैंप, गैस लैंप एवं खुली बिजली बत्ती का प्रयोग प्रतिबंधित किया गया है। किसी भी पटाखा दुकान से 50 मीटर के अंदर आतिशबाजी प्रदर्शन प्रतिबंधित है। जिला अग्निशमन अधिकारी द्वारा आम नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि स्वयं की सुरक्षा के मद्देनजर आतिशबाजी के दौरान सतर्कता बरतने के साथ ही बच्चों को आतिशबाजी से मनाही करें। वहीं सूखे घास, पैरावट इत्यादि के पास कदापि आतिशबाजी न किया जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से 250 गांवों तक पहुंची बस सुविधा
बस्तर और सरगुजा संभाग में सफल क्रियान्वयन
14 अक्टूबर 2025

राज्य शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में लोगों को सस्ती और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ लागू की गई है। योजना का प्रथम चरण बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में शुरू किया गया है। अब तक 34 चयनित मार्गों में से 33 बसों का संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे कुल 250 नए गाँवों को पहली बार बस सुविधा मिली है।
परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य ऐसे ग्रामों को जनपद मुख्यालय, तहसील, नगरीय क्षेत्र और जिला मुख्यालय से जोड़ना है, जहाँ पहले बस सुविधा नहीं थी। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा, रोजगार के अवसर और आपसी संपर्क में बढ़ोतरी मिली है, जिससे ग्राम विकास को नई दिशा मिल रही है।
परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने बताया कि राज्य शासन द्वारा बस संचालकों को प्रोत्साहन के रूप में प्रथम वर्ष में 26 रूपए, द्वितीय वर्ष में 24 रूपए तथा तृतीय वर्ष में 22 प्रति किलोमीटर की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही बस संचालकों को मासिक कर से 3 वर्ष तक की पूर्ण छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि बस मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। चयनित मार्गों पर निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सबसे कम वित्तीय दर देने वाले आवेदक को बस संचालन की अनुमति दी जाती है, जिसके बाद परमिट जारी किया जाता है।
इस योजना के तहत सुकमा जिले में छह, नारायणपुर में 4, जगदलपुर में 1, कोंडागांव में 3, कांकेर में 5, दंतेवाड़ा में 1, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 2, सूरजपुर में 2, कोरिया में 3, जशपुर में 4 और बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 2 बस का संचालन किया जा रहा है। साथ ही, 9 नए मार्गों पर बस संचालन के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया जारी है।
उल्लेखनीय है कि विगत 5 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जगदलपुर में इस योजना की शुरुआत करते हुए बसों को हरी झंडी दिखाई। पहले चरण में यह योजना आदिवासी बहुल बस्तर और सरगुजा संभागों के गांवों को कवर करेगी और 34 बसों के जरिए 34 मार्गों पर सेवाएं शुरू की जाएंगी जो 11 जिलों के 250 गांवों को जोड़ेंगी।
“बस्तर राइजिंग” अभियान की टीम ने सुकमा जिले की यात्रा की शुरुआत पोटाकेबिन मुरतोण्डा से की
लाइवलीहुड कॉलेज, नक्सल पुनर्वास केंद्र और सक्षम कोचिंग के बच्चों से हुए रूबरू, बच्चों के उत्साह और प्रयासों की सराहना
सुकमा, 13 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ शासन जनसम्पर्क विभाग और बस्तर संभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित “बस्तर राइजिंग” अभियान ने रविवार को सुकमा जिले की यात्रा की शुरुआत की। यह विशेष अभियान पहले ही कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिलों का भ्रमण कर चुका है। सुकमा आगमन पर अभियान की टीम ने जिले के विकास, शिक्षा और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं का अवलोकन किया तथा स्थानीय युवाओं और बच्चों से संवाद स्थापित किया।
