छत्तीसगढ़ / बस्तर
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के घर हुए छापेमारी के विरोध में सुकमा बंद, 16 को धरना प्रदर्शन
जगदलपुर। भाकपा के नेता रामा सोढ़ी ने अपने जारी बयान में कहा कि तेंदूपत्ता घोटाले में सबसे पहले शिकायत करने वाले पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के निवास पर एसीबी और ईओडब्ल्यू का छापा मार कर आज उन्हें ही आरोपी बनाने का षढय़ंत्र कर उन्हें अपमानित करने और उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया है। भाकपा कड़े शब्दो मे इसकी निंदा करती है। उन्होने कहा कि मनीष कुंजाम और भाकपा नेताओं ने हमेशा यह प्रयास किया है कि आदिवासियों को तेंदूपत्ता की सही और पूरी कीमत मिले।
भाकपा नेता रामा सोढ़ी ने कहा कि मनीष कुंजाम के घर पर ईओडब्ल्यू के छापे के विरोध में 15 अप्रैल को सुकमा बंद का आह्वान किया गया है। वहीं 16 अप्रैल को धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया जाएगा। गौरतलब है कि तेंदूपत्ता घोटाले को लेकर जगदलपुर में रविवार को आयोजित एक पत्रवार्ता में सुकमा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस तेंदूपत्ता बोनस राशि 6 करोड़ 54 लाख 71 हजार 902 रूपये के घोटाले की सबसे पहले मैने ही शिकायत की थी, लेकिन आज उन्हें ही आरोपी बनाने की कोशिश की जा रही है।
यही नहीं बस्तर और बैलाडीला की भूमि को निजी कंपनियों जैसे कि मित्तल,अडाणी, जिंदल और ओडिशा की एक अन्य कंपनी को लीज पर दिया जा रहा है। इस लीज के खिलाफ आंदोलन न हो इसलिए मुझ पर एसीबी की कार्रवाई से भयभीत करने और दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है, पर हम डरने वाला नहीं। पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि ऐसा पहली बार देखने क मिला है कि किसी मामले के शिकायतकर्ता के खिलाफ ही एसीबी और ईओडब्ल्यू की जांच खड़ी कर दी जाए, जबकि तेंदूपत्ता बोनस वितरण मामले में उन्हें एक पाई तक नहीं मिला है।
ईओडब्ल्यू की जांच में उनके घर से दो मोबाइल व एक डेली डायरी के अलावा कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने दोनों मोबाइल के हैश वैल्यू भी उन्हें नहीं दिया गया, जबकि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जब भी मोबाइल जब्त किया जाता है, उसका हैश वैल्यू दिया जाना चाहिए, लेकिन ईओडब्ल्यू ने उन्हें हैश वैल्यू नहीं दिया। ऐसे में उनके दोनों मोबाइल से छेड़छाड़ करने की संभावना बढ़ जाती है। कुंजाम ने कहा कि तेंदूपत्ता बोनस घोटाले के असल गुनहगारों पर कार्रवाई करने बजाय सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई पर आमादा है। इसके पीछे सरकार की स्पष्ट नीति यही है कि वे गुनाहगारों को बचाना चाहती है।
मनीष कुंजाम ने कहा कि पूरे प्रदेश के 33 जिलों में से अकेला सुकमा जिला ही है, जहां जिला पंचायत में भाजपा का कब्जा नहीं हो सका। जबकि इससे पहले सरकार की तरफ से लगातार उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते रहे। वन विभाग के प्रदेश स्तर के अफसर ने उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन करने पर दबाव बनाने का प्रयास भी किया गया, जिसके लिए मुंह मांगी रकम की पेशकश भी की गई। इसके बावजूद कुंजाम ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और जिला पंचायत में कांग्रेस-भाकपा के गठबंधन का कब्जा करवाया।
शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, तभी सार्थक : सांसद
संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर जयंती पर मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को किया वर्चुअल उद्बोधन
उत्तर बस्तर कांकेर । संविधान निर्माता भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में वर्चुअल माध्यम से सामाजिक समरसता दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को संबोधित किया। उक्त कार्यक्रम में कांकेर सांसद भोजराज नाग, विधायक कांकेर आशाराम नेताम उपस्थित थे।
जिला पंचायत के सभाकक्ष में आज दोपहर आयोजित वर्चुअल कार्यकम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संबोधित करते हुए कहा कि अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केन्द्र के लिए प्रत्येक विकासखण्ड से 10-10 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सीएससी सर्विस प्रदाता के माध्यम से एमओयू की कार्यवाही की गई। साथ ही प्रधामंत्री आवास योजना का ज्यादातर लोगों को लाभान्वित करने आवास प्लस सर्वेक्षण कार्यक्रम के बारे में बताया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने गांवों में भू-जल स्तर में वृद्धि करने के संबंध में जानकारी देकर वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जिले से मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित सांसद श्री नाग ने संबोधित करते हुए कहा कि संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान आज भी प्रासंगिक है और सभी देशवासी उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अपने जीवन की दशा और दिशा में सकारात्मक विकास कर रहे हैं। सांसद ने ग्राम पंचायतों की विभिन्न समस्याओं से अवगत होने के लिए अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केन्द्र की स्थापना हेतु मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित सभी विकासखण्डों के सरपंच, सीएससी कार्यकर्ता को अंतिम व्यक्ति तक शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने की अपील की। विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद कांकेर विधायक श्री नेताम ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ’’मोर दुवार साय सरकार’’ के तहत आवास प्लस योजना के माध्यम से जिले के प्रत्येक पात्र हितग्राही को आवास दिया जाएगा। इसका लाभ लेने के लिए छूटे हुए हितग्राही अपना पंजीयन अवश्य कराएं। उन्होंने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि सभी व्यक्तियों को जल और पर्यावरण बचाने हरसंभव प्रयास करना चाहिए, जिससे भविष्य सुरक्षित और संरक्षित रह सके। इस अवसर पर सांसद श्री नाग द्वारा संविधान की प्रस्तावना का वचन भी कराया गया। इस अवसर पर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, नगर पालिका कांकेर के अध्यक्ष अरूण कौशिक, उपाध्यक्ष उत्तम यादव, जिला पंचायत सदस्य मृदुला भास्कर, महेश जैन, एसडीएम कांकेर अरुण वर्मा सहित सरपंच, पंच एवं समाज प्रमुखजन उपस्थित थे।
कॉलेज के प्रोफेसर से की लूटपाट, 3 लूटेरे गिरफ्तार
