छत्तीसगढ़ / रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधासभा के पांच दिवसीय सत्र का आज दूसरा दिन है। आज की कार्यवाही में हंगामे के आसार है। जानकारी के मुताबिक आज भी सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार हंगामे के आसार है। आज सदन में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठेगा। सदन के पटल पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी बकाया कर, ब्याज एवं शास्ति के निपटान का बिल पेश करेंगे। इसके अलावे सात विभागों की वार्षिक रिपोर्ट भी सदन में रखी जाएगी।
बता दें कि मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष के विधायक के सवाल पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा घिर गए। मामला पटवारी से राजस्व निरीक्षक की विभागीय परीक्षा में अनियमितता से जुड़ा था। भाजपा के विधायक राजेश मूणत ने सवाल पूछा कि अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब दिया कि अभी ईओडब्ल्यू जांच कर रही है।
इसी बीच विपक्ष ने भी वर्तमान सरकार का मुद्दा बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग कर दी। तब मंत्री ने कहा कि ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। अगले सत्र से पहले कार्रवाई हो जाएगी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। इधर, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती में रोस्टर का पालन नहीं करने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि 10 विभागों में से 8 विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। अभी जांच चल रही है।
आस्था ने पार किया संकल्प का लक्ष्य: ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ से 22,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या दर्शन
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ऑपरेशन सिन्दूर: भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण- मुख्यमंत्री श्री साय
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मुख्यमंत्री श्री साय ने शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के बच्चों से की आत्मीय मुलाकात
मुख्यमंत्री श्री साय ने शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के बच्चों से की आत्मीय मुलाकात
रायपुर, 15 जुलाई 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले की सुदूरवर्ती पाँच ग्राम पंचायतों के बच्चों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना और राजधानी रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ बस्तर के कोने-कोने तक पहुँचाने हेतु कृतसंकल्पित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से सौहार्दपूर्ण बातचीत करते हुए कहा कि इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से आपको राजधानी रायपुर को निकट से देखने-समझने का अवसर मिला है। इसी तरह राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में भी तीव्र गति से विकास कर रही है। उन्होंने बताया कि सुदूर अंचलों में अब सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो रहे हैं, और जहां-जहां ये कैंप पहुँचते हैं, वहाँ चौतरफा विकास के द्वार खुलते हैं। अब अधिकांश स्थानों पर शासकीय राशन दुकानों की स्थापना हो चुकी है और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँच रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में बस्तर पूरी तरह से नक्सलमुक्त क्षेत्र होगा।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से मुस्कराते हुए पूछा — "बस्तर के शेर बच्चों ने रायपुर के जंगल सफारी में शेर देखा या नहीं?" इस मजाकिया अंदाज़ पर बच्चों सहित उपस्थित सभी लोग ठहाके लगाकर हँस पड़े।
श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। बस्तर के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर रही है, ताकि क्षेत्र के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायकगण श्री ईश्वर साहू एवं श्री सुशांत शुक्ला भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले की पाँच सुदूर ग्राम पंचायतों—पालाचलमा, पोटकपल्ली, एलमागुंडा, ताड़मेटला एवं गोलापल्ली—के 100 स्कूली बच्चे राजधानी रायपुर के दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर आए हैं। भ्रमण के दौरान इन बच्चों को मंत्रालय, जंगल सफारी, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया गया। विदित हो कि नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर के नक्सल प्रभावित पाँच जिलों के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
विष्णु के सुशासन में सोलर हाई मास्ट से रोशन हो रहा सुकमा
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आह्वान — 'वेटलैण्ड मित्र' बनें, जैविक विरासत को बचाएं
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छत्तीसगढ़ में खाद की कोई कमी नहीं
डीएपी की कमी को पूरा करने एनपीके, एसएसपी और नैनो डीएपी का भरपूर स्टॉक
राज्य में 1,79,000 बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी
रायपुर, 14 जुलाई 2025
राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है।
चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी।
यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नवीन विधानसभा परिसर में किया पौधरोपण
रायपुर, 14 जुलाई 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर गुलमोहर का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री श्री साय 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' वृक्षारोपण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्य एवं विधानसभा के सभी सदस्यों ने भी गुलमोहर का पौधारोपण किया।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोंपज संघ श्री अनिल साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय,मुख्य वन संरक्षक श्री राजू अगासमणि भी उपस्थित थे।
विधानसभा में उठा शिक्षकों की कमी का मुद्दा: 25,907 पद खाली, मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से ही राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा गरमा गया। अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के लिखित प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि प्रदेश के कुल 48,559 शासकीय स्कूलों में 25,907 शिक्षकीय पद रिक्त हैं।
कितने स्कूल और कितने पद खाली?
मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में संचालित सरकारी स्कूलों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
प्राथमिक शाला: 30,726
पूर्व माध्यमिक शाला: 13,085
हाई स्कूल: 1,872
हायर सेकेंडरी स्कूल: 2,876
इन स्कूलों में निम्नलिखित प्रमुख पद रिक्त हैं:
प्राचार्य: 3,443
व्याख्याता: 6,773
प्रधान पाठक (पूर्व माध्यमिक): 2,984
शिक्षक: 4,750
प्रधान पाठक (प्राथमिक): 1,533
सहायक शिक्षक: 6,424
कुल रिक्त पद: 25,907
भर्ती की योजना क्या है?
जब विधायक सिंह ने रिक्त पदों पर भर्ती की समयसीमा और कार्ययोजना के बारे में पूछा तो मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में कहा कि “भर्ती एक सतत प्रक्रिया है और इसकी समय-सीमा तय करना संभव नहीं है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया चल रही है लेकिन इसे पूरा होने में समय लगेगा।
यू-डाइस नंबरों की स्थिति
सदन में यह सवाल भी उठा कि युक्तियुक्तकरण से पहले और बाद में कितने शासकीय स्कूल यू-डाइस नंबर से संचालित हो रहे हैं? मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में कुल 4859 यू-डाइस नंबर थे, लेकिन युक्तियुक्तकरण के बाद सभी 48,559 स्कूलों के लिए यू-डाइस नंबर उपलब्ध हैं।
विपक्ष का तंज, शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस जवाब के बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है और सरकार शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद भर्ती में टालमटोल कर रही है। विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि “जब एक स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा।”
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पदों की भारी कमी और भर्ती में देरी से शिक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि राज्य सरकार इन 26 हजार रिक्तियों को भरने के लिए कब ठोस कदम उठाएगी।
तरपोंगी टोल पर प्रदर्शन के बाद NSUI के 9 पदाधिकारियों के खिलाफ FIR...
रायपुर । छात्र और युवा हितों को लेकर तरपोंगी टोल प्लाजा पर किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद एनएसयूआई के 9 पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर को लेकर एनएसयूआई ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे “दबाव की राजनीति” करार दिया है। संगठन ने साफ किया है कि वह छात्रों और युवाओं की लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा।
किन-किन पर दर्ज हुई एफआईआर?
प्रशासन ने जिन एनएसयूआई नेताओं पर नामजद एफआईआर दर्ज की है, उनमें नीरज पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष, अमित शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रशांत गोस्वामी, जिला अध्यक्ष, विशाल कुकरेजा, वैभव मुँजेवार, गावेश साहू, लोमन सोनवानी, जग्गू जांगड़े, जितेश वार्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
“छात्रों की आवाज़ को दबाने की कोशिश”
एनएसयूआई का कहना है कि यह कार्यवाही पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद छात्रों और युवाओं की बुनियादी मांगों को कुचलना है। प्रदर्शन के केंद्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार, शांतिपूर्ण यातायात, और नागरिक सम्मान की माँगें थीं।
नीरज पांडेय बोले: “हम डरने वाले नहीं”
प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कहा, “टोल प्रबंधन और शासकीय अधिकारियों की मिलीभगत से झूठी एफआईआर दर्ज कर हमें डराने की कोशिश की गई है। लेकिन एनएसयूआई डरने वाली नहीं है। यह लड़ाई छात्रों और युवाओं के अधिकारों की है और हम इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासन ने अपनी विफलता छिपाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की।
एनएसयूआई ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
टोल प्लाजा प्रबंधन की जांचजबरन वसूली और अव्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
छात्रों और युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता
नामजद नेताओं पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं
एनएसयूआई ने साफ किया है कि वह डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश के सामने झुकने वाली नहीं है। संगठन ने यह भी चेताया कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं और एफआईआर वापस नहीं ली गई, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने वालों पर दमन क्यों?
