कवर्धा बीईओ कार्यालय बना विवादों का गढ़: करोड़ों की गड़बड़ी के बाद अब मानसिक प्रताड़ना का आरोप, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कबीरधाम |
2026-04-04 18:26:06
कवर्धा।
कवर्धा विकास खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय इन दिनों विवादों का केंद्र बन चुका है। पिछले माह करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें विभागीय जांच के बाद बाबुओं को निलंबित किया गया। मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब उसी कार्यालय से मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक दबाव का नया आरोप सामने आ गया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा बीईओ संजय दुबे पर मानसिक प्रताड़ना और कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई है। इस शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच के आदेश जारी किए गए हैं और पांच दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक ही कार्यालय से बार-बार गंभीर अनियमितताओं और विवादों की खबरें क्यों सामने आ रही हैं।
पिछले महीने उजागर हुए वित्तीय गड़बड़ी के मामले में करोड़ों रुपये के लेन-देन में अनियमितता की बात सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजी खामियां और प्रक्रिया उल्लंघन पाए गए थे, जिसके बाद संबंधित बाबुओं को निलंबित किया गया। उस समय भी विभाग की साख पर बट्टा लगा था और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे।
अब ताजा मामला मानसिक प्रताड़ना का है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि कार्यालय के भीतर न केवल वित्तीय अनुशासन कमजोर है, बल्कि प्रशासनिक वातावरण भी अस्वस्थ है। एक ओर आर्थिक अनियमितता, दूसरी ओर आपसी टकराव और दबाव की शिकायत—इन दोनों घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि बीईओ कार्यालय में हालात सामान्य नहीं हैं।
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कार्यालय में कार्यशैली को लेकर लंबे समय से असंतोष व्याप्त है। आरोप है कि निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और अधीनस्थ कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने विभागीय व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि प्रशासनिक तंत्र ही विवादों में घिरा रहे तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ता है। विकास खंड स्तर का कार्यालय योजनाओं के क्रियान्वयन और शैक्षणिक संचालन का अहम केंद्र होता है। ऐसे में वहां की अव्यवस्था पूरे ब्लॉक की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। केवल निलंबन और जांच से आगे बढ़कर प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता है।
पारदर्शिता, जवाबदेही और स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बिना ऐसे विवाद थमने वाले नहीं हैं।
फिलहाल, सभी की निगाहें वर्तमान जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं। लेकिन यह तय है कि एक के बाद एक सामने आ रहे विवादों ने कवर्धा बीईओ कार्यालय की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है। यदि उच्च स्तर से ठोस और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह विवाद आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।