जगदलपुर । जगदलपुर शासकीय कॉलेज के एक प्रोफेसर को बालोद जिले में स्कूटी सवार दो युवकों से लिफ्ट लेना भारी पड़ गया। दोनों युवकों ने सुनसान जगह पाकर चाकू दिखाया और प्रोफेसर से 20 हजार रुपये नकद और मोबाइल लूट लिया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने चाकू से खरोंच मारकर मोबाइल का पासवर्ड खुलवाया और दुर्ग निवासी एक व्यक्ति के खाते में फोन पे से 1500 रुपये ट्रांसफर कर दिए। तकनीकी साक्ष्यों और ट्रांजेक्शन की जांच के आधार पर दल्लीराजहरा पुलिस ने बालाजी नगर खुर्सीपार (भिलाई)
निवासी राजा उर्फ रंजीत सिंह (32) और मीनाक्षी नगर बोरसी (दुर्ग) निवासी विक्की साहू (25) को 24 घंटे के भीतर दुर्ग से गिरफ्तार कर लिया है। पूरा मामला 9 अप्रैल की रात करीब 10 बजे का मामला है। जब कुसुमकसा निवासी प्रोफेसर प्रिंस जैन जगदलपुर से अपने घर लौट रहे थे। वे भानुप्रतापपुर होते हुए दल्लीराजहरा पहुंचे थे, लेकिन रात अधिक हो जाने और जल्द घर पहुंचने की हड़बड़ी में उन्होंने रास्ते में स्कूटी सवार दो युवकों से लिफ्ट मांग ली। लिफ्ट देने के बहाने दोनों युवक उन्हें लेकर आगे बढ़े और अरमुड़कसा के पास सुनसान खेत के पास लूट लिया।
सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा के अनुसार, सुनसान खेत में दोनों आरोपियों ने प्रोफेसर को चाकू दिखाकर 20 हजार रुपये नगद लूट लिए। इसके बाद मोबाइल का लॉक खोलने को कहा, लेकिन इनकार करने पर पीठ पर चाकू और सिर पर पत्थर से हमला किया। डर के मारे प्रोफेसर ने लॉक खोला, जिसके बाद आरोपियों ने मोबाइल से फोन पे के जरिए दुर्ग के एक व्यक्ति को 1500 रुपये ट्रांसफर कर दिए। दल्लीराजहरा टीआई टीएस पट्टावी ने बताया कि प्रोफेसर प्रिंस जैन जगदलपुर के शासकीय कॉलेज में पदस्थ हैं और घर जाने की जल्दबाजी में उन्होंने आरोपियों से लिफ्ट ले ली। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी दल्लीराजहरा घूमने आए थे। जिनमें से एक ने अपना ससुराल बालोद बताया है। दोनों ही आरोपी दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के रहने वाले, नशे के आदी और आदतन अपराधी हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इनके खिलाफ पहले से कितने आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
कांग्रेस-भाजपा के नेताओं के बीच जमकर लात-घूंसे चले, कोतवाली में देर रात नेताओं का लगा रहा जमावड़ा
जगदलपुर । जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र अंर्तगत दलपद सागर वार्ड में कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच में जमकर लात-घूंसे चले हैं। दोनों पक्षों के बीच मारपीट के बाद मामला कोतवाली थाना पहुंचा। बीती देर रात कोतवाली में कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का जमावड़ा था। दोनों पक्षों ने पुलिस थाने में लिखित शिकायत की है। भाजपा पार्षद के साथ हुई मारपीट के मामले में जगदलपुर नगर निगम के महापौर संजय पांडेय भी देर रात पुलिस थाना पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की गुंडागर्दी है। उन्होंने रात में थाना प्रभारी समेत पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं भाजपा पार्षद नरसिंह राव का आरोप है कि कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी रहे निकेत झा ने उन्हें घर में घुसकर मारपीट की है। जबकि, निकेत झा ने कहा कि भाजपा पार्षद नरसिंह राव ने उनके भाई को मारा, गाड़ी में तोड़-फोड़ कर मुझे फोन पर गलियां दी हैं।
भाजपा पार्षद नरसिंग राव ने कहा कि नगर निगम का चुनाव हुए लगभग 2 महीने का समय हो रहा है। जिन्होंने मेरे घर में घुसकर मेरे साथ मारपीट की वे चुनाव में मेरे विरूद्ध कांग्रेस से खड़े हुए थे, उन्हें हार पची नहीं है, हार की बौखलाहट है। चुनाव के दौरान भी इन लोगों ने गुंडागर्दी किए थे, उस समय तो वे सफल नहीं हो पाए। पार्षद का कहना है कि झगड़े की ऐसी कोई वजह नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से किसी न किसी तरह की बात को लेकर वे मेरे साथ उलझते रहते हैं। वार्ड में एक जगह काम चल रहा था। वे ठेकेदार के साथ भी मारपीट किए थे। उसने मुझे फोन किया था, मैंने उन्हें समझाया था कि झगड़ा मत करना। लेकिन कांग्रेस के लोग मेरे घर आ गए और मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट किए। वहीं कांग्रेस नेता निकेत झा का कहना है कि मेरे खेत में पानी बहाया जा रहा है। इसी बात को लेकर जब मैं पार्षद को फोन किया तो उन्होंने फोन पर मुझे गालियां दी। मेरे बड़े भाई की गाड़ी उनके घर के सामने से गुजर रही थी, तो उन्होंने गाड़ी को रोक कर गाड़ी में तोड़-फोड़ कर मेरे भाई और मेरे साथ भी मार-पीट की। मेरी प्रॉपर्टी को जबरदस्ती नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उनपर एफआईआर के लिए लिखित शिकायत की गई है।
कमिश्नर डोमन सिंह ने स्वयं आवेदन प्राप्त कर आवेदकों का किया उत्साहवर्धन
जगदलपुर। राज्य शासन के निर्देशानुसार मंगलवार को सुशासन तिहार 2025 के प्रथम चरण के तहत ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में आवेदन पत्र प्राप्त करने की शुरुआत हुई। जिसमें अपनी समस्या-शिकायत निराकरण के प्रति लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। इस दौरान कमिश्नर बस्तर संभाग श्री डोमन सिंह ने बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखण्ड के नगरनार तथा माड़पाल में ग्रामीणों से आवेदन पत्र प्राप्ति का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिए। उन्होंने इस मौके पर नगरनार एवं माड़पाल के आवेदन प्राप्ति स्थल पर स्वयं आवेदकों से आवेदन प्राप्त कर सम्बन्धित आवेदकों रतनी बाई एवं फूलमनी अमदिया का उत्साहवर्धन किया, साथ ही ड्यूटीरत कर्मचारियों से पंजी में आवश्यक प्रविष्टि करवाने के उपरांत पावती देने कहा। वहीं ग्रामीणों को जरूरत के अनुरूप आवेदन पत्र लिखने के लिए सहायता देने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए। कमिश्नर ने इस दौरान सुशासन तिहार में सबकी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु उपस्थित पंचायत पदाधिकारियों और अन्य लोगों को प्रोत्साहित किया।
कमिश्नर ने अपने भ्रमण के दौरान सुशासन तिहार के तहत आवेदन पत्र प्राप्ति स्थलों पर आम लोगों के बैठने की व्यवस्था हेतु छाया, दरी और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। वहीं आम जनता को सुशासन तिहार के बारे में अवगत कराने के लिए मैदानी अमले के जरिए प्रचार-प्रसार किए जाने कहा, साथ ही कोटवारों के माध्यम से मुनादी करवाने के निर्देश दिए। इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन ने बताया कि जिले में सुशासन तिहार को लेकर लोगों में भारी उत्साह है और आवेदकों से आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है।