छत्तीसगढ़ वालों के लिए खुशखबरी... चार साल बाद पटरी पर लौटेंगी 13 लोकल ट्रेनें, इस तारीख से शुरू होगा संचालन
रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने कोरोना काल में बंद की गई 13 लोकल ट्रेनों (local trains) को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। 15 जुलाई से इन ट्रेनों का नियमित संचालन शुरू होगा। रेलवे बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद जोन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी ट्रेनें पूर्व निर्धारित समयसारिणी के अनुसार चलेंगी।इन ट्रेनों के शुरू होने से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, गोंदिया, कटंगी और इटवारी जैसे छोटे-बड़े स्टेशनों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर रोज यात्रा करने वाले यात्री, छात्र, कर्मचारी और ग्रामीण वर्ग इससे सीधे लाभान्वित होंगे। ट्रेनें बंद होने से यात्रियों को लंबे समय से परेशानी हो रही थी।
खाद-बीज संकट पर सदन में विपक्ष का हंगामा, निलंबित होने के बाद धरने पर बैठे...
रायपुर । विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही प्रदेश में खाद-बीज संकट को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शून्यकाल में राज्यभर में किसानों को खाद की भारी किल्लत का मुद्दा उठाया और इस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की।
डॉ. महंत ने कहा, "प्रदेश का किसान परेशान और आक्रोशित है। सरकार की नाकामी के कारण खाद की भारी कमी है, इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए।" उनके इस प्रस्ताव का समर्थन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी किया। बघेल ने कहा कि किसान दोगुनी कीमत पर खुले बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं। उमेश पटेल ने DAP खाद की कमी को गंभीर चिंता का विषय बताया।
कृषि मंत्री का जवाब और आसंदी का फैसला
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इस मुद्दे पर सदन में अपना वक्तव्य दिया। लेकिन वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मंत्री के जवाब से वह संतुष्ट हैं और इसलिए विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव नामंजूर किया जाता है।
इस फैसले से नाराज कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह तक पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी विधायकों ने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और विधानसभा में जमकर विरोध जताया। गर्भगृह में प्रदर्शन के चलते कई कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
गांधी प्रतिमा के सामने धरना
विधानसभा से बाहर आने के बाद कांग्रेस विधायकों ने गांधी प्रतिमा के सामने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायकों ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने और गंभीर मुद्दों से भागने का आरोप लगाया। "किसान विरोधी सरकार" के नारे लगाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक किसानों को खाद-बीज की सुविधा नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
विधानसभा के पहले दिन ही गरमाई सियासत ने साफ कर दिया है कि मानसून सत्र में किसान, खाद और कृषि संकट प्रमुख मुद्दा बने रहेंगे।
सदन में पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त और राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह को दी गई श्रद्धांजलि
रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन में पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शेखर दत्त और सक्ति रियासत के राजा व पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सदन की कार्रवाई की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिवंगत नेताओं के निधन की सूचना देते हुए की।
सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने-अपने अंदाज में दोनों दिवंगत नेताओं के व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों को याद किया।
विधायकों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगतों के सम्मान में शोक व्यक्त किया। इसके बाद सदन की कार्रवाई को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।
शेखर दत्त: सेवाभाव, सादगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शेखर दत्त का जीवन भारतीय प्रशासनिक सेवा में अनुकरणीय उदाहरण है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे।
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि माओवादी उन्मूलन को लेकर उनकी चिंता और योगदान को राज्य हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा कि उनका सपना था कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हो, और अब वह दिशा दिखाई देने लगी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि शेखर दत्त भले ही ऊंचे पदों पर रहे, लेकिन उनके व्यवहार में कभी अहंकार नहीं आया। राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल सौम्य और अनुकरणीय रहा।
राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह: विनम्र जनप्रतिनिधि और सामाजिक समरसता के प्रतीक
सक्ति रियासत के राजा और पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह के प्रति भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उन्हें राजनीतिक शुचिता और सामाजिक सेवा का प्रतीक बताया।
डॉ. चरणदास महंत ने उनके साथ पारिवारिक संबंधों को याद करते हुए कहा, "हमारे संबंध आत्मीय रहे। आखिरी दिनों में खटास जरूर आई, लेकिन मन में कोई वैर नहीं था।"
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि "राजा के लिए मैं लड़की देखने नेपाल तक गया था। रानी साहिबा को लेकर आया। आज उनके निधन के बाद रानी साहिबा अकेली हैं, दुखी हैं।"
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजा सुरेंद्र बहादुर को मिलनसार और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि बताया और कहा कि वे जनता के बीच सहज रूप से रहते थे और उनकी समस्याओं को सुलझाने में तत्पर रहते थे।
इस भावुक क्षण के बाद सदन की कार्यवाही 10 मिनट स्थगित की गई और फिर दिन का कामकाज शुरू हुआ।
RI परीक्षा को लेकर सदन में गहमा गहमी: विधायक मूणत ने राजस्व मंत्री को घेरा...