टीम ने सबसे पहले पोटाकेबिन मुरतोण्डा का दौरा किया, जहां उन्होंने बच्चों से आत्मीय बातचीत की और उनके अध्ययन, रचनात्मक गतिविधियों तथा सुविधाओं का जायजा लिया। टीम के सदस्यों ने बच्चों की कक्षाओं, मेराकी क्लास और लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए शिक्षकों से भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास और उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
इसके पश्चात टीम ने लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा का अवलोकन किया। यहां उन्होंने युवाओं को दिए जा रहे कौशल विकास प्रशिक्षणों की जानकारी ली। प्रशिक्षणार्थियों से संवाद के दौरान टीम ने कहा कि कौशल विकास से युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
इसके बाद टीम नक्सल पुनर्वास केंद्र पहुंची, जहां उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद किया और उनके जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों को जाना। टीम ने केंद्र में संचालित पुनर्वास कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल समाज में शांति और विश्वास स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
अभियान की अगली कड़ी में टीम सक्षम कोचिंग सेंटर पहुंची, जहां वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से मिले। टीम ने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि सशक्त समाज की नींव शिक्षा से ही रखी जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर रहने का संदेश दिया।
बस्तर राइजिंग की यह सात सदस्यीय टीम ‘प्लेसेज ऑफ पॉसिबिलिटीज़’ के संस्थापक प्रतुल जैन के नेतृत्व में कार्य कर रही है। उनके साथ परीना सिंघल, पलक चौधरी, आयुषी कपूर, निष्ठा जोशी, सदफ अंजुम और फ्रानो डिसिल्वा शामिल हैं। टीम के सदस्यों को शिक्षार्थ फाउंडेशन के श्री आशीष श्रीवास्तव ने सुकमा जिले की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं से अवगत कराया।
इस अवसर पर टीम के सदस्यों ने कहा कि बस्तर राइजिंग का उद्देश्य बस्तर संभाग में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन, नवाचारों और जनसहभागिता के उदाहरणों को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। उन्होंने सुकमा जिले में शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि यहां के युवाओं में अपार संभावनाएं हैं जो बस्तर को नई दिशा दे रही हैं।
जगदलपुर में छड़ी दिवस पर जागरूकता रैली
नेत्रहीन और श्रवण बाधित बच्चे दिखाएंगे हौसला
जगदलपुर, 13 अक्टूबर 2025
शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, जगदलपुर द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 अक्टूबर को छड़ी दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विद्यालय के दृष्टि और श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों द्वारा एक जागरूकता रैली निकाली जाएगी, जो सुबह 11 बजे सिरहासार भवन परिसर से प्रारंभ होकर तिरंगा चैक होते हुए पुनः सिरहासार भवन पर समाप्त होगी।
रैली के बाद एक संक्षिप्त सभा का आयोजन होगा, जिसमें विशेष अतिथियों के साथ-साथ विद्यार्थी भी छड़ी दिवस के महत्व पर प्रेरक भाषण प्रस्तुत करेंगे। यह आयोजन न केवल दिव्यांग बच्चों के साहस और प्रतिभा को उजागर करेगा, बल्कि समाज में उनकी स्वतंत्रता और समावेशन के प्रति जागरूकता भी फैलाएगा। सफेद छड़ी, जो नेत्रहीनों के लिए स्वायत्तता का प्रतीक है, इस दिन विशेष रूप से सम्मानित की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बच्चों की सुरक्षा और उत्साह को ध्यान में रखते हुए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सभी निवासियों से अपील की गई है कि वे इस नेक पहल में भाग लेकर दिव्यांग बच्चों का हौसला बढ़ाएं।
राष्टीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण-संवर्धन से राष्ट्रीय उद्यान में 600 से अधिक मैना दिखे