आवेदन पत्र प्राप्ति हेतु कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने सहित नियमित तौर पर मॉनिटरिंग के लिए भी ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुशासन तिहार के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दीवार लेखन, बैनर-पोस्टर के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के जरिए नागरिकों को जानकारी दी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी करवाया जा रहा है और हाट-बाजारों में भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस दौरान अवगत कराया गया कि नगरनार में 59 तथा माड़पाल में 21 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। इस मौके पर अपर कलेक्टर श्री प्रवीण वर्मा, डिप्टी कमिश्नर आरती वासनिक और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जिले के ग्रामीण इलाकों में समस्या-शिकायतों के निराकरण के लिए ग्रामीणों ने दिखाया उत्साह
जगदलपुर । राज्य शासन द्वारा प्रदेश में सुशासन की सशक्त स्थापना, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जनसंवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन चरणों में आयोजित सुशासन तिहार के अंतर्गत मंगलवार से शुरू प्रथम चरण में जिले के ग्रामीण इलाकों में समस्या-शिकायतों के निराकरण सहित योजनाओं के तहत मांगों के समाधान के लिए लिए ग्रामीणों ने उत्साह दिखाया और अपने आवेदन पत्र ग्राम पंचायत मुख्यालयों में स्थापित समाधान पेटियों में डाला। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में भी नागरिकों ने अपने बुनियादी सुविधाओं से सम्बंधित समस्याओं के निदान हेतु आवेदन पत्र समाधान पेटियों में डाला। जगदलपुर ब्लॉक के कुरंदी ग्राम पंचायत मुख्यालय में उत्सव जैसा माहौल परिलक्षित हुआ जब ग्राम पंचायत कार्यालय में आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए सुबह ड्यूटीरत कर्मचारी पहुंचे तो पहले से ही ग्रामीण यहां अपनी समस्या सम्बन्धी आवेदन पत्र देने एकत्र हो गए थे।
मौके पर उपस्थित सोनाधर बघेल ने बताया कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। वहीं बीते महीने 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बुजुर्ग गुरु बघेल ने कहा कि वे वृद्धावस्था पेंशन योजना से लाभान्वित होने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी अपनी समस्या और मांगों के निराकरण की आस लेकर आवेदन पत्र देने यहां पहुंची थीं। आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए ड्यूटी में लगे माड़पाल के शिक्षक सूर्यपाल कश्यप ने बताया कि कई बुजुर्ग ग्रामीण आवेदन लिख नहीं पाते उनका आवेदन पत्र तैयार कर उन्हें दे रहे हैं।
ज्ञात हो कि सुशासन तिहार-2025 आयोजन का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है।
तीन चरणों में हो रहा सुशासन तिहार-2025 का आयोजन
सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। दूसरे चरण में लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। तीसरे एवं अंतिम चरण में 05 मई से 31 मई 2025 के बीच समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस तिहार को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने सहित https://sushasantihar.cg.nic.in एक पोर्टल भी बनाया गया है।
सुशासन तिहार के अंतर्गत 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों,जनपद पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, जिला कार्यालय इत्यादि में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। इन स्थलों पर समाधान पेटी रखी गई है, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें निःसंकोच लिखकर उसमें डाल सकें। आवेदन प्राप्त करने के लिए समाधान पेटी की व्यवस्था हाट-बाजारों में भी की गई है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी https://sushasantihar.cg.nic.in/ पोर्टल में व्यवस्था है, जनसाधारण कॉमन सर्विस सेंटर में भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
कभी था नक्सलगढ़, अब बन रहा विकास का गढ़
नसीम अहमद खान, उप संचालक
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी सीमावर्ती इलाके जिनकी पहचान कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में हुआ करती थी, अब वह तेजी से विकास के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। बस्तर के कैनवास पर अब एक नई तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। यह राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़-संकल्प के चलते संभव हो पाया है राज्य के घोर नक्सल प्रभावित जिलों में विकास की नई रेखाएं खींच रही हैं। कभी पिछड़ेपन और भय का पर्याय माने जाने बस्तर क्षेत्र में आज विकास की नई इबारतें लिखी जा रही हैं। विष्णु देव सरकार की जनहितैषी नीति, नक्सलवाद उन्मूलन अभियान और समग्र विकास ने इन क्षेत्रों में सकारात्मक और परिणाममूलक परिवर्तन की शुरुआत कर दी है।
राज्य के सात घोर नक्सल प्रभावित जिलों में से छह जिले कांकेर, बस्तर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर बस्तर संभाग के अंतर्गत आते हैं तथा एक जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी दुर्ग संभाग का हिस्सा है। इन जिलों में पिछले 15 महीनों में नक्सल उन्मूलन अभियान और विकास की रणनीति को समानांतर रूप से लागू करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों के पैर उखाड़ने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी नीतियों और योजनाओं की बदौलत अब आमजनता तेजी से विकास मुख्यधारा से जुड़ रही है। शासन-प्रशासन की सक्रियता, जनसंपर्क और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब इन क्षेत्रों में विश्वास और उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। इन जिलों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बड़ी तेजी से उपलब्ध कराई गई हैं। योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सुनिश्चित पहुंचाने का प्रयास भी लगातार जारी है।
मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम जनमन, आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी योजनाओं से न केवल इन क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी आमजन का सशक्तिकरण हुआ है। मनरेगा के तहत 29,000 नए जॉब कार्ड जारी हुए हैं, जिनमें 5,000 कार्ड ‘‘नियद नेल्ला नार‘‘ योजना में शामिल गांवों में बने हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में सातों जिलों में लगभग एक लाख आवास स्वीकृत हुए हैं, जो लक्ष्य का 107 प्रतिशत है। 15 महीनों में नियद नेल्ला नार के गांवों में 1100 आवास स्वीकृत हुए, जिसमें 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों की संख्या 19.24 लाख से बढ़कर 21.05 लाख हो गई है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वितों की संख्या में 20.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 3.61 लाख से अधिक हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से नक्सल प्रभावित जिलों में 46 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिनके दायरे में आने वाले 145 गांवों में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना चलाई जा रही है। इन गांवों में विशेष शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। नियद नेल्ला नार योजना के 124 गांव सड़क मार्ग से जुड़ चुके हैं, शेष 31 पर कार्य प्रगति पर है। 145 गांवों में मार्च 2024 तक 122 स्कूल क्रियाशील थे, जो अब बढ़कर 144 हो गए हैं। विद्यार्थियों की संख्या में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई है। क्रियाशील आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 193 से बढ़कर 202 हो गई है, और पंजीकृत बच्चों की संख्या में 30 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है। विशेष केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 1302 कार्य योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 308 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 999 कार्य प्रगति पर हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 220 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की गई थी, जिसमें से 200 करोड़ रुपये प्राप्त कर लिए गए और शत्-प्रतिशत् राशि का व्यय करते हुए आधारभूत संरचना, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि संबंधी कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस समूचे बदलाव का केन्द्र बिन्दु प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और जनकेंद्रित दृष्टिकोण है। छत्तीसगढ़ आज नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई जीतते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का यह रूपांतरण, प्रदेश की संकल्प शक्ति और जनसहभागिता का जीवंत उदाहरण है।
15 वर्ष बाद ताड़मेटला नक्सली वारदात के बलिदानी 76 जवानों की शहादत हुई विस्मृत
जगदलपुर । बस्तर संभाग के लिए नासूर बन चुके नक्सलवाद का पदार्पण 1980 के दशक में हुआ, बस्तर में पहली नक्सली वारदात 4 अप्रेल 1991 को बीजापुर के मरईगुडा-गोलापल्ली में जवानों के वाहन को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया गया, जिसमें 19 जवान बलिदान हुए थे, दूसरी नक्सली वारदात एक वर्ष बाद 6 जून 1992 को नारायणपुर के छोटेडोंगर में हुई, इसके बाद नक्सली वारदात का सिलसिला चल पड़ा । वहीं आज से ठीक 15 वर्ष पूर्व नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी नक्सली वारदात 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी।
चिंतलनार कैंप से लगभग पांच किमी दूर ताड़मेटला गांव में सीआरपीएफ के 75 और जिला बल के एक जवान बलिदान हो गए थे।
नक्सलियों ने 76 जवानों का कत्लेआम कर दिया, ऐसी घटना की इतिहास अनदेखी नहीं कर सकता, लेकिन आज 15 वर्ष बाद ताड़मेटला नक्सली वारदात के बलिदानी 76 जवानों की शहादत को लगभग विस्मृत कर दिया गया है। ताड़मेटला के बलिदानी 76 जवानों को लेकर सरकार से लेकर किसी भी संगठन के द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भी याद तक नही करना, अनुचित ही नही दुखद है।
यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस की सरकारें नक्सलियों की पोषक थी।भाजपा की 15 महिने की सरकार ने जैसे ही नक्सली खात्में के लिए आगे बढ़ी तो इसका परिणाम हम सबके सामने है। यदि कांग्रेस की सरकार नक्सलियों के खात्में का इरादा रखती तो बस्तर में नक्सली समस्या इतनी बड़ी होता ही नही। बस्तर में बदलते हालात के बीच नक्सलियों की मांद में सुरक्षा कैंप स्थापित होने से नक्सलियों को अपना आधार क्षेत्र छोड़कर भागना पड़ा है।
बस्तर में नक्सलियों के सफाए का अभियान जारी है, 15 वर्ष पहले ताड़मेटला की वारदात और पिछले 15 महीने मेंअलग-अलग मुठभेडों 400 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने का नक्सली संगठन की स्वीकार्यता के बाद भयभीत बडें कैडर के नक्सली अपने गढ़ को छोड़कर भाग खड़े हुए हैं ।
अब बस्तर में सक्रिय नक्सल संगठन में कोई बड़ा नेतृत्व नहीं बचा है। नेतृत्व के अभाव में नक्सलियों के पीएलजीए कैडर के नक्सली लगातार आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
जंगलों में भटक रहे निचले स्तर के लड़ाके जो आत्मसमर्पण नहीं कर पा रहे हैं, वे मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं। पिछले डेढ वर्ष में बस्तर संभाग के सातों.जिलों में 800 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
अश्चर्य तो तब होता है, जब नक्सलियों के द्वारा झीरम कांड में कांग्रेस के 25 से अधिक नेताओं को नक्सलियों ने मौत की नींद सुला दिया था, इसके बाद भी कांग्रेस ने नक्सलियों के खात्में के लिए कोई कदम नहीं उठाया यदि कांग्रेस की सरकार, उस दौर में भी नक्सलियों के खात्में के लिए प्रयास करती तो आज बस्तर में नक्सलियों की इतनी बड़ी समस्या खड़ी ही नहीं होती।
नक्सली संगठन के जिस टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) माह में सुरक्षाबलों पर हमलाकर अपनी ताकत का अहसास करवाते थे, उसी टीसीओसी माह में स्वयं नक्सली सुरक्षाबलों के हांथों मारे जा रहे हैं। सुरक्षाबलों के आक्रमक अभियान में बचे बस्तर में आतंक का पर्याय रहे एक करोड़ के ईनामी हिड़मा, गणेश उइके और गुडसा उसेंडी जैसे बड़े लीडर आंध्र, तेलंगाना और ओडिशा भाग चुके हैं। इनसे नीचे के कैडर के बड़े नक्सली बीते 15 महीने में मारे गए हैं। बड़े कैडर के नक्सली, बचे-खुचे लड़ाकों को अपने हाल पर छोड़कर स्वयं अंडरग्राउंड हो चुके है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार गणेश उइके उर्फ पी हनुमंता जो नक्सलियों के सैंट्रल कमेटी का सदस्य और दण्कारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का इंचार्ज था, वह इस वक्त ओडिशा में सक्रिय है। वहां किसी सुरक्षित स्थान पर वह छिपा हुआ है। इसी तरह रमन्ना की मौत के बाद दण्कारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहा केसीआर रेड्डी उर्फ वकील साहब तेलंगाना में कहीं छिपा हुआ है।