रायपुर। मानसून सत्र के पहले दिन पहले ही सवाल पर सदन गरमा गया। विधायक राजेश मूणत के सवालों को राजस्व मंत्री जवाब नहीं दे पाए। विधायक मूणत ने राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक कार्रवाई ना किए जाने को लेकर सवाल किया। विधायक मूणत ने मंत्री से पूछा कि जांच समिति की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई के लिए अब किसका इंतजार किया जा रहा है। अब तक घपलेबाजों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
विधायक राजेश मूणत ने कहा कि चलिए मंत्री से छोटे-छोटे सवाल करते हैं, पर जवाब स्पष्ट और साफ आना चाहिए। इतना कहने के साथ ही विधायक मूणत ने सवाल दागना शुरू किया। उनकी तरफ से पहला सवाल आया आरआई की परीक्षा हुई थी क्या, कुल कितने अभ्यार्थियों ने परीक्षा दी व नियम क्या था। मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देना शुरू किया। वे बोले आरआई की परीक्षा विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले शुरू हुई थी। फरवरी 2024 में परीक्षा परिणाम आया। परिणाम आने के बाद शिकायतों का सिलसिला प्रारंभ हुआ। इसके लिए पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था। जांच दल ने गड़बड़ी पाई थी।
मंत्री ने गड़बड़ियों को किया साफ-
मंत्री ने सदन को बताया कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि परीक्षा हाल में भाई-भाई को एक जगह,रिश्तेदारों को साथ -साथ बैठाकर परीक्षा दिलाई गई। मंत्री ने सदन को बताया कि शिकायतकर्ताओं ने वाट्सएप चेटिंग और काल डिटेल सहित अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्य पेश करते हुए इसकी विस्तृत जांच की मांग की थी। इस जांच के लिए हमने गृह विभाग को पत्र लिखा। गृह विभाग ने जांच से इंकार करते हुए पहले एफआईआर दर्ज कराने और जांच करने की बात कही। राजस्व विभाग को जांच के लिए सक्षम बताया।
EOW को सौंपा है जांच का जिम्मा-
राजस्व मंत्री ने सदन को बताया कि गड़बड़ी की जांच के लिए ईओडब्ल्यू को मामला सौंप दिया है। मंत्री ने यह भी बताया कि ईओडब्ल्यू ने 40 बिंदुओं पर जांच प्रारंभ कर दी है। विभाग ने अफसरों से जांच और पूछताछ के लिए अनुमति भी दे दी है। मंत्री ने विधायक मूणत के साथ ही सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि फर्जीवाड़े में जिनकी संलिप्तता सामने आएगी सभी जेल जाएंगे। हमारी मंशा साफ है कि घोटालेबाज बचना नहीं चाहिए। भारत माला परियोजना की तरह एक-एक बिंदुओं पर गहन जांच हो और दोषी सामने आए।
मूणत के इस सवाल का मंत्री नहीं दे पाए जवाब-
मंत्री के इस जवाब के बाद विधायक मूणत ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जब साफ हो गया कि गड़बड़ी की है। आंसरशीट में मोबाइल नंबर भी लिखा पाया गया है। रिपोर्ट में सब साफ है, इसके बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। कमेटी के रिपोर्ट के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मूणत ने कहा कि जांच कमेटी में सचिव स्तर के अफसर थे, उनकी रिपोर्ट है। यह कहते हुए मूणत ने जांच कमेटी में शामिल अफसरों के नाम भी सदन के सामने रख दिया। केडी कुंजाम विशेष सचिव, फरिहा आलम,अजय त्रिपाठी, अंशिका ऋषि पांडेय, ये जांच अधिकारी सचिव स्तर के हैं। इसके बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। विधायक के इस सवाल पर मंत्री चुप्पी साध गए। कोई जवाब देते नहीं बना।
मूणत के इस आरोप पर सदन में जमकर हुआ हंगामा-
विधायक मूणत ने कहा कि पीएससी घोटाला, पटवारी घोटाला,आरआई पदोन्नति परीक्षा ये सब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की देन है। मूणत के आरोप पर हस्तक्षेप करते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि जनवरी 2024 में आरआई की परीक्षा ली गई, विधायक आरोप लगा रहे हैं कि परीक्षा कांग्रेस शासनकाल में हुई। परीक्षा कब हुई आप बताए। मंत्री ने कहा कि जनवरी में परीक्षा हुई। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि आपके सरकार में परीक्षा हुई आरोप हम पर लगा रहे हैं। कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर जमकर नारेबाजी की।
चार साल बाद पटरी पर लौटेंगी 13 लोकल ट्रेनें, 15 जुलाई से होगा संचालन शुरू
