छत्तीसगढ़ / रायपुर

सदन में सवाल: MBBS डॉक्टर्स को ही क्यों दी जा रही सिविल सर्जन व CMHO की जिम्मेदारी?

 रायपुर । विधानसभा मानसून सत्र में गुरुवार को स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़ा एक अहम सवाल उठा। भाजपा विधायक राजेश मूणत ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से जानना चाहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में PG/MD योग्यताधारी वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद केवल MBBS डॉक्टरों को प्रभारी CMHO और सिविल सर्जन जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर क्यों पदस्थ किया जा रहा है?

मूणत का सवाल था कि क्या शासन जल्द ही 20 ऐसे MBBS डॉक्टरों को हटाकर योग्य PG/MD डिग्रीधारी वरिष्ठ चिकित्सकों को यह पदभार सौंपेगा?



स्वास्थ्य मंत्री ने दिया लिखित जवाब, हटाने से किया इनकार
प्रश्न का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि 20 ऐसे चिकित्सकों को CMHO/सिविल सर्जन पद पर पदस्थ किया गया है जिनकी शैक्षणिक योग्यता केवल MBBS है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक कार्य व्यवस्था के तहत किया गया है, और इन पदों के लिए PG या MD की योग्यता आवश्यक नहीं है।



मंत्री जायसवाल ने साफ किया, “इन अधिकारियों को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वर्तमान में प्रशासनिक जरूरतों और कार्यकुशलता के आधार पर नियुक्तियां की गई हैं।”

विपक्ष का तर्क: वरिष्ठता और विशेषज्ञता की अनदेखी
राजेश मूणत ने सदन में यह सवाल उठाते हुए कहा कि कई जिलों में वरिष्ठ, अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद, उनसे कनिष्ठ और केवल MBBS डिग्रीधारी डॉक्टरों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद सौंपे जा रहे हैं, जिससे डॉक्टरों में असंतोष और प्रशासनिक अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।

सवाल बना रहेगा: क्या भविष्य में पदोन्नति का आधार सिर्फ अनुभव होगा या विशेषज्ञता भी?


मंत्री के बयान से यह तो स्पष्ट हो गया है कि सरकार MBBS डॉक्टरों को भी प्रशासनिक पदों के लिए योग्य मानती है, लेकिन यह बहस अब तेज हो सकती है कि क्या विशेषज्ञता और उन्नत शिक्षा (PG/MD) को नजरअंदाज करना उचित है, खासकर तब जब स्वास्थ्य ढांचा लगातार चुनौती झेल रहा हो।

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