महाराष्ट्र का इंचार्ज नक्सली कोसा कभी अबूझमाड़ में बड़ा नाम था, वह अब महाराष्ट्र में सक्रिय है। गुडसा उसेंडी तेलगाना और एक करोड़ का ईनामी हिडमा के हैंदराबाद में होने की जानकारी सामने आ रही है। देवा बारसे, पारा राव और , दमोदर जैसे नक्सली अपनी जान बचाने अंडरग्राउण्ड हो गये हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार नक्सलवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर मात्र 6 रह गई है। इनमें छत्तीसगढ़ के 4 जिले बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा और झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला नक्सल प्रभावित बचा है। सरकार ने मार्च 2026 तक इस समस्या से मुक्ति का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में लगातार ऑपरेशन से हालात यह है कि नक्सलियों का कैडर मामूली रह गया है, बड़े नक्सली नेता दूसरे राज्यों में जाकर छिप गए है, और मध्यम स्तर के नक्सली जंगलों में भटक रहे हैं।
उल्लेखनिय है कि नक्सली गर्मी में टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चलाते हैं। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देख पाना संभव होता है। नदी-नाले सूखने के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है। नक्सली साल भर अपनी मांद में दुबककर साथियों की मौत, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को चुपचाप देखते हैं।
बाद में टीसीओसी में पलटवार करते हैं। अभी उनका टीसीओसी का सीजन ही चल रहा है। इस दौरान उन्होंने नारायणपुर में ब्लास्ट कर पांच जवानों की हत्या की। तर्रेम में घात लगातार 22 जवानों की हत्या की। टीसीओसी के दौरान 15 मार्च 2008 को बीजापुर के रानीबोदली कैंप में हमला किया जिसमें 55 जवान शहीद हुए। 2013 में 25 मई को झीरम में कांग्रेस के काफिले पर हमला कर 31 लोगों की हत्या की। 2017 में 25 अप्रैल को सुकमा के बुरकापाल में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए। 23 मार्च 2020 को मिनपा में 17 जवान शहीद हुए। यह सूची काफी लंबी है, इसी टीसीओसी के दौरान हुए ताड़मेटला की वारदात भयावह थी।
बस्तर आईजी सुदरराज पी का भी कहना है कि बस्तर में नक्सलियों का जनााधार खत्म हो गया हैं। जनता सुरक्षाबल के साथ हैं, वह बस्तर में विकास चाहती है। अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा कैंप खुलने से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना खत्म हो गया है। कई बड़े कैडर के नक्सली इसी खौफ से इलाका छोड़कर भाग गये हैं। जो बचे हैं, उनमें से भी कई अंडरग्राउंड हो चुके है। उन्होने कहा कि नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होना होगा अन्यथा मरना होगा।
जगदलपुर पहुंचे अमित शाह, बस्तर पंडुम महोत्सव में होंगे शामिल
बस्तर । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे है, वे बस्तर पंडुम महोत्सव में शामिल होंगे। साथ ही नक्सल मामलों की समीक्षा भी करेंगे। इसके अलावा वे नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों से भी वन टू वन मुलाकात करेंगे। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
राजेश मूणत का ट्वीट - "बस्तर पंडुम महोत्सव" के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हार्दिक स्वागत करता हूँ। अमित शाह मार्गदर्शन में हम छत्तीसगढ़ की प्रगति की नई दिशा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस मौके पर उनका आशीर्वाद हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।
विधायक किरण देव के समक्ष नानगुर मंडल के सैकड़ों युवाओं ने किया भाजपा प्रवेश
जगदलपुर । बस्तर जिला मुख्यालय के भाजपा जिला कार्यालय में नानगुर मंडल के सैकड़ों युवाओं ने अविनाश सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण देव के समक्ष भाजपा प्रवेश किया प्रवेश करने वाले युवाओं को विधायक किरण देव ने पटका पहनाकर भाजपा में प्रवेश करवाया।
युवाओं को संबोधित करते हुए किरण देव ने कहा आप सभी युवाओं का भाजपा में स्वागत है।
आप जिस मण्डल में निवासरत है, वहां के मंडल अध्यक्ष से मिलकर नियमानुसार प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर सूची बद्ध तरीके अपना नाम दर्ज करवाएं। उन्हाेने कहा कि भाजपा प्रवेश का तभी मतलब है, जब आप पार्टी के संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे।
जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया सरलीकृत
आम जनता से त्वरित पंजीयन करवाने की अपील
जगदलपुर । प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया को वर्तमान में सरलीकृत किया गया है। जिसके तहत जन्म मृत्यु की घटना जहां जिस जगह पर होती है वहां के पंजीयक संस्था यथा ग्राम पंचायत सचिव, शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी, स्थानीय नगरीय निकाय के प्रभारी द्वारा उक्त पंजीयन संबंधी प्रक्रिया संपादित की जाती है। इसे मद्देनजर रखते हुए जनसाधारण को जन्म-मृत्यु का पंजीयन त्वरित रूप से अर्थात तीन सप्ताह के भीतर अनिवार्यतः करवाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लागू जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम 1969 एवं जन्म-मृत्यु पंजीयन (संशोधन) अधिनियम 2023 पर आधारित जन्म-मृत्यु पंजीयन नियम 2001 के तहत जन्म-मृत्यु पंजीयन किया जा रहा है।
अधिनियम के अंतर्गत जन्म मृत्यु पंजीयन को समान एवं अनिवार्य बनाया गया है और पंजीकरण घटना के स्थान पर संबंधित पंजीयक के द्वारा ही किया जाता है। इसके बाद 16 सितम्बर 2014 से पंजीयक जन्म-मृत्यु पंजीयन नियुक्त किया गया है। जन्म मृत्यु पंजीयन अधिनियम के मुख्य प्रावधान जन्म या मृत्यु की घटना के घटित होने के 21 दिन के अंदर घटना का पंजीयन करवाना होता है। जन्म-मृत्यु होने के 21 दिन के अंदर घटना का पंजीयन एवं प्रमाण पत्र की पहली प्रति निशुल्क दी जाती है।
जन्म-मृत्यु पंजीयन का उद्देश्य जन्म प्रमाणपत्र जन्म के स्थान एवं जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण है। इसी तरह मृत्यु प्रमाणपत्र की जरूरत पैतृक संपत्ति एवं बीमा राशि का दावा करने के लिए होती है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत इसका महत्व है। साथ ही हर एक स्थान के लिए जन्म और मृत्यु का एक वैधानिक रजिस्टर है। यह सामाजिक-आर्थिक योजना बनाने हेतु जनसांख्यिकीय आंकड़ों, स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास और जनसंख्या नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। 01 अक्टूबर 2023 या उसके बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए जन्मतिथि एवं जन्म स्थान को प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, जन्मतिथि प्रमाण के रूप में आधार, पैन, पासपोर्ट जैसे दस्तावेज हेतु सरकारी व निजी नौकरी के लिए जन्मतिथि सत्यापन हेतु ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु विवाह पंजीयन हेतु अनिवार्य है।