रायपुर: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने कोरोना काल के दौरान बंद की गई 13 लोकल ट्रेनों को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। रेलवे द्वारा 15 जुलाई से इन ट्रेनों का नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद जोन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सभी ट्रेनें पूर्व निर्धारित समयसारिणी के अनुसार चलेंगी। इन ट्रेनों के शुरू होने से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, गोंदिया, कटंगी और इटवारी जैसे छोटे-बड़े स्टेशनों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
विस अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक संपन्न
सीएम विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत समेत वरिष्ठ सदस्य रहे मौजूद
रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधानसभा के आगामी कार्य संचालन और सत्र की रूपरेखा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक अजय चंद्राकर, विधायक धर्मजीत सिंह सहित समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान सदन में आगामी मानसून सत्र के सुचारू संचालन, विधायी कार्यों और प्रश्नकाल की रूपरेखा पर चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से रचनात्मक सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि सत्र की गरिमा बनाए रखते हुए सार्थक बहस और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता दी जानी चाहिए।
बैठक में विपक्ष व सत्ता पक्ष दोनों की ओर से सकारात्मक वातावरण में विचार-विमर्श हुआ और सभी ने एकमत होकर सत्र को व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर होगी स्थापित: केन्द्रीय मंत्री उईके
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली पर आधारित जनजातीय संग्रहालय का केन्द्रीय जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने अवलोकन किया और नवा रायपुर में बनाए गए इस संग्रहालय में आदिवासी जीवन शैली के प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृति विरासत विश्व पटल पर स्थापित होगी। इससे जनजातीय युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति आत्मगौरव का भाव जगेगा।
इस अवसर पर आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग मंत्री राम विचार नेताम भी उपस्थित थे। केन्द्रीय जनजातीय राज्यमंत्री दुर्गादास ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातियों के संर्वागीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना में यह प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे।
उन्होंने संग्रहालय के निकट ही बनाए जा रहे शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय के निर्माण की समीक्षा की। इस संग्रहालय के लिए केन्द्र सरकार ने 45 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की है। इस संग्रहालय को आगामी 30 सितम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रमुख सचिव बोरा ने इस दौरान संग्रहालय में प्रयुक्त डिजीटल एवं एआई तकनीक के संबंध में जानकारी दी। बैठक में टीआरटीआई के संचालक जगदीश कुमार सोनकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
संग्रहालय में 14 गैलरियों में जनजातीय जीवनशैली के विभिन्न अवसरों का है झलकियां
जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय संस्कृति, जीवनशैली और परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए 14 गैलरियों का निर्माण किया गया है। संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में जनजातीयों के परंपरागत वाद्ययंत्रों, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, उनमें कृषि की परंपरागत तकनीकें एवं उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इसी प्रकार लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई, कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणांे व परंपरागत तकनीकों को दर्शाया गया है। संग्रहालय में सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला, जनजातियों में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि प्रदर्शित किए गए हैं।