शराब घोटाला: निरंजन दास समेत 31 अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क
रायपुर, 5 जनवरी 2026 - छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास सहित 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। ईडी के अनुसार इस घोटाले से राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
ईडी ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि रायपुर आंचलिक कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह अस्थायी कुर्की की है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें आगे और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई गई है।
78 अचल और 197 चल संपत्तियां कुर्क
कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कीमत करीब 21.64 करोड़ रुपये बताई गई है। इनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा 16.56 करोड़ रुपये मूल्य की 197 चल संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं, जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
सिंडिकेट बनाकर चलाया गया अवैध कारोबार
ईडी की जांच में सामने आया है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े एक आपराधिक सिंडिकेट ने आबकारी विभाग पर कब्जा कर लिया था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और सीएसएमसीएल के तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था संचालित की।
इस सिंडिकेट ने सरकारी दुकानों के जरिए अवैध देसी शराब के निर्माण और बिक्री के लिए तथाकथित “पार्ट-बी” योजना चलाई। नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों का इस्तेमाल कर शराब सीधे भट्टियों से दुकानों तक पहुंचाई जाती थी, जिसमें सरकारी गोदामों को पूरी तरह दरकिनार किया गया। यह सब आबकारी अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत से किया गया।
निरंजन दास ने अकेले कमाए 18 करोड़ से ज्यादा
जांच में यह भी सामने आया है कि पार्ट-बी शराब की बिक्री की अनुमति देने के बदले आबकारी अधिकारियों को प्रति मामले 140 रुपये का कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने इस घोटाले से 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की। आरोप है कि उसे इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए हर महीने करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत मिलती थी।
कुल मिलाकर 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (पीओसी) हासिल की।
एसीबी-ईओडब्ल्यू की एफआईआर के बाद शुरू हुई ईडी जांच
यह मामला रायपुर स्थित एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी के संज्ञान में आया। एफआईआर भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। पुलिस जांच में शराब घोटाले से राज्य को भारी राजस्व नुकसान और आरोपियों को समानुपातिक लाभ मिलने की पुष्टि हुई है।
ईडी का कहना है कि वर्तमान कुर्की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के राजस्व की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी किस तरह गहरी साजिश और भ्रष्टाचार में शामिल थे। जांच अभी जारी है।