जन्म-मृत्यु पंजीयन का पंजीयन अधिकार क्षेत्र के अनुसार ग्राम पंचायत, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल सहित निजी अस्पताल और शहरी क्षेत्र में घर पर होने की स्थिति में स्थानीय शहरी निकाय में किया जाता है। किसी जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीयन, घटना जहां घटित हुई हो वहीं पर करना होता है। लाभार्थी के घर के पास वाली पंजीयन इकाई में घटना का पंजीयन करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। लाभार्थी खुद प्रमाण पत्र में नाम नहीं जोड़ सकता है। नियमानुसार जहां बच्चे का जन्म हुआ हो उसी पंजीयन केन्द्र में नाम जोडने हेतु आवेदन करना चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं सहित दिव्यांगजनों को मिलेगा तीर्थ यात्रा का अवसर
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत लाभान्वित करने हेतु दिशा-निर्देश जारी
जगदलपुर । राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के क्रियान्वयन हेतु जारी दिशा-निर्देश के अनुसार योजनांतर्गत वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजनों के अलावा विधवा तथा परित्यक्त महिलाओं को भी योजना में शामिल किया गया है। जिन्हें निर्धारित 19 तीर्थ स्थानों में से चयनित तीर्थ स्थान की यात्रा कराई जायेगी। वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं की यात्राएं एक साथ संचालित की जाएगी। दिव्यांगजनों हेतु पृथक से विशेष यात्राएं संचालित की जाएगी। बस्तर जिले हेतु मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत क्रमशः 394 एवं 28 व्यक्तियों को यात्रा पर भेजे जाने का लक्ष्य प्रदान किया गया है। उक्त लक्ष्य में चयनित हितग्राही, सहायकों सहित शासकीय अनुरक्षक एवं सुरक्षा कर्मी आदि सम्मिलित होंगे। इसे दृष्टिगत रखते हुए 394 के लक्ष्य अनुसार तीर्थदर्शन यात्रा के लिए जिले के नगरीय निकाय एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शासन के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा हेतु 75 प्रतिशत हितग्राही ग्रामीण क्षेत्र से तथा 25 प्रतिशत हितग्राही नगरीय क्षेत्र से चयनित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा हेतु हितग्राहियों के चयन में 80 प्रतिशत हितग्राही बीपीएल अन्त्योदय एवं मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के कार्डधारी और 20 प्रतिशत हितग्राही एपीएल परिवारों के नागरिक होंगे जो आयकर दाता न हो। शासन द्वारा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत 19 तीर्थ स्थलों में से चिन्हांकित यात्रा का कार्यक्रम प्राप्त होने पर पात्रतानुसार चयनित व्यक्तियों को तीर्थयात्रा पर भेजा जा सकेगा। वरिष्ठ नागरिकों, विधवा, परित्यक्त महिलाओं और दिव्यांगजन के चयन यथा आवेदन पत्र प्राप्ति के समय यह ध्यान में रखा जाए कि वरिष्ठ नागरिक की आयु न्यूनतम 60 वर्ष से कम न हो, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं की आयु 60 वर्ष से कम हो एवं दिव्यांगजनों की आयु 18 वर्ष से कम न हो। वर्तमान में शासकीय सेवा में सेवारत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारी न हो एवं आयकर दाता न हों। आवेदक का मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा पर जाने हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम होने के संबंध में चिकित्सकीय प्रमाण पत्र पर चिकित्सक के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकाय में होगी आवेदन की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत लाभान्वित होने के लिए सम्बन्धित ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में आवेदन पत्र जमा किए जा सकेंगे। सम्बन्धित नगर निगम या नगर पंचायत क्षेत्र के आवेदन पत्र के साथ संबंधित वार्ड के पार्षद द्वारा आवेदक की आयु तथा प्रथम बार मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन यात्रा पर जाने के संबंध में प्रमाण पत्र की प्रति, आवेदक का रक्त समूह संबंधी प्रमाण पत्र आवेदन पत्र के साथ संलग्न किया जाए। स्वास्थ्य परीक्षण में अनफिट पाये जाने पर अनफिट यात्रियों को तीर्थयात्रा पर नहीं भेजा जाएगा। इस हेतु प्रत्येक नगरीय निकाय तथा जनपद पंचायत द्वारा प्रदत्त लक्ष्य अनुसार 25 प्रतिशत अतिरिक्त पात्र व्यक्तियों की आवेदन यथा सूची तैयार कर रखी जाएगी, जिन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा, चयनित हितग्राही के यात्रा पर नहीं जाने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची से पात्र हितग्राहियों को तीर्थयात्रा पर भेजा जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्र के आवेदक के आवेदन पत्र के साथ संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा आवेदक की आयु तथा प्रथम बार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत् यात्रा पर जाने के संबंध में प्रमाण पत्र की प्रति अनिवार्यतः संलग्न होना आवश्यक है।
आवेदक के आवेदन पत्र के साथ स्वयं का पासपोर्ट फोटो तथा राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र या उम्र के सत्यापन हेतु अन्य प्रमाण पत्र जिसमें आवेदक की जन्म तिथि अंकित हो की प्रति संलग्न होना चाहिए। साथ ही संपर्क हेतु दूरभाष नम्बर या मोबाइल नंबर भी उल्लेखित हो एवं आवेदन में वांछित जानकारियों पूर्णतः अंकित की गई हो आदि का भली-भांति परीक्षण कर लिया जाए। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक के साथ 21 से 50 वर्ष का व्यक्ति जो आवेदक द्वारा सहायक के रूप में नामित किया हो, वे जाने हेतु पात्र होंगे। इसी प्रकार से दिव्यांगजन तीर्थयात्री के साथ तीर्थ दर्शन यात्रा पर साथ जाने हेतु 21 से 50 वर्ष का व्यक्ति जो सम्बन्धित द्वारा नामांकित हो, वे सहायक के रूप में अनिवार्यतः भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा के लिए केवल श्रवण बाधित, मूक-बधिर, दृष्टि बाधित एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजन का ही चयन किया जाए। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश सभी जनपद पंचायतों एवं संबंधित नगरीय निकायों को प्रेषित कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं सहित दिव्यांगजनों को मिलेगा तीर्थ यात्रा का अवसर