जगदलपुर। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों में पाई जाने वाली राष्टीय पक्षी बस्तर की पहाड़ी मैना के इसके संरक्षण के लिए एक अनुठा प्रयास किया जा रहा है, जिसके तहत मैना की संख्या में लगातार बढ़ोतरी रही है, जबकि इसके पूर्व पहाड़ी मैना को देखने के लिए कई किलोमीटर दूर पहाडिय़ों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक नवीन कुमार ने बताया कि स्थानिय समुदाय और विभाग के संयुक्त प्रयास से छत्तीसगढ़ का गौरव पहाड़ी मैना पहले से अधिक सुरक्षित और समृद्ध रूप में जंगलों में गूंज रहा है। परिणाम सकारात्मक मिलने लगे हैं जिसके तहत वर्ष 2022 में जहां केवल 50 से 60 मैना के झुंड को कोटमसर और नागलसर क्षेत्रों में देखा गया था।
वहीं वर्ष 2025 में 600 से अधिक मैना अब 25 गांवों में 50 से 60 झुंडों में विचरण करते देखे जा रहे हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक नवीन कुमार ने बताया कि छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना अपनी मधुर आवाज एवं इंसानों की बोली की नकल करने एवं स्पष्टता से बेलने और आकर्षक रूप रंग के लिए प्रसिद्ध है। जब कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पहाड़ी मैना की संख्या में कमी दर्ज की गई, तब वन विभाग कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान द्वारा इनके संरक्षण के लिए बस्तर पहाड़ी मैना संरक्षण एवं संवर्धन परियोजना प्रारंभ की गई। इस परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान से लगे ग्रामीण युवकों को मैना मित्र के रूप में शामिल किया गया ताकि उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जा सके और साथ ही संरक्षण कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्रीमती स्टायलो मंडावी ने आज बताया कि कांगेर घाटी के मैना मित्रों और मैदानी कर्मचारियों द्वारा घोंसलों के संरक्षण और अनुकूल आवासीय वातावरण सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। कठफोड़वा द्वारा बनाए गए प्राकृतिक छेदों में इनके घोंसलों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि इनके प्रजनन स्थलों को सुरक्षित रखा जा सके। पहाड़ी मैना की काली चमकदार पंखुडिय़ां और पीली कलगी इसे छत्तीसगढ़ की गौरव का प्रतीक बनाती हैं।
राज्य में इसके संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इन पक्षियों को निवास स्थान के नुकसान और अवैध व्यापार जैसे खतरों से बचाने हेतु वन विभाग द्वारा सतत सतर्कता बरती जा रही है। श्रीमति स्टायलो ने बताया कि जैसे-जैसे मानसून करीब आता है यह इनके प्रजनन काल के अंत का संकेत होता है। इस अवधि में वन विभाग के कर्मचारी और मैना मित्र दोनों ही इनके आवास की सुरक्षा और घोंसलों के संरक्षण में सक्रिय रूप से जुटे रहते हैं। अब मैना झूंड के झूंड में दिखाई देने लगी है।
बंद मकान का ताला तोड़कर चोरी करने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार
जगदलपुर। जिले के बस्तर थाना क्षेत्र अंर्तगत ग्राम बस्तर में बंद मकान का ताला तोड़कर तीन बोरी धान, गैस सिलेंडर और फ्रिज की चोरी हुई है। पुलिस ने चोरी करने वाले दो आरोपियों संतोष कश्यप (36) एवं सुखचंद कश्यप (28) को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी का सामान भी बरामद कर लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बस्तर थाना क्षेत्र की ही एक महिला 1 अक्टूबर को पुलिस थाना पहुंची थी, और इसने चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसने पुलिस को बताया कि वह अपने पति के साथ मजदूरी करने के लिए केरल गये हुए थे, घर बंद था। घर में फ्रिज सिलेंडर और तीन बोरी धान रखा हुआ था । जब कुछ दिन पहले घर पहुंची तो ताला टूटा मिला और घर में रखे इन सामानों की चोरी हो गई ।
आस-पास में भी पता लगाया लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली । बस्तर पुलिस ने महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर चोरों की तलाश में जुट गई। वहीं पुलिस को जांच में उसी इलाके के रहने वाले युवक संतोष कश्यप (36) और सुखचंद कश्यप (28) पर शक हुआ। पुलिस ने इनसे पूछ।ताछ में उन्होंने चोरी की बात कबूल ली। जिसके बाद दोनों चोरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कार्यवाही उपरांत आज रविवार को रिमांड पर रवाना किया गया।