रायपुर। कला साहित्य और समाज सेवा को समर्पित संस्था "कौशल काव्य धारा" क का उद्घाटन समारोह रायपुर के वृंदावन हाल में सोल्लास संपन्न हुआ। समारोह के अध्यक्ष सुविख्यात भाषाविद डाॅ चितरंजन कर, मुख्य अतिथि छत्तीसगढ हिंदी साहित्य मंडल के अध्यक्ष आचार्य अमरनाथ त्यागी, तथा विशिष्ट अतिथियों में विख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज, शासकीय कालेज गुड़ियारी की प्राचार्या डॉ मधुलिका अग्रवाल ,डाॅ माणिक विश्व कर्मा,डाॅ विजय मिश्रा 'अमित'और डाॅ सुधीर शर्मा शामिल थे।
आरम्भ में सरस्वती वंदना के पश्चात् साहित्य विभूतियां का स्वागत शाल, पुष्प माला, श्रीफल से किया गया। इसी क्रम में वैभव प्रकाशन से प्रकाशित डाॅ. डागर रचित दो किताबें "सफलता के सौ सूत्र तथा वंदनावली" का विमोचन हुआ। इनके समीक्षक डाॅ विश्वकर्मा ने मानव जीवन को सफल एवं समाजोपयोगी बनाने की दृष्टि से किताबों को उत्कृष्ट बताया।
आगे विजय मिश्रा 'अमित' ने कहा राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. डागर ने साहित्य के पथ पर नई डगरबनाई है। छत्तीसगढ़ के साहित्य को समृद्ध करने की यह सराहनीय पहल है।
समारोह का अंतआभार प्रदर्शन सहित कौशल काव्य -धारा संस्था नव प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगी संकल्प के साथ हुआ।
कार्यक्रम में मूर्धन्य कवियों ने कवितायें पढ़कर गोष्ठी में चार चांद लगाए। डाॅ चितरंजन कर ने कहा- मैं खुद को हर बार मिटाया करता हूँ ।मैं खुद नया संसार बनाया करता हूँ।आचार्य अमरनाथ के अल्फाज थे'-तेरी दहलीज से सूरज को निकालता देखूं,एक दीया दूर तक राह में जलता देखूं। गिरीश पंकज ने कहा-कविता जीवन को रचने की चीज होती है मात्र मनोरंजन की वस्तु नहीं।डाॅ जे के डागर ने कहा-टांग जमाना खींचता, लोग करें उपहास,फिर भी जो आगे बढ़े, वह रचता इतिहास।