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत लाभान्वित करने हेतु दिशा-निर्देश जारी
जगदलपुर । राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के क्रियान्वयन हेतु जारी दिशा-निर्देश के अनुसार योजनांतर्गत वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजनों के अलावा विधवा तथा परित्यक्त महिलाओं को भी योजना में शामिल किया गया है। जिन्हें निर्धारित 19 तीर्थ स्थानों में से चयनित तीर्थ स्थान की यात्रा कराई जायेगी। वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं की यात्राएं एक साथ संचालित की जाएगी। दिव्यांगजनों हेतु पृथक से विशेष यात्राएं संचालित की जाएगी। बस्तर जिले हेतु मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत क्रमशः 394 एवं 28 व्यक्तियों को यात्रा पर भेजे जाने का लक्ष्य प्रदान किया गया है। उक्त लक्ष्य में चयनित हितग्राही, सहायकों सहित शासकीय अनुरक्षक एवं सुरक्षा कर्मी आदि सम्मिलित होंगे। इसे दृष्टिगत रखते हुए 394 के लक्ष्य अनुसार तीर्थदर्शन यात्रा के लिए जिले के नगरीय निकाय एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शासन के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा हेतु 75 प्रतिशत हितग्राही ग्रामीण क्षेत्र से तथा 25 प्रतिशत हितग्राही नगरीय क्षेत्र से चयनित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा हेतु हितग्राहियों के चयन में 80 प्रतिशत हितग्राही बीपीएल अन्त्योदय एवं मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के कार्डधारी और 20 प्रतिशत हितग्राही एपीएल परिवारों के नागरिक होंगे जो आयकर दाता न हो। शासन द्वारा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत 19 तीर्थ स्थलों में से चिन्हांकित यात्रा का कार्यक्रम प्राप्त होने पर पात्रतानुसार चयनित व्यक्तियों को तीर्थयात्रा पर भेजा जा सकेगा। वरिष्ठ नागरिकों, विधवा, परित्यक्त महिलाओं और दिव्यांगजन के चयन यथा आवेदन पत्र प्राप्ति के समय यह ध्यान में रखा जाए कि वरिष्ठ नागरिक की आयु न्यूनतम 60 वर्ष से कम न हो, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं की आयु 60 वर्ष से कम हो एवं दिव्यांगजनों की आयु 18 वर्ष से कम न हो। वर्तमान में शासकीय सेवा में सेवारत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारी न हो एवं आयकर दाता न हों। आवेदक का मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा पर जाने हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम होने के संबंध में चिकित्सकीय प्रमाण पत्र पर चिकित्सक के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकाय में होगी आवेदन की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनांतर्गत लाभान्वित होने के लिए सम्बन्धित ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय में आवेदन पत्र जमा किए जा सकेंगे। सम्बन्धित नगर निगम या नगर पंचायत क्षेत्र के आवेदन पत्र के साथ संबंधित वार्ड के पार्षद द्वारा आवेदक की आयु तथा प्रथम बार मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन यात्रा पर जाने के संबंध में प्रमाण पत्र की प्रति, आवेदक का रक्त समूह संबंधी प्रमाण पत्र आवेदन पत्र के साथ संलग्न किया जाए। स्वास्थ्य परीक्षण में अनफिट पाये जाने पर अनफिट यात्रियों को तीर्थयात्रा पर नहीं भेजा जाएगा। इस हेतु प्रत्येक नगरीय निकाय तथा जनपद पंचायत द्वारा प्रदत्त लक्ष्य अनुसार 25 प्रतिशत अतिरिक्त पात्र व्यक्तियों की आवेदन यथा सूची तैयार कर रखी जाएगी, जिन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा, चयनित हितग्राही के यात्रा पर नहीं जाने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची से पात्र हितग्राहियों को तीर्थयात्रा पर भेजा जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्र के आवेदक के आवेदन पत्र के साथ संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा आवेदक की आयु तथा प्रथम बार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत् यात्रा पर जाने के संबंध में प्रमाण पत्र की प्रति अनिवार्यतः संलग्न होना आवश्यक है। आवेदक के आवेदन पत्र के साथ स्वयं का पासपोर्ट फोटो तथा राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र या उम्र के सत्यापन हेतु अन्य प्रमाण पत्र जिसमें आवेदक की जन्म तिथि अंकित हो की प्रति संलग्न होना चाहिए।
साथ ही संपर्क हेतु दूरभाष नम्बर या मोबाइल नंबर भी उल्लेखित हो एवं आवेदन में वांछित जानकारियों पूर्णतः अंकित की गई हो आदि का भली-भांति परीक्षण कर लिया जाए। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक के साथ 21 से 50 वर्ष का व्यक्ति जो आवेदक द्वारा सहायक के रूप में नामित किया हो, वे जाने हेतु पात्र होंगे। इसी प्रकार से दिव्यांगजन तीर्थयात्री के साथ तीर्थ दर्शन यात्रा पर साथ जाने हेतु 21 से 50 वर्ष का व्यक्ति जो सम्बन्धित द्वारा नामांकित हो, वे सहायक के रूप में अनिवार्यतः भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा के लिए केवल श्रवण बाधित, मूक-बधिर, दृष्टि बाधित एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजन का ही चयन किया जाए। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश सभी जनपद पंचायतों एवं संबंधित नगरीय निकायों को प्रेषित कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
तारमिस्त्री परीक्षा, 30 तक आवेदन
उत्तर बस्तर कांकेर । छत्तीसगढ़ शासन ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यालय कार्यपालन अभियंता (विद्युत सुरक्षा) एवं संभागीय विद्युत निरीक्षक संभाग-जगदलपुर के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, धमतरी एवं महासमुंद जिले के समस्त इच्छुक आवेदनकर्ता को सूचित किया जाता है कि तारमिस्त्री परीक्षा का आयोजन माह जुलाई-2025 में किया जायेगा। उक्त परीक्षा हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र 30 अप्रैल तक आमंत्रित किया गया है। आवेदन पत्र कार्यालय कार्यपालन अभियंता (विद्युत सुरक्षा) एवं संभागीय विद्युत निरीक्षक संभाग-जगदलपुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड क्रमांक-19 आजाद चौक, जगदलपुर (छत्तीसगढ़) पिन-494001 में कार्यालयीन समय में उपस्थित होकर निःशुल्क प्राप्त या जमा कर सकते हैं।
राज्य स्तरीय चयन ट्रायल 21 से
