छत्तीसगढ़ / रायपुर

अपेक्षाओं के साथ कम होता है क्रोध : मनीष सागरजी महाराज

 क्षमा पर्व बुधवार को, पटवा भवन में होगा प्रतिक्रमण

रायपुर । टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में पर्यूषण पर्व के सातवें दिन मंगलवार को धर्मसभा में परम पूज्य उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने सीख दी कि जब हमारी अपेक्षाएं कम होती हैं, तो स्वाभाविक रूप से क्रोध और निराशा का भाव भी कम हो जाता है। उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जीवन में सजगता के साथ-साथ सहजता का होना अत्यंत आवश्यक है। हमें सभी को देने की भावना रखनी चाहिए, लेकिन किसी से कुछ लेने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। 

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि हमें सभी की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। हमें बड़ों को समझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बड़ों के अनुभवों और ज्ञान से समझने की कोशिश करनी चाहिए। बड़ों को समझाने का प्रयास करना उनके प्रति असम्मान का प्रतीक है। ये बड़ों के अनुभव की अनदेखी करने जैसा भी है। जब हम बड़ों से समझते हैं, तो उनके जीवन के अनुभव हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। 

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जो होना है वही होगा, यह सिद्धांत एक हद तक सही है। सर्वदा हम इसी को मान लें, यह उचित नहीं है। अपने मोह का पोषण कर इसे हमेशा उचित नहीं मान सकते। परमात्मा ने कहा है कि पुरुषार्थ को मुख्य करो। जहां गलत पुरुषार्थ कर रहे मानो मैं गलती कर रहा हूं। ऐसा मत मानो जो होना है वह होगा ही। सिद्धांतों को एकांत से नहीं मानना चाहिए।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि परमात्मा ने साधना पुण्य कमाने के लिए नहीं की। अपने कर्मों का क्षय करने के लिए परमात्मा ने साधना की। यदि कर्मों का क्षय करने की साधना होगी तो पुण्य का संचय अपने आप ही हो जाता है। जो आत्मा पूर्व भव में स्वार्थ से ऊपर उठकर आत्म कल्याण की साधना करती है। इसके कारण पुण्य कर्मों का संचय होता है। एक व्यक्ति ऐसा भी होता है जो पुण्य कमाने के लिए पुण्य करता है। वास्तव में वह व्यक्ति भी पुण्यशाली नहीं होता जिसको पता चलने पर की जीव दया करने से पुण्य मिलता है। ऐसे यदि वह पुण्य करता है तो यह स्वार्थ है। पुण्य हमारी परिणीति व हमारी भावना में होना चाहिए।

क्षमा पर्व बुधवार को, पटवा भवन में होगा प्रतिक्रमण  : 

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का समापन संवत्सरी पर्व के साथ होगा। 27 अगस्त को सभी एक दूसरे से क्षमायाचना करेंगे। संपूर्ण ब्रह्मांड के 84 लाख योनि के सभी जीवों से अपने ज्ञात अज्ञात सभी भूलों के लिए क्षमायाचना की जाएगी। श्रावकों का प्रतिक्रमण पटवा भवन में दोपहर 2:30 बजे से होगा। श्राविकाओं का प्रतिक्रमण विवेकानंद नगर के श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में दोपहर 3:30 से होगा। सुबह पौने सात बजे लाभार्थी परिवार द्वारा उपाध्याय भगवंत को बारसासूत्र बोहराने की क्रिया प्रारंभ होगी। साथ ही पांच ज्ञान की पूजा प्रारंभ होगी। इसके पश्चात उपाध्याय भगवंत द्वारा प्रतिक्रमण के महत्व पर सभी को चिंतन दिया जाएगा। इससे सभी पर्युषण पर्व का लक्ष्य हासिल कर सकें।

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