दादा गुरुदेव के आशीर्वाद के साथ खरतरगच्छ के राष्ट्रीय कैलेण्डर का विमोचन
रायपुर - खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणि प्रभ सूरीश्वर द्वारा प्रतिष्ठित सीमंधर स्वामी जैन मंदिर एवं चमत्कारी जैन दादाबाड़ी में पूनम और अमावस्या की आराधना साधना का विधान विगत सात वर्षों से निरंतर श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हो रहा है। गुरुभक्तों के समर्पण और आस्था के चलते यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है, इसी कारण यह दादाबाड़ी चमत्कारी जैन दादाबाड़ी के रूप में विख्यात है। इस अवसर पर खरतरगच्छ युवा परिषद द्वारा प्रकाशित कैलेंडर का विमोचन ट्रस्ट अध्यक्ष संतोष बैद, महासचिव महेन्द्र कोचर, ट्रस्टी नीलेश गोलछा एवं डॉ. योगेश बंगानी की उपस्थिति में दादागुरुदेव के आशीर्वाद से संपन्न हुआ।
पूजा विधान का शुभारंभ करते हुए ट्रस्ट अध्यक्ष संतोष बैद ने कहा कि गुरु भक्ति से ही यह आध्यात्मिक परंपरा सतत आगे बढ़ रही है। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा नारियल और अक्षत समर्पण के साथ संगीतमय बड़ी पूजा प्रारंभ की गई। प्रसिद्ध भजन गायक वर्धमान चोपड़ा ने “गुरु पारिख सूर तरु रूप, सुगुरु दूजो तो नहीं” भजन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।ट्रस्ट अध्यक्ष संतोष बैद एवं महासचिव महेन्द्र कोचर ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्वप्रथम अष्टप्रकारी पूजा के अंतर्गत जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य और फल अर्पण कर संपूर्ण विधि-विधान एवं संगीतमय चौपाइयों के साथ पूजा संपन्न की गई। इसके पश्चात नवमी पूजा में वस्त्र समर्पण किया गया।दशम पूजा के अवसर पर मार्बल की कलात्मक छतरी में विराजित चारों दादागुरुदेव के सम्मुख चांदी की छतरी सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा सिर पर धारण कर शंख ध्वनि और घंटानाद के साथ दो फेरी दी गई। भावपूर्ण ध्वज पूजन के साथ “हरख भरी रे देवा हरख भरी” भजनों एवं मंत्रोच्चार के साथ शिखर पर ध्वजा विराजित की गई।भक्तिमय पूजा महोत्सव में दिप्ती बैद ने “कैसे कैसे अवसर में गुरु राखी लाज हमारी” एवं “मोको सबल भरोसा तेरा चंद्रसूरी पट्टधारी” जैसे गुरु महिमा के भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।