उत्तर बस्तर कांकेर । खेल एवं युवा कल्याण विभाग रायपुर के निर्देशानुसार वर्ष 2025-26 से जिले में संचालित की जाने वाली आवासीय खेल अकादमी हॉकी (बालक-बालिका), तीरंदाजी (बालक-बालिका) तथा फुटबॉल (बालिका) एवं एथलेटिक्स (बालक-बालिका) का खेल अकादमी में खिलाड़ियों के नवीन प्रवेश हेतु राज्य स्तरीय चयन ट्रायल का आयोजन किया जाएगा।
जिला खेल अधिकारी ने बताया कि 21 से 23 अप्रैल तक तीरंदाजी (बालक-बालिका) तथा फुटबॉल (बालिका) रायपुर कोटा एवं तीरंदाजी एरिना बालिका छात्रावास में किया जाएगा, जिसमें 21 अप्रैल को पंजीयन, 22 को शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं 23 को कौशल दक्षता परीक्षण किया जाएगा। इसी प्रकार हॉकी (बालक-बालिका) का आयोजन 25 से 27 अप्रैल कोटा एवं हॉकी स्टेडियम पिच-2 (बालक) छात्रावास के सामने रायपुर में किया जाएगा, जिसमें 25 को पंजीयन, 26 को शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं 27 अप्रैल को कौशल दक्षता परीक्षण किया जाएगा।
विधायक ने वाटरशेड यात्रा रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
उत्तर बस्तर कांकेर । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनांतर्गत परियोजना वर्ष 2021-22 से जिले में संचालित है। इसके कुशल संचालन एवं वाटरशेड विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आशाराम नेताम ने आज जिला कार्यालय परिसर में वाटरशेड यात्रा रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर एस. अहिरवार, उप संचालक कृषि जितेन्द्र कोमरा सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
परियोजना प्रबंधक डब्ल्यूसीडीसी सह उपसंचालक कृषि ने इस संबंध में बताया कि वाटरशेड यात्रा आज ग्राम पंचायत कोकपुर में निकाली गई। इसके अलावा ग्राम पंचायत खमडोढ़गी बांध और प्राथमिक शाला खमडोढ़गी से वाटरशेड यात्रा निकाली गई, जिसमें मांदरी नृत्य, फिल्म प्रदर्शन और मानव श्रृंखला बनाकर शपथ भी दिलाई गई। वाटरशेड यात्रा में निर्धारित गतिविधि अनुसार ग्राम पंचायत के सदस्य एवं ग्रामवासियों के द्वारा आवश्यक सहयोग किया जा रहा है।
धरातल पर योजनाओं का करें प्रभावी क्रियान्वयन : डोमन सिंह
जल जीवन मिशन के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश
जगदलपुर। कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करें। इस दिशा में मैदानी अमले को सक्रिय रखकर उनकी बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करें और नियमित तौर पर मॉनिटरिंग कर उपलब्धि हासिल करें। कमिश्नर गुरुवार को नारायणपुर जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टोरेट के सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में उक्त निर्देश दिए। उन्होंने जिले में नियद नेल्लानार और पीएम जनमन योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर क्रियान्वित किए जाने के निर्देश दिए। वहीं हर महीने के तीसरे शनिवार को स्वच्छता अभियान चलाकर कार्यालय एवं कार्यालय परिसर में साफ-सफाई किए जाने अधिकारियों-कर्मचारियों को सहभागिता निभाने प्रोत्साहित किया।
कमिश्नर ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास, सड़क, आंगनबाड़ी एवं स्कूल भवन, राजस्व नक्शे सुधार कार्य समय सीमा में पूर्ण कराने निर्देशित किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वनाधिकार पट्टा, जल जीवन मिशन, राजस्व, परिवहन, पशु चिकित्सा, शिक्षा सहित नक्सल प्रभावित परिवारों एवं समर्पित नक्सलियों के पुनर्वास हेतु किये जा रहे विशेष प्रयास की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। कमिश्नर ने आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने सम्बन्धी कार्यवाही सहित गौशाला एवं कांजी हाऊस संचालन की जानकारी ली और आवश्यकता के अनुसार आवारा मवेशियों को रखे जाने हेतु गौशाला एवं कांजी हाउस का विस्तार भी किये जाने कहा। उन्होंने नक्सली पीड़ित परिवारों के पुनर्वास हेतु शासन की नीति के तहत कार्यवाही कर प्रभावितों को सहायता प्रदान करने सहित शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किये जाने संवेदनशीलता के साथ पहल करने के निर्देश दिए।
कमिश्नर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मैदानी क्षेत्र के अधिकारी कर्मचारियों को अपने मुख्यालय में उपस्थिति सहित दायित्वों के प्रति सजग रखें, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ शतप्रतिशत गामीणों को मिल सके। उन्होंने जिले में संचालित नियद नेल्लानार योजनांतर्गत चलाए जा रहे मूलभूत सुविधा जैसे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित योजनाओं का समीक्षा करते हुए अंदरूनी ईलाके के लोगों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाने कहा। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया कि वर्षा के पूर्व पौधा तैयार करें ताकि बरसात प्रारंभ होने पर स्कूल,आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा अन्य स्थानों में रोपण किया जा सके।
कमिश्नर ने बैठक में वनाधिकार मान्यता पत्रों का डिजिटाइजेशन एवं फौती-नामांतरण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनांतर्गत नवीन पंजीकृत किसानों का ई-केवाईसी एवं आधार सीडिंग, जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रगति एवं पूर्ण योजनाओं को आरंभ करने सहित राजस्व अभिलेखों में त्रुटि सुधार प्रकरणों का निराकरण, भू-अर्जन अवार्ड के अनुरूप राजस्व अभिलेखों का दुरुस्तीकरण एवं सम्बन्धित विभागों को संशोधित अभिलेख प्रदाय करने, राजस्व नक्शे में सुधार के लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु अभियान इत्यादि की बिंदुवार समीक्षा की गई। कमिश्नर ने जिले के नक्सल पीड़ित परिवारों के सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति देने हेतु प्रगति लाने सहित उनके दस्तावेजोें का सत्यापन गंभीरता से करने कहा। वहीं जल जीवन मिशन के कार्यों में ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने जिले में नियद नेल्लानार योजनांतर्गत संचालित कार्यों सहित विकास गतिविधियों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन प्रगति के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। बैठक में कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, जिला पंचायत सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो, डीएफओ ससिगानंदन के., अपर कलेक्टर बीरेन्द्र बहादुर पंचभाई, अभिषेक गुप्ता, संयुक्त संचालक शिक्षा संजीव श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक कृषि महादेव ध्रुव एवं एसडीएम अभयजीत मण्डावी सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।